जानें, कैसे नक्सली ग्रुप से अपराध जगत का सरगना बना काले चश्मे का शौकीन संतोष झा

सीतामढ़ी : बिहार के दरभंगा जिले के डबल मर्डर केस के मुख्य आरोपी संतोष झा की कल सीतामढ़ी कोर्ट परिसर में गोली मारकर हत्या कर दी गयी उसे कल पेशी के लिए लाया गया था. संतोष झा जैसे ही कोर्ट पहुंचा अपराधियों ने उसपर फायरिंग शुरू कर दी, जिससे संतोष झा बुरी तरह घायल हो गया और अस्पताल में उसकी मौत हो गयी. इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी हुई है और अन्य की तलाश जारी है.

कौन था संतोष झा

संजय झा दरभंगा के चर्चित इंजीनियर मुकेश कुमार व ब्रजेश कुमार की हत्या का आरोपी था और कोर्ट ने उसे हत्या के इस मामले में दोषी करार दिया था. संतोष झा पर हत्या, अपहरण, लूट और रंगदारी के कुल 32 मामले दर्ज थे. ज्यादातर मामलों में उसे जमानत मिल चुकी थी. संतोष झा रंगदारी वसूलने में माहिर था और जेल से ही रंगदारी के लिए व्यवसायियों को फोन करता था और रंगदारी नहीं मिलने पर उनकी हत्या तक करवा देता था.

2004 में पहली बार संतोष झा को पुलिस ने हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था. करीब तीन साल जेल में रहने के बाद जब वह रिहा हुआ तब उसके बाद उसने कई हत्याकांड को अंजाम दिया। करीब छह महीने तक बिहार पुलिस की स्पेशल टीम की कोशिश के बाद फरवरी 2014 में कोलकाता के एक फ्लैट से पकड़ा गया था. कोलकाता में जिस वक्त इसकी गिरफ्तारी हुई उस वक्त वह डॉक्टर बनकर एक फ्लैट में रह रहा था. संतोष झा के गिरोह के पास एके-47 राइफल मौजूद था जिनसे गिरोह के सदस्यों के द्वारा बड़ी वारदात को अंजाम दिया जाता था. संतोष झा के बारे में कहा जाता है कि उसने नक्सली कमांडर को धोखे से मरवाकर खुद उसके गिरोह का कमांडर बन गया.

शिवहर जिले के पुरनहिया थाना अंतर्गत दोसितयां गांव निवासी संतोष झा के पिता चंद्रशेखर झा गांव के ही जमींदार नवल किशोर राय के ड्राइवर थे, जिनके साथ जमींदार ने मारपीट की थी, पिता के साथ हुई इसी मारपीट से संतोष झा नाराज था और जमींदार से बदला लेने के लिए वह नक्सलियों के गुट में शामिल हुआ था और वहां से वह अपराध की दुनिया का सरगना बन बैठा. संतोष झा काले चश्मे और कपड़ों का शौकीन था.


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