अटल बिहारी वाजपेयी के बड़े निर्णय जिसके लिये वे हमेशा याद किये जायेंगे…

सागरिका चौधरी, जदयू नेत्री एवं पटना यूनिवर्सिटी में सिंडिकेट मेम्बर 

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 93 साल की उम्र में निधन हो गया, वे भारत के पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा किया था. वे देश के दसवें प्रधानमंत्री बने थे. अटल बिहारी वाजपेयी ने सबसे बड़े गठबंधन के साथ सरकार चलाकर एक रिकाॅर्ड बनाया था. उन्होंने अपने कार्यकाल में कई ऐसे फैसले किये जिसके कारण विश्व में भारत की छवि बदल गयी. संघ के प्रचारक होने के बावजूद वे सर्वमान्य नेता थे. वे एक सफल राजनेता तो थे ही एक नरम दिल कवि भी थे. अपने प्रधानमंत्रित्व काल में उन्होंने कई ऐसे निर्णय किये जिसने पत्थर पर लकीर खींच दी.

 

स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना (Goldern Quadrilateral)


प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना योजना शुरू की जिसके जरिये चेन्नई, मुंबई, दिल्ली और कोलकाता को एक चतुर्भुज में जोड़ने के लिए सड़क परियोजना की शुरुआत हुई. हाईवे को डेवलप किया गया. इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत देश के गावों को  पक्की सड़क से जोड़ने की आधारशीला रखी गयी. कहते हैं कि वाजपेयी जी के कार्यकाल में जितने सड़क बने उतने कभी नहीं बने थे. अपने सड़क निर्माण कार्य के लिए वाजपेयी को दूसरा शेरशाह भी कहा गया.

24 अक्‍टूबर 1998 को तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्‍वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग परियोजना की घोषणा की थी, जिसे उस समय की दुनिया की सबसे बड़ी हाईवे परियोजना माना जाता है. 5846 कि.मी. का स्वर्णिम चतुर्भुज (जीक्यू) राजमार्ग मूल रूप से राजमार्गों का एक नेटवर्क है, जो देश के चार प्रमुख महानगरों को चार दिशाओं – दिल्ली (उत्तर), चेन्नई (दक्षिण), कोलकाता (पूर्व) और मुंबई (पश्चिम) में जोड़ता है – जिससे एक चतुर्भुज बन जाता है और इसीलिए इसका नाम गोल्डन क्वाड्रिलेटरल (स्वर्णिम चतुर्भुज) है.

2001 में हुई शुरू 

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य आधिकारिक तौर पर 2001 में शुरू हुआ. इसके 2006 तक पूरा होने का अनुमान था, परन्तु यह वास्तव में जनवरी  2012  में पूरी हुई. स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना में नए एक्सप्रेस हाईवे का निर्माण शामिल है, जिसमें मौजूदा राजमार्गों के नवीनीकरण के लिए चार या छह लेन का विस्तार और मरम्मत शामिल है.

परियोजना से जुड़े प्रमुख शहर

स्वर्णिम चतुर्भुज भारत के प्रमुख शहरों के बीच कुशल परिवहन लिंक प्रदान करता है जैसे नई दिल्ली; जयपुर, उदयपुर, अजमेर (राजस्थान); अहमदाबाद, गांधीनगर (गुजरात); मथुरा, वाराणसी, आगरा, कानपुर (उत्तर प्रदेश); मुंबई और पुणे (महाराष्ट्र); बंगलुरू (कर्नाटक); विशाखापटट्नम (आंध्र प्रदेश); चेन्नई (तमिलनाडु); भुवनेश्वर (ओडिशा), कोलकाता (पश्चिम बंगाल) आदि.

