आसरा होम कुकर्म: चार महीने में 28 लाख दवाओं के नाम पर खर्च किये गए पर सवासिनें दवाओं से महरूम 

 मनीषा दयाल के साथ एक आईएस ऑफिसर का नाम खुलकर आ रहा है. महादलित मिशन में गड़बड़ी में भी इनका नाम रहा है. 
पटना : राजीव नगर के नेपाली नगर में मौजूद आसरा होम से जुड़ी जांच जारी है. पुलिस का शक सही साबित हो रहा है. एसआईटी को जांच में पता चला है कि आसरा होम को संचालित करने के लिए सचिव चिरंतन के एनजीओ को करीब 32 लाख रिलीज हुए थे. इसमें सचिव चिरंतन और ट्रेजरर मनीषा दयाल ने 27.5 लाख खर्च कर दिये हैं. ये सार पैसे चार महीने में खर्च किये गये हैं.
अब खाते में सिर्फ 4.5 लाख रुपये बचे हैं. इतने पैसे खर्च होने के बावजूद आसरा होम की जो सूरत है, वह बिल्कुल बदली नहीं है. अधिकारियों की जांच में अब तक साफ हो चुका है कि आसरा होम में रहनेवाली संवासिनों का रखरखाव ठीक ढंग से नहीं होता था. इतना ही नहीं शुरुआती पूछताछ में मनीषा दयाल और और चिरंतन ने फंड की सही जानकारी पुलिस को नहीं दी थी.
 पहले बताया गया कि 18 लाख रिलीज हुए थे, फिर बताया गया कि 27-28 लाख रिलीज हुए. लेकिन, जब पुलिस ने बैंक जाकर पड़ताल की, तो पता चला कि 32 लाख रिलीज हुए हैं. पुलिस ने इस संबंध में दोबारा रिमांड पर लेकर मनीषा दयाल और चिरंतन से पूछताछ कर चुकी है. इस दौरान पैसे कहां-कहां खर्च हुए इसका हिसाब मांगा गया था. लेकिन, दोनाें चुप्पी साध गये., सही जानकारी पुलिस को नहीं दे सके.
एसडीओ ने अभी नहीं सौंपी है जांच रिपोर्ट
आसार हाेम मामले की अभी जांच रिपोर्ट एसडीओ और डीपीओ की तरफ से डीएम को नहीं सौंपी गयी है. इस संबंध में एसडीओ ने बताया कि जांच पूरी हो गयी है लेकिन डीपीओ प्रशिक्षण के लिए बहार चली गयी हैं, आने पर जांच रिपोर्ट सौंप दिया जायेगा. उन्होंने मौखिक रूप से बताया कि जांच में चिकित्सीय लापरवाही ही सामने आयी है. यहां बता दें कि आसरा होम में एक युवती समेत दो की मौत हो जाने के बाद डीएम ने एसडीओ व डीपीओ को जांच करने का निर्देश दिया था. लेकिन, अभी जांच रिपोर्ट डीएम के पास समिट नहीं हुआ है.
बजट का पैसा उड़ाया, वक्त पर नहीं मिला इलाज
पटना : एसआईटी ने आसरा होम के अंदर का हाल जानने के लिए वहां रहनेवाली महिलाओं  से पूछताछ की. आईओ के सामने करीब एक दर्जन महिलाओं का बयान हुआ था. इसके बाद कोर्ट में भी उनका बयान कराया गया. बयान में यह बात सामने आयी थी कि वहां पर मानसिक रूप से विक्षिप्त महिलाओं को सही समय पर दवा-इलाज नहीं होता था. समय से खाने-पीने पर भी ध्यान नहीं दिया जाता था.
कई मानसिक रोगी लड़कियों का वजन कम था. खून की कमी थी. बुखार व डायरिया था, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिला. मनीषा दयाल और चिरंतन ने मिल कर फंड के पैसे को उड़ा डाला और कागज में सारा खर्च का ब्योरा तैयार कर डाला. लेकिन, जमीनी हकीकत देखने के बाद अधिकारी भी अपनी रिपोर्ट में कह चुके हैं वहां व्यवस्था ठीक नहीं थी. इस पूरी तस्वीर को देखने के बाद यह साफ है कि पैसों का बंदरबांट किया गया. अब पुलिस इस घोटाले की जांच कर रही है.
