झारखंड में बिजली सब्सिडी सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित होगी

रांची.  देश में झारखंड बिजली सब्सिडी को सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खाते में हस्तांतरित करने वाला पहला राज्य बनेगा. केंद्र सरकार ने झारखंड को यह लक्ष्य दिया है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शुक्रवार को फोरम ऑफ रेगुलेटर्स की बीएनआर में हुई 64वीं बैठक का उद्घाटन करते हुए कहा कि सरकार निजी कंपनियों जुसको, टीएसएल, डीवीसी, सेल बोकारो के उपभोक्ताओं को भी सब्सिडी देने के लिए जेएसईआरसी के प्रस्ताव पर विचार कर रही है.

झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद प्रसाद ने कहा कि जुसको, टीएसएल आदि कंपनियों के पास उपभोक्ताओं का पूरा रिकॉर्ड है. इसलिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर डीबीटी की शुरुआत इन कंपनियों के उपभोक्ताओं से की जा सकती है. आगे चलकर झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के उपभोक्ताओं को भी सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी. उन्होंने कहा कि अभी इसका मैक्निजम तैयार किया जा रहा है. अगर यह तैयार हो गया तो इसे झारखंड बिजली वितरण निगम में भी लागू किया जा सकता है.

 

गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति की परिभाषा पर हुआ मंथन
आयोग के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बिजली की बातें अक्सर सुनने को आती है. मगर यह क्या हो, कैसे हो, इस पर कुछ स्पष्ट नहीं है. इसकी सही परिभाषा क्या हो, इस पर मंथन देश के सारे रेगुलेटर मंथन कर रहे हैं. प्रसाद ने कहा कि रेगुलेटर के तय मानकों के अनुसार अगर 4 घंटे से अधिक समय तक बिना कारण बिजली कट होता है तो उसका मुआवजा राशि उपभोक्ताओं को देना है. मगर यह अभी धरातल में नहीं है. इसे कैसे क्वालिटी बिजली के दायर में लाया जाए. इसपर भी विचार हो रहा है. अभी यह बैठक का दौर जारी रहेगा। अंतिम रूप से एक प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को समर्पित किया जाएगा.

 

उपभोक्ता दूसरे बिजली कंपनी से बिजली कंज्यूम करें, यह भी छूट मिलनी चाहिए
बैठक में केंद्रीय नियामक आयोग के अध्यक्ष पी के पुजारी ने कहा कि कई स्टेट में उपभोक्ताओं को इस लिए सफर करना पड़ता है कि एक ही वितरण कंपनी से बिजली लेनी मजबूरी होती है. मगर इसे अब समाप्त करना होगा. प्रतिस्पर्धा पैदा करनी होगी. तभी क्वालिटी पूर्ण बिजली मिल सकेगी. झारखंड नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने कहा कि झारखंड कई डीवीसी, जुस्को, सेल, टीसीएल, टाटा पावर जैसी कई अन्य वितरण कंपनियां है, जिससे बिजली उपभोक्ता बिजली ले रहे हैं. भविष्य में इसका दायरा पूरा झारखंड में बढ़ाना होगा। भले ही एक ही नेटवर्क हो, उसका संबंधित कंपनी अतिरिक्त राशि ले मगर दूसरे कंपनी से इसी नेटवर्क से बिजली वे ले सकते हैं.

सोलर नेट मीटरिंग को बढ़ावा देने से बढ़ेगी ग्रीन एनर्जी एफिशिएंसी
बैठक में यह तय किया गया कि ग्रीन इनर्जी को बढ़ावा देने के लिए सोलर नेट मीटरिंग सिस्टम को बढावा देना होगा। यह हो जाने से उपभोक्ता अपने-अपने घरों में, खाली जमीन में सोलर एनर्जी प्लांट लगा सकेंगे। इससे उनकी द्वारा उत्पादित बिजली उपभोग के बाद उपभोक्ता या उत्पादक अतिरिक्त बची बिजली को सेल कर सकता है.

बिजली खरीद दर पर हुआ मंथन

अभी वर्तमान में अगर कोई उत्पादक सोलर एनर्जी उत्पादन करता है तो उसे सेल आऊट करने पर महज 50 पैसे प्रति यूनिट की दर से पैसा मिलता है. अगर इसे बढ़ा दिया जाए तो और कंपनियां व उत्पादक सामने आएंगे. लोग घरों में भी सोलर नेट मीटरिंग के जरिए उसे सेल कर सकेंगे। इससे वह न केवल ग्रीन एनर्जी उपभोग कर सकेंगे बल्कि उनकी आय भी वृद्धि होगी. इसलिए केंद्र सरकार किसानों को सोलर फार्मिक की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील कर रहे हैं. पूरे देश में बंजर जमीन की कमी नहीं है. अगर किसान सोलर फार्मिंग करें तो उनकी आय दुगुनी हो सकती है.

4000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2022 तक झारखंड में 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. झारखंड दूसरे राज्यों की बिजली की जरूरत पूरा कर सकेगा. पिछले चार वर्षों में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए पतरातू थर्मल पावर और एनटीपीसी के साथ संयुक्त उपक्रम तैयार किया गया है. यहां 2022 तक 800-800 मेगावाट के पांच यूनिट स्थापित की जाएंगी. यहां उत्पादित 85 प्रतिशत बिजली झारखंड को मिलेगी. तेनुघाट का विस्तार भी किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य में अगले दो वर्षों ग्रिड सब-स्टेशनों की संख्या चार गुनी बढ़ा दी जाएगी. संथाल परगना और डालटनगंज और लातेहार को सेंट्रल झारखंड से जोड़ दिया गया है. इससे इन क्षेत्रों में बिजली संकट का दौर खत्म हो गया है. शहरों में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए अंडर ग्राउंड केबलिंग का काम प्रगति पर है. पावर सब स्टेशन की संख्या बढ़ायी जा रही है. नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है. राज्य का एटीएंडसी लॉस 40 से घटाकर 30 प्रतिशत रह गया है. इसे 15 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है. रांची स्मार्ट ग्रिड पर जल्द काम शुरू होने जा रहा है.

 

Forum of Regulators की बैठक में इन एजेंडे पर हुई चर्चा
-नेट मीटरिंग में सुधार पर विस्तार से चर्चा
-परंपरागत की जगह नवीकरणीय ऊर्जा की खपत बढ़ाने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा पर जोर
-उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली देने के लिए बनेगा क़ानून
-ओपन एसेस को बढ़ावा देने के लिए दूसरे राज्यों से सस्ती दर पर बिजली खरीदने की छूट


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