सत्यम कम्प्यूटर्स घोटाला: देश का अब तक का सबसे बड़ा ऑडिट फ्रॉड

सत्यम घोटाले को देश का अब तक का सबसे बड़ा ऑडिट फ्रॉड माना जाता है, जो 7 जनवरी 2009 को सामने आया था.

सत्यम कंप्यूटर की स्थापना 1987 में हुई. 1992 में ये पब्लिक लिमिटेड कंपनी में तब्दील हुई. रामालिंगा राजू ने महज 20 कर्मचारियों के साथ मिलकर कंपनी की शुरुआत की थी. जब कंपनी घोटाले में फंसी तब 66 देशों में कंपनी का कारोबार फैला हुआ था और इसमें करीब 53 हज़ार कर्मचारी काम करते थे.

सत्यम घोटाले को देश का अब तक का सबसे बड़ा ऑडिट फ्रॉड माना जाता है, जो 7 जनवरी 2009 को सामने आया था.

22 जनवरी, 2009 को सीआईडी ने अदालत को बताया कि सत्यम में कुल 40 हजार कर्मचारी काम करते थे. कंपनी ने इन्हीं कर्मचारियों की संख्या को 53 हजार बताया हुआ था. राजू इन तेरह हजार कर्मचारियों के वेतन के रूप में हर महीने 20 करोड़ रुपये विद ड्रॉ कर रहे थे. राजू ने निवेशकों के पैसे को बिना निवेशकों को जानकारी दिए अपने बेटों के नाम पर बनाई कंपनी मायता इंफ्रा और मायता प्रोपर्टीज में डायवर्ट किया था. इसके अलावा उन पर कंपनी के मुनाफा गलत दर्शाने का आरोप भी था. 6 साल चली जांच में तीन हज़ार से ज्यादा डाक्यूमेंट्स और 226 चश्मदीद के बयानों को आधार बनाया गया. सेबी के मुताबिक, फर्जीवाड़े के जरिये 6 करोड़ निवेशकों को सत्यम के कर्ता-धर्ताओं ने करीब 7800 करोड़ रुपये को चूना लगाया था.

घोटाले के सामने आने से पहले सत्यम भारत की आईटी कंपनियों में चौथे स्थान पर थी. घोटाले के सामने आने के बाद सत्यम भारत की सबसे कम वैल्यूबल आईटी कंपनी बन गई. बाद में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने सत्यम कंप्यूटर्स का अधिग्रहण कर लिया. जुलाई, 2009 में सत्यम का नाम महिंद्रा सत्यम हो गया. 21 मार्च, 2012 को दोनों कंपनियों के बोर्ड ने इस अधिग्रहण को मंजूरी के बाद महिंद्रा सत्यम का विलय टेक महिंद्रा में कर दिया गया.

 

 


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