बिहार के लगभग सभी शेल्टर होम में बच्चियों के साथ बलात्कार किया गया है: TISS रिपोर्ट

टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज की सार्वजनिक हो गयी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से इसका जिक्र है कि बिहार के लगभग हर शेल्टर होम में कमोबेश मात्रा में सेक्सुअल एब्यूज की घटना हो रही है. 2017 में बिहार सरकार ने TISS को राज्य में शेल्टर होम्स के सोशल ऑडिट का काम सौंपा था. TISS ने अपनी रिपोर्ट इस साल अप्रैल में समाज कल्याण विभाग को सौपा था.

इस 100 पेज के रिपोर्ट के अनुसार, ब्रजेश ठाकुर मुजफ्फरपुर में शेल्टर होम तमाम नियम कानून को ताक पर रख कर चलाता था. बहुत सारी बच्चियों ने अपने साथ यौन दुर्व्यवहार और शारीरिक हिंसा की शिकायत की थी. बाद में मेडिकल रिपोर्ट में ३४ लड़कियों के बलात्कार की बात सामने आई.

ब्रजेश ठाकुर की संस्था के अलावा, ॐ साईं संस्था के द्वारा चलाई जा रही संस्था ” सेवा कुटीर” से भी शारीरिक हिंसा और बलात्कार की भी घटनाएँ दर्ज की गयीं.  कुछ लड़कियों ने शिकायत की कि उन्हें काम देने के नाम पर संस्था में लाया गया. टीम को इन संस्थाओं ने डॉक्यूमेंट नहीं दिया.

मोतिहारी में ” निर्देश” एनजीओ के द्वारा लड़कों के लिए चलाये जा रहे शेल्टर होम में भी शारीरिक हिंसा और यौन दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आयीं.  बड़े लड़कों और छोटे बच्चों को साथ में रखा गया, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है.

” सखी” नामक संस्था और भागलपुर में  चल रहे चिल्ड्रेन होम से भी बच्चों के खिलाफ यौन शोषण और हिंसा के मामले दर्ज किये गए.  जब TISS की टीम ने कंप्लेन बॉक्स खोलने की मांग की, तो चाभी गुम बता कर मामले को टालने का प्रयास किया गया.  बाद में काफी टालमटोल के बाद जब बक्से खोले गए, तो उन बक्सों के शिकायती चिट्ठियों का अम्बार निकला.

मुंगेर जिले में एनजीओ ” पनाह” के द्वारा चलाये जा रहे शेल्टर होम के बच्चों को सुपरिन्टेन्डेन्ट के आवास पर काम करने के लिए बाध्य किया गया. रिपोर्ट कहता है कि मना करने की स्थिति में बच्चों के साथ मार पीट की गयी. एक बच्चे ने अपने गाल पर तीन इंच लंबा घाव दिखाया, जो सुपरिन्टेन्डेन्ट के द्वारा मार पीट के चलते बना.

एनजीओ ” नोवेल्टी वेलफेयर सोसाइटी” के द्वारा चलाये जा रहे शेल्टर होम की लड़कियों ने TISS की टीम को बताया कि बाथरूम में अंदर से बंद करने के लिए कड़ी नहीं रहती थी और उन्हें बहुत डर लगता रहता था.

गया जिलें में चिल्ड्रेन होम बेहद शोषक तरीके से चलाया जा रहा था. बच्चों को ताले के अन्दर बंद रखा जाता था. कुछ बच्चों ने शिकायत की कि उन्हें कुछ महिला स्टाफ दुसरे महिला स्टाफ के लिए अश्लील मैसेज लिखने के लिए बाध्य करती थीं.

कैमूर में ” ग्राम स्वराज सेवा संस्थान” के द्वारा चलाये जा रहे शेल्टर होम में बच्चियों ने टीम से शिकायत की कि वहां का सिक्यूरिटी गार्ड लड़कियों के साथ बलात्कार में संलग्न था.

रिपोर्ट ने आरोप लगाया कि तीन एडॉप्शन विशेषज्ञ संस्थाएं: पटना में नारी गुंजन, मधुबनी में “RVESK” और कैमूर में “ज्ञान भारती”  में रहने का कंडीशन जीवन के लिए हानिकारक था.

अररिया के एक सरकारी शेल्टर होम में एक सिक्यूरिटी गार्ड बच्चों के साथ काफी हिंसक तरीके से पेश आता था. पूछने पर सुपरिन्टेन्डेन्ट ने खुद को असहाय बताया क्योंकि सिपाही बिहार पुलिस का था.

रिपोर्ट में जिक्र है कि पटना में IKARD संस्था के द्वारा चलाये जा रहे शेल्टर होम में हिंसक वातावरण से टूट कर एक बच्ची ने आत्महत्या कर ली, जबकि एक और बच्ची ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया.

