मछलियों का होगा बीमा, जहर से मरने या चोरी होने पर मिलेगा मुआवजा

एक एकड़ में मछली नुकसान होने पर एक लाख रुपए तक की क्षतिपूर्ति मछलीपालकों को मिलेगी.

पटना.   सूखा और बाढ़ से तालाब की मछली की क्षति होने पर किसानों को मुआवजा मिल जाएगा. चाहे बीमारी से मछली मरी हो या किसी प्राकृतिक आपदा बज्रपात आदि से मछली नष्ट हुई हो मछलीपालक को नुकसान की भरपाई हो जाएगी. जहर डाल कर मार दी या चोरी चली गई तब भी मुआवजा मिलेगा. मछलीपालकों को ऐसे नुकसान से बचाने के लिए अब राज्य में मछली का बीमा होगा. 2018-19 से नए प्रावधानों के आधार पर मछलियों को बीमा होगा. मछलियों के बीमा कराने के लिए मत्स्य निदेशालय ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है. जल्द ही कैबिनेट से सहमति के बाद यह योजना लागू कर दी जाएगी.

एक एकड़ तालाब में मछली का बीमा कराने के लिए प्रीमियम लगभग चार हजार रुपए लगेंगे. इसमें किसानों को 50 प्रतिशत प्रीमियम राशि यानी 2000 रुपए प्रति एकड़ की दर से भुगतान करना पड़ सकता है. शेष प्रीमियम राशि राज्य सरकार भुगतान करेगी. हालांकि प्रीमियम राशि में आगे बदलाव किया जा सकता है. एक एकड़ में मछली नुकसान होने पर एक लाख रुपए तक की क्षतिपूर्ति मछलीपालकों को मिलेगी.

 

योजना के प्रारूप पर सहमति मिलने के बाद बीमा एजेंसियों से निविदा लिया जाएगा. सबसे कम प्रीमियम राशि लेकर अधिक मुआवजा देने वाली बीमा कंपनी से करार किया जाएगा. मत्स्य निदेशालय की ओर से मछलीपालकों को मछली बीमा का लाभ बताने के लिए अभियान भी चलाया जाएगा. बिहार में जलक्षेत्र काफी है. खास कर उत्तर बिहार में मछली उत्पादन की अधिक संभावना है. इसके बावजूद राज्य में अब भी जरूरत का डेढ़ लाख टन मछली आंध्रप्रदेश व पश्चिम बंगाल से मंगाना होता है. इससे राज्य को सालाना दो से ढ़ाई हजार करोड़ का नुकसान हो रहा है.

 

बिहार में मछली का बीमा क्यों है जरूरी
उत्तर बिहार में बाढ़ और दक्षिण बिहार में सुखाड़ की हालत रहती है. ऐसे में तालाब सूखने से मछली मरने या बाढ़ के पानी में मछली बह जाने का खतरा बना रहता है. ऐसे में बीमा होने से मछलीपाकों को लाभ मिलेगा. गांवों में व्यक्तिगत दुश्मनी में तालाब में जहर डाल कर मछली मार देने की घटना भी होती है. फिर मछली चोरी भी होती रहती है. इन खतरों के कारण ही उपयुक्त कंडीशन के बावजूद मछलीपालन से किसान कतराते हैं. मछली का बीमा होगा तो अधिक मछलीपालन होगा और राज्य मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों को भी आपूर्ति करने में सक्षम होगा.


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