स्वर्णिम चतुर्भुज के चारों खण्ड 

खण्ड-एक : यह राष्ट्रीय राजमार्ग 2 (एनएच 2) को दिल्ली से कोलकाता तक जोड़ता है. कुल विस्तार 1454 कि.मी. है दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों तक विस्तारित हैं. प्रमुख शहरों में दिल्ली, मथुरा, फरीदाबाद, आगरा, इलाहाबाद, फिरोजाबाद, कानपुर और वाराणसी शामिल हैं.
खण्ड दो : यह कोलकाता से चेन्नई, एनएच 60 (खड़गपुर से बालासोर) और एनएच 5 (बालासोर से चेन्नई) तक एनएच 6 को कवर करता है. कुल खंड विस्तार 1684 कि.मी. है. राज्यों में पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और तमिलनाडु शामिल हैं.
खण्ड तीन : कुल विस्तार 1290 कि.मी. है इसमें एनएच 4 (मुंबई से बेंगलुरू), एनएच 7 (बेंगलुरू से कृष्णागिरि, तमिलनाडु) और एनएच 46 (कृष्णागिरी के पास चेन्नई) शामिल हैं. राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं.


खण्ड चार : राष्ट्रीय राजमार्ग 8 (दिल्ली से किशनगढ़), राष्ट्रीय राजमार्ग 79 ए (अजमेर बायपास), एनएच 79 (नसीराबाद से चित्तौड़गढ़) और एनए 76 (चित्तौड़गढ़ से उदयपुर) के कुछ हिस्सों को शामिल करता है, यह खंड विस्तार 149 कि.मी. है. राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और नई दिल्ली शामिल हैं. दिल्ली, अजमेर, उदयपुर, गुरुग्राम, जयपुर, गांधीनगर, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ता है.

गांवों को सड़क से जोड़ा

इसके अलावा भी अटल सरकार की ओर से प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की शुरुआत की गई. इस योजना का लक्ष्य था कि गांव के 500 या उससे अधिक वाली आबादी के गांवों को सड़क से जोड़ना का प्लान था. आधिकारिक तौर पर इस योजना की साल 2000 में हुई थी.

निजीकरण
अटल बिहारी यह चाहते थे कि बिजनेस और इंडस्ट्री में सरकार का हस्तक्षेप कम से कम हो, इसके लिए उन्होंने ठोस निर्णय लिये और एक विनिवेश मंत्रालय का गठन किया. भारत अल्यूमिनियम कंपनी और हिंदुस्तान जिंक इसके उदाहरण हैं, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी का यह निर्णय विवादों में भी रहा. उन्होंने नौकरशाही को भारत के आर्थिक प्रगति के मार्ग में बाधा माना और इसे downsize करने के प्रयास में लगे रहे. हालाँकि इसके लिए कम्युनिस्ट पार्टियों की आलोचना भी सहनी पड़ी. पर वे अपने रास्ते पर अडिग चल रहे थे और इस मामले में उन्होंने नरसिम्हा राव के अजेंडे को आगे ले जा रहे थे.

 

सर्व शिक्षा अभियान 

14 साल के उम्र के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए वर्ष 2001 में सर्व शिक्षा अभियान की शुरुआत करवाई, ताकि बच्चों को शिक्षित किया जा सके और शिक्षा का अधिकार उन्हें मिले. इस योजना का बहुत लाभ मिला और ड्रापआउट में भारी गिरावट दर्ज की गयी.

सर्व शिक्षा अभियान की शुरुआत अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा एक निश्चित समयावधि के तरीके से प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण को प्राप्त करने के लिए किया गया, जैसा कि भारतीय संविधान के 86वें संशोधन द्वारा निर्देशित किया गया है जिसके तहत 6-14 साल के बच्चों (2001 में 205 मिलियन अनुमानित) की मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के प्रावधान को मौलिक अधिकार बनाया गया है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2010 तक संतोषजनक गुणवत्ता वाली प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण को प्राप्त करना है. एसएसए (SSA) में 8 मुख्य कार्यक्रम हैं. इसमें आईसीडीएस (ICDS) और आंगनवाड़ी आदि शामिल हैं. इसमें केजीबीवीवाई (KGBVY) भी शामिल है. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना की शुरूआत 2004 में हुई जिसमें सारी लड़कियों को प्राथमिक शिक्षा देने का सपना देखा गया, बाद में यह योजना एसएसए के साथ विलय हो गई.