गया की संस्था ‘सेवा कुटीर” के शेल्टर होम में परिस्थितियां परेशां कर देने वाली थीं. जबकि पटना के ” डॉन बोस्को टेक सोसाइटी” के द्वारा चलाये जा रहे शेल्टर होम में लड़के लड़कियों दोनों के साथ गाली गलौज और मार पीट की जा रही थी.

मंजू वर्मा के खिलाफ आर्म्स एक्ट में  FIR :
17 अगस्त को पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के चेरियाबरियापुर की श्रीपुर पंचायत के अर्जुन टोला स्थित घर  16 सदस्यीय सीबीआई की  टीम ने छह घंटे तक छापेमारी की थी. सीबीआई की टीम ने मंजू वर्मा के घर से  कुल 10 सामान जब्त कर अपने साथ ले गयी थी. सीबीआई की टीम ने उनके घर से कई  जमीन के कागजात, कई बैंकों की पासबुक, चेकबुक, फोटो एलबम, आवेदन की कॉपी  और कई कागजात जब्त किये थे.
इस दौरान 50 जिंदा कारतूस भी बरामद किये गये थे. सुबह  7:30 बजे से शुरू हुई छापेमारी 1:45 बजे तक चली थी. मुजफ्फरपुर बालिका गृह दुष्कर्म मामले में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा का कनेक्शन बालिका गृह चलाने वाले एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति के संरक्षक ब्रजेश ठाकुर के साथ सामने आया है.
पति का नाम आने के बाद देना पड़ा था इस्तीफा
बालिका गृहकांड के  मास्टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर के मोबाइल का सीबीआई ने सीडीआर निकाला तो ब्रजेश व  पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा के बीच कुल 17 बार बातचीत  होने की  पुष्टि हुई थी. इसके बाद मंजू वर्मा को आठ अगस्त को मंत्री पद से इस्तीफा  देना पड़ा था. हालांकि, मंजू वर्मा का कहना है कि उनके पति निर्दोष हैं और  जांच में निर्दोष साबित होंगे. उन्हें  एक साजिश के तहत फंसाया जा रहा  है.

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड : दो महिला आरोपियों को सरकारी गवाह बना सकती है सीबीआई

मुजफ्फरपुर बालिका गृह में लड़कियों के साथ हुई शारीरिक, मानसिक व यौनशोषण के मामले की तफ्तीश में लगी सीबीआई की जांच टीम दो महिला आरोपियों को सरकारी गवाह बना सकती है. कभी ब्रजेश ठाकुर के लिए काम करने वाली ये महिलाएं उसके जुर्म की पोल खोलेंगी.

31 मई को मुजफ्फरपुर के महिला थाने में यौनशोषण का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने मीनू देवी, मंजू देवी, इंदू कुमारी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा,चंदा देवी (गृह माता) समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था. इन्हीं में से दो महिलाओं को सरकारी गवाह बनाने की संभावना है. पुलिस ने इस मामले में ब्रजेश कुमार ठाकुर, विकास कुमार, सीपीओ रवि कुमार रौशन, गृह माता मीनू देवी, परामर्शी मंजू देवी, इंदू कुमारी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा, चंदा देवी (गृह माता) व दिलीप कुमार वर्मा आरोपी बताना है. इनमें दिलीप वर्मा फरार है.

सरकारी फंड हड़पने का खास तरीका
एनजीओ की आड़ में सरकारी फंड हासिल करने के लिए ब्रजेश ठाकुर ने खास तरीका अपनाया था. कागजात की जांच में पता चला है कि ब्रजेश के एनजीओ की गवर्निंग बॉडी में उसके ही परिवार के लोग या कुछ करीबी रखे जाते थे. पत्नी, बेटी, बेटा आदि को अहम पदों पर रखा था, ताकि राशि के गबन में कोई अंगुली नहीं उठे. अखबार या अन्य कारोबार में भी परिजनों को अहम जिम्मेदारी या पद मिले थे.

विरोध करने पर मधु करती थी मारपीट

मुजफ्फरपुर के साहू रोड स्थित बालिका गृह में ब्रजेश के साथ उसकी करीबी राजदार मधु कुमारी ने आतंक राज कायम कर रखा था. विरोध में बोलने वाली लड़कियों को मधु मारपीट कर कंट्रोल करती थी. एक बांग्लादेशी पीडि़ता के मुताबिक पटना से हाजीपुर जाने के दौरान बेहोश होने के बाद उसने खुद को मुजफ्फरपुर के महिला गृह में पाया. वहां उसके पैसे, पासपोर्ट आदि मधु ने छीन लिए आैर अक्सर मारपीट करती थी.


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