मेनका गाँधी को मुज़फ्फरपुर शेल्टर होम पर रिपोर्ट सौंपी गयी; मनीषा दयाल से पूछताछ जारी

मुजफ्फरपुर के साहू रोड स्थित बालिका गृह कांड को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी को रिपोर्ट सौंपी गई है. यह रिपोर्ट राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने तैयार की थी. इसमें पीड़ित लड़कियों की काउंसिलिंग आदि से जुड़े साइकेट्रिक टीम की रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है. लड़कियों के साथ शारीरिक, मानसिक व यौनशोषण का संगीन मामला सामने आने के बाद आयोग की टीम ने बालिका गृह जाकर जांच-पड़ताल की थी. इस क्रम में बाल संरक्षण इकाई के जिला कार्यालय से कई फाइलें जब्त कर आयोग की टीम अपने साथ ले गई थी. जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों व कर्मचारियों के लापरवाही बरतने की बात कही गई है.  इस बाबत पूछने पर आयोग की अध्यक्ष स्तुति कक्कड़ ने कहा कि अभी मैंने रिपोर्ट नहीं देखी है. रिपोर्ट में जो भी होगा, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

ब्रजेश के एनजीओ में अहम पदों पर रिश्तेदारों के नाम


बालिका गृह कांड में मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर ने अपने एनजीओ ‘सेवा संकल्प एवं विकास समिति’ में अहम पदों पर रिश्तेदारों को रखा था. मकसद था सरकारी फंड की राशि को आसानी से डकार जाना. एनजीओ के गवर्निंग बॉडी के कुल सात सदस्यों में चार अहम पदों पर ब्रजेश ठाकुर के साला, पत्नी, चचेरा भाई व मौसा हैं. शेष तीन लोग भी करीबी बताए गए हैं. ब्रजेश ने अपने साथ बेटे के नाम का जिक्र कहीं नहीं किया है. हालांकि समाज कल्याण विभाग से हुए पत्राचार में ब्रजेश ने खुद काे एनजीओ का संरक्षक बताया है. निबंधन विभाग से सीबीआई को मिले कागजातों की जांच में यह हकीकत सामने आई है. रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय में ब्रजेश ठाकुर ने सेवा संकल्प एवं विकास समिति का जो बायलॉज दिया है, उसमें सात सदस्यों की कमेटी गठित है.
सीबीआई गवर्निंग बॉडी के सदस्यों की कर रही तलाश 
इस बीच सीबीआई की टीम निबंधन विभाग से मिली एनजीओ की गवर्निंग बॉडी की लिस्ट लेकर संबंधित सदस्यों की तलाश में लग गई है. हालांकि, कागजातों में दर्ज उन सभी के मोबाइल नंबर बंद (स्विच ऑफ) मिले हैं. खासकर ब्रजेश का साला संजय अंडरग्राउंड हो गया है. जांच में पता चला है कि रिश्तेदारों के नाम से लिए गए मोबाइल नंबर (सिम) का उपयोग ब्रजेश ठाकुर के साथ उसकी राजदार शाहिस्ता परवीन उर्फ मधु कुमारी करती थी. ब्रजेश खुद अपने साले संजय के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करता था, जबकि उसके मौसा शिवशंकर सिंह (एनजीओ में कोषाध्यक्ष) का नंबर मधु के पास रहता था.
एनजीओ में रिश्तेदारों की प्रभावी मौजूदगी की बानगी
साला : ब्रजेश ने गवर्निंग बॉडी में प्रेसिडेंट के पद पर अपने साले संजय कुमार को नियुक्त कर रखा है.
चचेरा भाई : रमेश ठाकुर को सचिव बना रखा है। हालांकि रमेश दिल्ली में नौकरी करते हैं.
मौसा : शिवशंकर सिंह कोषाध्यक्ष के अहम पद पर हैं.
पत्नी : प्रो. डॉ. आशा (शिक्षिका) को सदस्य बनाया गया है.
करीबी : किरण पोद्दार, संगीता व संगीता सुभाषिनी सदस्य हैं.
किसके पास सबसे पहले पहुंचा था मधु का वीडियो, हो रही जांच
सीबीआई की जांच टीम मधु कुमारी के वायरल वीडियो की भी जांच कर रही है. हाल ही में मधु का करीब 10 सेकेंड का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था. इसमें वह इंसाफ मांगते नजर आ रही है. जांच टीम इस बात का पता लगा रही है कि सबसे पहले यह वीडियो किसके पास आया था. मुजफ्फरपुर के रेड लाइट एरिया (चतुर्भुज स्थान) से निकाली गई शाहिस्ता परवीन उर्फ मधु साहू रोड स्थित बालिका गृह के संचालन के साथ ही ब्रजेश ठाकुर के अन्य एनजीओ को चलाने में भी अहम रोल निभाती थी.
सीपीयू से खुल सकते हैं राज
ब्रजेश की बहन अर्चना के घर से मिले कंप्यूटर के सीपीयू से भी अहम राज सामने आ सकते हैं. इसमें कांड से जुड़े जानकारी होने की संभावना है. इसको देखते हुए सीपीयू को खंगाला जा रहा है. बीते शुक्रवार को सीबीआई की छापेमारी के दौरान अर्चना के घर से सीपीयू के साथ ही अन्य सामान जब्त किए गए थे.