मनीषा और चिरंतन के एडमिशन के खेल की हो रही है पड़ताल
यह बात सामने आयी चुकी है कि मनीषा दयाल और चिरंतन मेडिकल और इंजीनियरिंग में एडमिशन के नाम पर भी खेल करते थे. कृष्णा अपार्टमेंट में ई-11 में मौजूद उनके आफिस से कुछ दस्तावेज, रजिस्टर और तस्वीरें मिली चुकी हैं जिनमें एडमिशन का खेल सामने आया था. आफिस के बाहर कई बोर्ड और फ्लैक्‍स भी लगे थे.
मनीषा दयाल और चिरंतन कुमार की जोड़ी यहां से एमबीबीएस, बीबीए, बीडीएस, बीटेक और एमबीए में एडमिशन की कंफर्म बुकिंग का भी सौदा करते थे. यहां से मेडिकल-इंजीनियरिंग कालेजों की सीटों को भी बेचा जाता था. एसआईटी इस बिंदु पर भी जांच कर रही है. एडमिशन के मामले में कोई सबूत सामने आये तो दोनों की मुश्किलें बढ़ेंगी. इस संबंध में कुछ और लोगों से पूछताछ हो सकती है. फिलहाल इस बिंदु पर पुलिस ने जांच तेज कर दिया है.
मनीषा दयाल का मुंगेर से भी है पुराना कनेक्शन
मुंगेर :  पटना शेल्टर होम की संचालिका मनीषा दयाल के तार मुंगेर से भी जुड़े हैं. मुंगेर के पूर्व प्रमंडलीय आयुक्त एसएम राजू के समय में उसका कई बार मुंगेर आना हुआ और उसने अपने भाई मनीष दयाल व परिजनों के नाम पर ग्रीन लीफ इनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से मनरेगा योजना के तहत मुंगेर में पौधे की सप्लाई की थी.
यूं तो मुंगेर प्रमंडल के कई जिलों में मनरेगा के तहत इस कंपनी ने करोड़ों का खेल किया. जिसमें तत्कालीन आयुक्त ने मनरेगा के तहत पौधारोपण का अभियान चलाया था. इस कंपनी के पास न तो कोई नर्सरी थी और न ही कार्य का कोई अनुभव. वैसे मुंगेर प्रमंडल के लखीसराय जिले में इस मामले को लेकर एक प्राथमिकी भी दर्ज हुई है.
बताया जाता है कि तत्कालीन आयुक्त के संपर्क में आने के बाद उन्होंने प्रमंडल के सभी छह जिलों में मनरेगा योजना के तहत पौधारोपण की स्वीकृति प्रदान की थी और पौधारोपण के लिए पौधे आपूर्ति करने का कार्य मनीषा दयाल के भाई मनीष दयाल को दिया गया था. जानकार बताते हैं कि उस समय मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड में भी लगभग नौ करोड़ के पौधारोपण का कार्य कागजी तौर पर किया गया.
50 महिलाओं को रखने की थी व्यवस्था, रखी गयी थीं 75
आसरा होम में महिलाओं के रखे जाने की व्यवस्था पर भी सवाल है. एनजीओ को जब जिम्मेदारी दी गयी थी, तो 50 महिलाओं का रखे जाने की बात हुई थी. इस बात का करार हुआ था कि जब महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, तो बजट भी बढ़ा दिया जायेगा. इसके बाद यहां महिलाओं की संख्या 50 से बढ़ कर 75 हो गयी, बजट भी बढ़ा दिया गया. लेकिन, आसरा होम की माैजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ. मतलब जहां 50 लोगों को रखा जाना था, उतने में ही अमानवीय तौर पर 75 महिलाओं को रखा गया. पुलिस अपनी केस डायरी में इन सब बातों का जिक्र कर रही है.

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