वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का निधन

वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का निधन, 1 बजे दिल्ली के लोधी घाट पर होगा अंतिम संस्कार

14 अगस्त 1924 में सियालकोट में जन्मे कुलदीप नैयर  भारत के वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं. उनकी स्कूली  शिक्षा दीक्षा सियालकोट में ही हुई. और लाहौर से उन्होंने कानून की डिग्री ली. उच्च शिक्षा के लिए वे यूएस गए, जहां उन्होंने पत्रकारिता की देग्री ली. आज़ादी मिलने के बाद और बंटवारे के समय वे भारत आ गए.  भारत सरकार के प्रेस सूचना अधिकारी के पद पर कई वर्षों तक कार्य करने के बाद वे यू॰एन॰आई॰, पी॰आई॰बी॰, ‘द स्टैट्समैन’, ‘इण्डियन एक्सप्रेस’ के साथ लम्बे समय तक जुड़े रहे. वे पच्चीस वर्षों तक ‘द टाइम्स’ लन्दन के संवाददाता भी रहे.

 शुरूआत में नायर एक उर्दू प्रेस रिपोर्टर थे. वह दिल्ली के समाचार पत्र द स्टेट्समैन के संपादक थे और उन्हें भारतीय आपातकाल (1 975-77) के अंत में गिरफ्तार किया गया था। वह एक मानवीय अधिकार कार्यकर्ता और शांति कार्यकर्ता भी हैं। वह 1996 में संयुक्त राष्ट्र के लिए भारत के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे. 1990 में उन्हें ग्रेट ब्रिटेन में उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था, अगस्त 1997 में राज्यसभा में नामांकित किया गया था. वह डेक्कन हेराल्ड (बेंगलुरु), द डेली स्टार, द संडे गार्जियन, द न्यूज, द स्टेट्समैन, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून पाकिस्तान, डॉन पाकिस्तान, प्रभासाक्षी सहित 80 से अधिक समाचार पत्रों के लिए 14 भाषाओं में कॉलम और ऐप-एड लिखते थे

‘बिटवीन द लाइन्स’, ‘डिस्टेण्ट नेवर : ए टेल ऑफ द सब काॅनण्टीनेण्ट’, ‘इण्डिया आफ्टर नेहरू’, ‘वाल एट वाघा, इण्डिया पाकिस्तान रिलेशनशिप’, ‘इण्डिया हाउस’, ‘स्कूप’ (सभी अंग्रेज़ी में)। ‘द डे लुक्स ओल्ड’ के नाम से प्रकाशित कुलदीप नैयर की आत्मकथा भी काफी चर्चित रही है. 1985 से उनके द्वारा लिखे गये सिण्डिकेट कॉलम विश्व के अस्सी से ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं.

कुलदीप नैयर पर छद्म धर्मनिपेक्ष होने के साथ साथ हिंदू विरोधी होने के का भी आरोप समय समय पर लगता रहता है। नैयर ने तो यहाँ तक कहा डाला की प्रधानमंत्री वाजपेयी को कानून बनाना चाहिए जो किसी राष्ट्रीय स्वयं सेवक को उच्च पद के लिए अयोग्य बनाये.

एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय दैनिक में अन्ना हजारे के अन्दोलन के लिए नैयर ने यह कहा कि  इस आन्दोलन को अनशन से अलग रखते तो अच्छा होता और इसका ठीकरा उन्होंने टीम अन्ना के सदस्यों पर फोड़ा. उन्होंने कहा कि ये लोग ध्यान खींचने के लिए इस नाटकीय कदम को उठाना चाहते थे.  1990 में ब्रिटेन के उच्चायुक्त नियुक्त किये गये. सन् 1996 में भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र संघ को भेजे गये प्रतिनिधि मण्डल के सदस्य भी रहे. अगस्त, 1997 में राज्यसभा के मनोनीत सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए. 23 नवम्बर, 2015 को वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक कुलदीप नैयर को पत्रकारिता में आजीवन उपलब्धि के लिए रामनाथ गोयनका स्मृ़ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया.


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