आसरा होम : रिमांड में खाते में हुए ट्रांजेक्शन के संबंध में हो रही पूछताछ
पटना : आसरा शेल्टर होम के सचिव चिरंतन व मनीषा दयाल को पटना पुलिस ने दो दिनों के रिमांड पर ले लिया है और पूछताछ कर रही है. राजीव नगर थानाध्यक्ष रोहन कुमार बुधवार को बेऊर जेल गये और दोनों को सुरक्षा में अपने साथ ले आये. दोनों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है. मनीषा दयाल को महिला थाने में रखा गया है और चिरंतन को गुप्त स्थान पर पुलिस के लिए लाया गया है.
 जहां दोनों से लगभग एक ही सवाल किये जा रहे है. इसके बाद गुरुवार को दोनों को आमने-सामने रख कर पूछताछ की जायेगी. इससे यह स्पष्ट हो जायेगा कि मनीषा दयाल और चिरंतन का बयान आपस में मिलता है या नहीं?
इसके बाद साक्ष्य जुटाने में आसानी होगी. पुलिस चिरंतन व मनीषा दयाल से पूर्व में हुए संवासिनों की बीमारी से मौत, उनके खाता से हुए ट्रांजेक्शन व शेल्टर होम्स में संवासिनों के रहने-सहने व खाने-पीने की व्यवस्था को लेकर सवाल पूछ रही थी. जिससे यह स्पष्ट हो सके कि दोनों संवासिनों की मौत के क्या कारण थे. पुलिस यह जानना चाहती है कि दोनों संवासिनों के इलाज में लापरवाही तो नहीं बरती गयी?
 पुलिस ने मनीषा दयाल व चिरंतन से उनके बैंक खाता से हुए ट्रांजेक्शन के संबंध में ही मूल रूप से पूछताछ की. पुलिस ने उससे खाता के संबंध में ही ज्यादा सवाल पूछे. इसके साथ ही कुछ लोगों के फोटो दिखाये और कुछ लोगों के नाम बताये और पूछा कि वह इन लोगों को कैसे जानती है.
मनीषा दयाल को कुछ अधिकारी के भी फोटो दिखाये गये, जिनसे पूर्व में अच्छे संबंध थेपुलिस के सवाल से मनीषा दयाल के पसीने छूटने लगे और गला भी सूखने लगे. इसके बाद पुलिस टीम में शामिल पदाधिकारियों से वह बार-बार पानी मांग रही थी. इसके साथ ही पुलिस द्वारा किये गये सवाल का सही जवाब भी नहीं दे पा रही थी और उन्हें घुमाने की काेशिश में लगी थी.
मनीषा दयाल व चिरंतन से कौन-कौन से हुए सवाल
आपके पास कितने खाते हैं.
शेल्टर होम्स चलाने के लिए हर माह कितने रुपये सरकार से मिलते थे.
संवासिनों के स्वास्थ्य के लिए कितना खर्च हाेता था.
संवासिनों के खाने-पीने व रहने -सहने की क्या व्यवस्था थी.
खातों में जो पैसे आये, उन्हें दूसरे खाते में क्यों ट्रांसफर्र किया गया.
जिन दूसरे के खाते में पैसे भेजे गये, वे लोग कौन हैं.
संवासिनों की तबीयत कैसे खराब हुई और उनके इलाज के लिए क्या व्यवस्था की गयी.
किस डॉक्टर ने इलाज किया था और कौन-कौन सी दवाएं चली थीं.

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