क्या बिहार की आईएस लॉबी मनीषा दयाल की गिरफ्त में आ चुकी थी?

मनीषा दयाल काण्ड में रोज नए नए खुलासे हो रहे हैं. एक निहायत ही अनुभवहीन पर देखने में आकर्षक महिला ने ऐसा क्या किया कि महज़ दो तीन सालों में वो एनजीओ के क्षेत्र में सिरमौर हो गयी? बिहार की आईएस लॉबी क्यों मनीषा दयाल पर मेहरबान हो गयी? कैसे हर दल के राजनीतिज्ञ उसकी पेज थ्री पार्टियों में शान बढाते थे. किस तरह उसने नेटवर्किंग और लॉबी करके समाज सेवा के क्षेत्र में वर्षों से काम कर रहे सामाजिक संस्थाओं को हाशिये पर ला दिया? अगर उसके शेल्टर होम में दो महिलाओं की मौत से उसकी पोल नहीं खुलती, तो आगे वो और क्या क्या गुल खिलाने वाली थी?  जिस महिला ने बिहार के पेज थ्री पार्टियों में इतने कम समय में हलचल मचा कर रख दिया, महज दो सालों में उसने दो दो फ्लैट्स खरीद लिए, कांग्रेस विधायक ने उसे पजेरो जैसे महँगी गाडी गिफ्ट (?) कर दी, आने वाले वक़्त में क्या पेज थ्री सोशलाइट समाज सेवा से राजनीति में आकर सेवा तो नहीं करने वाली थी? फिलहाल उसके नित नए खुलासे से एनजीओ सेक्टर हांफ रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनजीओ के खिलाफ आक्रोश में हैं, और उन्होंने कामों को एनजीओ सेक्टर से लेकर सरकारी विभागों में समेटना शुरू कर दिया है.

पर नए खुलासे में पता चल रहा है कि खुद बिहार के नामी गिरामी आईएस मनीषा दयाल के गोरे काले धंधों में सहभागी थे.

विदेश में भोजपुरी गौरव सम्मान दिलाकर मनीषा ने आईएएस लॉबी में बढ़ायीं नजदीकियां.  एनजीओ संचालक और आसरा होम की ट्रेजरर मनीषा दयाल की बिहार के आईएएस लॉबी और रसूखदारों से यूं ही नजदीकियां नहीं थी. इवेंट मैनेजमेंट के जरिये विदेशों तक होने वाले भव्य कार्यक्रम में बिहार के आईएएस और रसूखदार मनीषा दयाल की ‘दया’ से फ्री ऑफ कास्ट मजे करते थे. मनीषा दयाल का बैकग्राउंड खंगाल रही एसआईटी को कुछ प्रूफ मिला है. कुछ फोटोग्राफ मिले है, सीडीआर से भी लंबी बातचीत के प्रमाण मिले हैं.

इसी मई माह में मनीषा दयाल ने बिहार के कई आईएएस अधिकारियों को मलयेशिया की सैर करायी थी. वहां पर आयोजित भोजपुरी गौरव सम्मान में बिहार के आईएएस अधिकारियों को सम्मानित किया गया था. इस कार्यक्रम को मलयेशिया के पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित किया गया था. इसमें इंडिया से मनीषा दयाल और बिहार के एक राज नेता के रिश्तेदार व मनीषा दयाल के करीबी भी भागीदार थे. अब पुलिस के संज्ञान में यह मामला अाया है. पुलिस उन अाईएएस अधिकारियों की शिनाख्त करने में जुटी हुई है, इसके बाद उसका पूरा कनेक्शन खंगाला जायेगा. यहां बात दें कि जिस दिन से मनीषा दयाल पुलिस के गिरफ्त में आयी है, कई वीआईपी के होश फाख्ता हो गये हैं. फिलहाल देखना होगा कि आखिर यह जांच-पड़ताल कितनी आगे बढ़ पाती है.

मनीषा दयाल ने  अपने एनजीओ के काम को विस्तार देने के लिए सरकारी सिस्टम का इस्तेमाल करना  शुरू किया तो चिरंतन और  पत्रकार प्रेम ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाया. प्रेम समय समय पर मनीषा दयाल को  सलाह देता था. इसके अलावा मुजफ्फरपुर कांड का गुनहगार ब्रजेश ठाकुर भी मनीषा दयाल की मदद करने को आगे आया. मनीषा दयाल  दयाल ब्रजेश ठाकुर को अपना रोल मॉडल मानती थी. दोनों के करीबी रिश्ते की वजह से समाज कल्याण विभाग में मनीषा की पहुंच बन पायी. सारी सेटिंग हुई, इसके बाद मनीषा को आसरा होम का काम मिला.
पुलिस की इस जांच में अभी बहुत कुछ सामने आना बाकी है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि मनीषा दयाल और चिरंतन बहुत ही शातिर हैं. उन्होंने एनजीओ से जुड़े दस्तावेजों को गायब कर दिया है. उसके घर से भी कुछ खास बरामद नहीं हो सका है. ऐसे में अगर जरूरत पड़ी तो दोबारा मनीषा और चिरंतन को रिमांड पर लिया जायेगा.
बिहार की जनता को इस बात का भी इन्तजार है कि आखिर कौन कौन से वे आईएस ऑफिसर हैं, जो समाज सेवा का वचन लेकर इस सर्विस में आते हैं, फिर उसके बाद गोरखधंधे में लग जाते हैं?

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