वो ब्लैक फ्राइडे जब मुंबई बम धमाकों से दहल गया, जब संजय दत्त के लिंक दाउद से जुड़े पाए गये

बालेन्दुशेखर मंगलमूर्ति. 

16 जनवरी 1993 की रात, सुनील दत्त के पाली हिल स्थित बंगले पर मुंबई पुलिस के दो सिपाही पहरा दे रहे थे. 6 दिसंबर 1992 संजय  दत्त ने दोनों सिपाहियों को थोड़ी देर के इधर उधर टहल आने के लिए कहा. सिपाहियों के पहरे से हटने के बाद तुरंत अँधेरे से तीन साए निकल कर बंगले की ओर बढ़ने लगे. उनमे से एक था चिकना, जो डी कंपनी का छोटा सा प्यादा था उस समय तक, बाद में उसने बड़ा नाम कमाया अबू सलेम के रुप में. बॉलीवुड के लोगों के बीच extortion racket चलाने में उसने काफी नाम कमाया. आगे चलकर डी कंपनी के साथ उसके रिश्ते खराब हो गए, और उसने अपना अलग वजूद बनाया.

वे तीनों  दाउद इब्राहिम के भाई अनीस इब्राहीम के आदेश पर संजय दत्त को कुछ “गिटार” और ” टेनिस बॉल्स” देने आये थे. अबू सलेम ने टेनिस बॉल्स को एक बैग में डाल दिया और उन गिटारों को एक बेडशीट में लपेट दिया, जो संजय दत्त ने उसे दिया था.

18 जनवरी 1993

16 जनवरी की रात तीन लोगों में दुसरा आदमी था समीर हिंगोरा. समीर हिंगोरा और उसके पार्टनर हनीफ कडावाला ने 1990 के दशक के शुरुआत में एक बी ग्रेड की फिल्म बनायी थी, बाप नम्बरी, बेटा दस नम्बरी, जो आश्चर्यजनक ढंग से हिट फिल्म साबित हुई थी. अब वे दोनों संजय दत्त के साथ एक फिल्म कर रहे थे. 18 की शाम संजय दत्त हनीफ कडावाला के घर गए और उन्होंने अधिकाँश सामान लौटा दिया और केवल एक गिटार रखा.

12 मार्च 1993

उस फ्राइडे की दोपहर, भारत का फाइनेंसियल कैपिटल मुंबई एक के बाद एक 12 धमाकों से दहल गया. सिर्फ ढाई घंटे में बारह शक्तिशाली धमाके. मुंबई सन्न रह गया. इस आतंकी हमले में 257 लोग मारे गए और713 लोग घायल हो गए. उच्चस्तरीय जांच शुरू हो गयी. तो धमाकों के तार दाउद इब्राहिम से जुड़े पाए गए. दाउद 1986 में दुबई भाग गया था और फिर वहां से पाकिस्तान. अंतिम जानकारी के अनुसार वो करांची के क्लिफ्टन एरिया में ISI की कड़ी सुरक्षा में रह रहा था. वहीँ से उसने मुंबई बम ब्लास्ट को मास्टर माइंड किया था, बाबरी मस्जिद ढहने के बाद हुए सांप्रदायिक दंगे में मुस्लिमों के मारे जाने के खिलाफ बदले के लिए.

 

सीरियल ब्लास्ट के बाद सैकड़ों लोगों को पूछताछ के लिए पकड़ा गया. उन लोगों में फिल्म निर्माता हनीफ- समीर भी थे. एक और आदमी था इब्राहीम मूसा चौहान उर्फ़ बाबा चौहान. फ़ोन कॉल्स का अध्ययन करने के बाद पाया गया कि ये तीनों दाउद के भाई अनीस इब्राहिम के रेगुलर टच में थे. बाबा चौहान वो तीसरे आदमी था, जो 16 जनवरी की रात संजय दत्त के पाली हिल वाले बंगले पर गए थे.

 

11 अप्रैल 1993

डिप्टी कमिशनर राकेश मारिया मुंबई बम ब्लास्ट की जांच कर रही टीम को लीड कर रहे थे. उन्होंने बाबा चौहान को interrogation के लिए बुलाया. राकेश मारिया की छवि एक कड़क पुलिस ऑफिसर की थी. बाबा चौहान जानता था कि राज उगलने के अलावा कोई उपाय नहीं है. उसने तुरंत बकना शुरू कर दिया कि अनीस इब्राहिम ने उसे और अबू सलेम को कुछ गिटार और टेनिस बॉल्स संजू बाबा के घर डिलीवर करने के लिए कहा था. मारिया के पूछने पर उसने बताया कि अंडरवर्ल्ड की भाषा में गिटार ए के ५६ को कहा जाता है और टेनिस बॉल का मतलब हैण्ड ग्रेनेड होता है.

और ये संजू बाबा कौन है? राकेश मारिया के पूछने पर उसने बताया: संजू बाबा, बॉलीवुड का स्टार संजय दत्त.

राकेश मारिया सन्न रह गये. क्या सुनील दत्त का बेटा संजय दत्त ऐसा कर सकता है?

अगले दिन प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस कमिश्नर अमरजीत सिंह समरा ने पत्रकारों को हिंट दिया कि इस ब्लास्ट में बॉलीवुड के भी कुछ लोग शामिल हो सकते हैं. शायद मीडिया को एक बड़ी स्टोरी की हिंट मिल गयी थी. अचानक एक पत्रकार ने पूछ दिया: क्या इसमें संजय दत्त भी शामिल हैं?