विदेश नीति के शिल्पकार अटल: 

आजादी के बाद भारत की विदेश नीति का खाका पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बनाया तो इसकी इमारत बुलंद करने और नई शक्ल देने में बड़ी भूमिका अटल बिहारी वाजपेयी की थी. शीतयुद्ध के पुराने खेमों से निकल अमेरिका, इजराइल और पूर्वी एशिया से बेहतर रिश्तों तक भारतीय विदेश नीति को देश 11वें प्रधानमंत्री वाजपेयी ने नई रफ्तार दी.

चीन से संबंध सुधार से लेकर पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेर जवाबदेह बनाने तक वाजपेयी की सोच के निशान आज तक नजर आते हैं. पोखरण के परमाणु विस्फोट ने नाभिकीय ताकत ही नहीं दुनिया के मंच पर भी भारत की धमाकेदार एंट्री की पटकथा लिखी. आसियान से लेकर प्रशांत क्षेत्र तक भारत के अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के विस्तार को लेकर जो पटरी वाजपेयी के कार्यकाल में बिछी उसपर आज तक विदेश नीति की गाड़ी चल रही है.

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल कहते हैं कि प्रधानमंत्री वाजपेयी के कार्यकाल में हुए 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों ने दुनिया में भारत का दबदबा बढ़ाया. साथ ही पश्चिमी मुल्कों के आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद हुए तेज रफ्तार विकास ने भारतीय क्षमताओं का लोहा भी मनवाया.

एटमी परीक्षणों के बाद नाभिकीय हथियारों का पहले प्रयोग ना करने पर वाजपेयी के एकतरफा एलान ने ही बाद में भारत के साथ अन्य मुल्कों के परमाणु सहयोग की नींव रखी। परमाणु अप्रसार संधि और सीटीबीटी जैसे समझौतों पर दस्तखत ना करने का बावजूद आज भारत के साथ हर बड़ा मुल्क नाभिकीय कारोबार को बेताब है.

अन्य मुल्कों से रिश्तों का शिल्पी

अटल की दूरदृष्टि ही थी जिसने नब्बे के दशक में ही एशियाई मुल्कों की आर्थिक संभावनाओं को आंक लिया था. उन्होंने लुक-ईस्ट नीति की नींव रखी जिसके तहत चीन के साथ रिश्ते सुधारने के अलावा आसियान मुल्कों के साथ भारत के सक्रिय संपर्क व सहयोग की शुरुआत हुई.

वाजपेयी के कार्यकाल में भारत ने तिब्बत को चीन का क्षेत्र माना तो चीन ने बदले में सिक्कम को भारत का सूबा स्वीकार किया. अमेरिका और इजराइल जैसे नए सहयोगी जुटाने और पुराने दोस्त रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी की नींव रखने वाली अटल सरकार की सोच ही थी

पाक से दोस्ती की पहल, आतंकवाद पर सिखाए जवाबदेही के सबक भी

भारत के कठिन पड़ोसी पाकिस्तान के साथ रिश्तों और व्यवहार पर भी वाजपेयी ने व्यावहारिक विदेशनीति का दौर शुरू किया। पाक से अमन और दोस्ती की लाहौर बस लेकर सरहद पार पहुंचने वाले वाजपेयी थे तो विश्वासघाती कारगिल दुस्साहस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का फैसला लेने में भी उन्होंने हिचक नहीं दिखाई.

कारगिल के पटकथा लेखक और फौजी शासक परवेज मुशर्रफ को भी साझा बयान में वादा करना पड़ा कि भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए पाक अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं करने देगा. वाजयेपी सरकार का कार्यकाल खत्म होने से पहले 2004 में हुए इस फैसले ने हालांकि उनके ही कार्यकाल में पाक के साथ संबंध सुधार के दिल्ली-लाहौर बस सेवा और समझौता एक्सप्रेस जैसे सरहद के आर-पार आम आवाम की सहूलियतों के फैसले भी हुए.

टेलीकाॅम रिवाॅल्यूशन
अटल बिहारी की सरकार ने टेलीकाॅम इंडस्ट्री में रिवाॅल्यूशन ला दिया. नयी दूरसंचार नीति के तहत निश्चित लाइसेंस शुल्क की जगह रेवेन्यू शेयरिंग सिस्टम को लागू किया गया. भारत संचार निगम लिमिटेड की स्थापना हुई, जिसने एक क्रांति सा ला दिया.


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