सुप्रीम कोर्ट का उप्र सरकार को नोटिस- योगी पर केस क्यों न चलाया जाए

जनवरी 2007 में गोरखपुर में दंगा भड़के थे जिसमें एक युवक की मौत भी हो गई थी.  22 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी पर मुकदमा चलाने की मांग की याचिका खारिज कर दी थी.

लखनऊ. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 2007 में भड़काऊ भाषण के मामले में उत्तरप्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया. कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ नोटिस जारी किया, जिसमें योगी के खिलाफ केस चलाने की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी गई थी. कोर्ट ने सरकार से योगी के खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत न देने की वजह पूछी है. सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का वक्त दिया.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 22 फरवरी को योगी और कैबिनेट मंत्री शिव प्रताप शुक्ल के खिलाफ केस चलाए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी थी. कोर्ट ने सरकार के फैसले पर मुहर लगाई थी। सरकार ने पर्याप्त सबूत न होने के आधार पर केस चलाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था.

मामले में 10 दिन जेल में भी रह चुके हैं योगी:जनवरी 2007 में गोरखपुर में दंगा हुआ था. इसमें एक युवक की मौत भी हो गई थी. तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था, जिसके बाद योगी को गिरफ्तार किया गया था और 10 दिनों तक जेल में रखा गया था. कोर्ट से जमानत मिलने पर वह बाहर आए थे.

आने वाले दिनों में योगी की गतिविधियों पर ध्यान रखना रोचक होगा. सवाल ये है कि क्या योगी अभी जेल जायेंगे? या सत्ता से हटने के बाद? या योगी के खिलाफ भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस केस का इस्तेमाल उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के पर कतरने में करेगा और केस बरसो बरस चलता रहेगा?

 


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