जांच के इस स्टेज पर समरा कुछ खुलासा नहीं करना चाहते थे. उन्होंने एक गोल मोल उत्तर दे दिया: हम अभी संजय दत्त की भूमिका की जांच कर रहे हैं. इस स्टेज पर निश्चित कुछ नहीं कह सकते.

13 अप्रैल 1993

पुलिस कमिश्नर समरा का फ़ोन रिंग हुआ. “हेलो सर”, दूसरी ओर से आवाज आई, “मै संजय दत्त बोल रहा हूँ. मैंने सुना कि प्रेस कांफ्रेंस में आपने बम ब्लास्ट में मेरा भी नाम लिया है.” दरअसल अगले दिन के सारे अखबारों में संजय दत्त का नाम और मुंबई बम ब्लास्ट में उसकी भूमिका की ओर इशारा था. उस समय संजय दत्त मॉरिशस में आतिश फिल्म की शूटिंग करने में व्यस्त थे.

समरा ने बताया कि हनीफ- समीर ने उसका नाम लिया है. और पुलिस उसकी भूमिका की जांच कर रही है. संजय दत्त ने कहा कि अगर वे चाहें तो वो शूटिंग कैंसिल करके तुरंत मुंबई वापस लौट सकते हैं. समरा  सुनील दत्त को जानते थे. उन्होंने कहा: “कोई जल्दबाजी नहीं है. अपना काम फिनिश करके अपने तय समय पर मुंबई लौटो.”

19 अप्रैल 1993

19 अप्रैल की सुबह मुंबई के सहार इंटरनेशनल एअरपोर्ट पर कुछ ज्यादा ही भीड़ थी. सैकड़ों की संख्या में मुंबई पुलिस के जवान एअरपोर्ट पर मौजूद थे. खुद राकेश मारिया और एडिशनल पुलिस कमिश्नर वाय सी पवार संजय दत्त की फ्लाइट का इन्तजार कर रहे थे. जैसे ही संजय दत्त एअरपोर्ट के इमीग्रेशन एरिया से बाहर आये, पुलिस वालों ने कालर से संजय दत्त को धर लिया और प्राइवेट दरवाजे से पूछताछ के लिए ले चले गए. उसी शाम मुख्यमंत्री शरद पवार ने प्रेस कांफ्रेंस में कन्फर्म किया कि संजय दत्त को टाडा के तहत गिरफ्तार किया गया है.

 

क्रावफोर्ड मार्किट के पुलिस हेड क्वार्टर में जॉइंट कमिश्नर पुलिस, एम एन सिंह और राकेश मारिया ने संजय दत्त से लम्बी पूछताछ की. पहले तो संजय ने आरोप से इन्कार किया, लेकिन जब समीर- हनीफ को उसके सामने ला बिठाया गया, तो संजय दत्त टूट गए और सब कुछ कबूल कर लिया. दत्त ने बताया कि यलगार फिल्म की शूटिंग दुबई में चल रही थी. इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान फ़िरोज़ खान ने अनीस इब्राहिंम से भेट करवाई थी. फिर अनीस इब्राहिम बार बार सेट पर आने लगा और इस तरह जान पहचान बन गयी. एक शाम दाउद इब्राहिम में पूरी फिल्म यूनिट को डिनर पर आमंत्रण दिया था. तब दाउद इब्राहिम से भी भेंट हुई थी.

उस समय सुनील दत्त अकेले पड़ गए थे: 

संजय दत्त ने पुलिस को बताया कि बाबरी मस्जिद के बाद दंगों में उसके परिवार को दक्षिण पंथियों के हाथों थ्रेट मिल रहे थे. वो परेशां थे. और अपने परिवार की रक्षा के लिए उन्होंने अनीस इब्राहिम से संपर्क किया और ए के 56 डिलीवर करने के लिए कहा. पुलिस ने संजय की कहानी पर यकीन नहीं किया. और जैसे कि सुनील दत्त को उम्मीद थी कि संजय को आर्म्स एक्ट के तहत बुक किया जाएगा. जिसमे बेल आसानी से मिल जायेगी और संजय घर आ पायेगा, पुलिस ने ( ऊपर से आदेश मिलने की बात कहकर; उन दिनों सुनील दत्त और शरद पवार में प्रतिद्वंदिता चल रही थी; सुनील दत्त के मित्र राजीव गांधी की ह्त्या हो चुकी थी और सोनिया ने एक्टिव पॉलिटिक्स से किनारा कर लिया था; नरसिम्हा राव ने पवार का साथ दिया था; पार्टी में सुनील अकेले पड़ गए थे, और अब एक बेहद लम्बी और हिम्मत को तोड़ कर रख देने वाली जंग पूरा दत्त परिवार लड़ने जा रहा था), संजय दत्त को टाडा के तहत बुक कर दिया.

उस समय संजय बॉलीवुड में नंबर वन अभिनेता बनकर उभरे थे. साजन की सफलता के बाद उनके जीवन में माधुरी दीक्षित का आगमन हो चुका था और वे माधुरी से शादी के सपने बुन रहे थे. पर इस काण्ड ने उनके पुरे जीवन में उथल पुथल ला दिया. माधुरी ने उनसे किनारा कर लिया. फिल्मकारों ने मुंह मोड़ लिया. कमबैक किंग और बॉलीवुड के बैड बॉय को एक बार फिर अपने संघर्ष की जंग लड़नी थी और जीतनी थी.


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