एच-1बी वीजा प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है:ट्रम्प जानिये क्या है एच-1बी वीजा

वॉशिंगटन.   डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन  ने कहा है कि एच-1बी वीजा प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है.  अगले हफ्ते भारत और अमेरिका के बीच टू प्लस टू बातचीत होने वाली है. माना जा रहा है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अमेरिका के साथ वार्ता में इस मुद्दे को उठाएंगी.

सुषमा स्वराज ने पिछले हफ्ते राज्यसभा में कहा था, “हम कई मंचों पर औपचारिक रूप से एच-1बी वीजा का मुद्दा उठा रहे हैं. व्हाइट हाउस, अमेरिकी विदेश विभाग और वहां के सांसदों से भी हमारी बात चल रही है. 6 सितंबर को होने वाली अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत में भी ये मसला उठाया जाएगा.” वहीं, एक ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के एक अफसर ने कहा कि टू प्लस टू डायलॉग में भारत द्वारा एच-1बी मसला उठाए जाने को लेकर अमेरिका ने भी तैयारी की है. हालांकि अफसर ने वीजा नीति को लेकर कोई खुलासा नहीं किया.

किसी का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा : 

अफसर ने बताया कि एच-1बी वीजा को लेकर दिए ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर का बोर्ड रिव्यू कराया जा रहा है. यह तय किया जा रहा है कि इसके तहत किसी भी कर्मचारी या वेतन को लेकर नुकसान न हो. लेकिन इतना तय है कि अमेरिकी सरकार वीजा प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं करने जा रही.

अधिकतम छह साल का मिलता है वीजा :

एच-1बी वीजा सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रोफेशनल्स के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय है. एच -1बी वीजा कार्यक्रम अमेरिकी व्यवसायों में विदेशी कर्मचारियों को रोजगार हेतु अमेरिका में आकर विशेषज्ञता वाले व्यवसायों में प्रायोजित करने हेतु सक्षमता प्रदान करता है. इन व्यवसायों में सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, विज्ञान, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, और कानून/विधि आदि शामिल हैं, जिनमें तकनीकी या सैद्धांतिक निपुणता की आवश्यकता होती है.

एच-1बी वीजा वस्तुतः गैर-अप्रवासी वीजा है. गैर-अप्रवासी वीजा धारक ही एक निश्चित समय के लिए अमेरिका में अस्थायी तौर पर निवास कर सकते हैं. एच-1बी वीजा 3-3 वर्ष की अवधि के लिए अधिकतम 6 वर्ष तक की अवधि के लिए दिए जाते हैं. कुछ विशेष मामलों में, अधिकतम 6 वर्ष की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है.

एच-1बी वीजा दोहरी प्रकृति वाले भी होते हैं, जिसका अर्थ है कि एच-1बी वीजा पर कर्मचारी अस्थायी तौर पर अमेरिका में प्रवेश पाते हुए अन्य वीजा श्रेणी के तहत स्थायी निवास के लिए आवेदन कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, यदा-कदा ईबी-5 वीजा के आवेदनकर्ता ईबी-5 आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ करने के पूर्व अमेरिका की नागरिकता एच-1बी के माध्यम से पहले ही प्राप्त कर लेते हैं.

अमेरिकी सरकार प्रति वर्ष जारी किए जाने वाले एच-1बी वीजा का अधिकतम कोटा निर्धारित करती है. एच-1बी वीजा पहले आओ पहले पाओ के आधार पर प्रदान किए जाते हैं. इसलिए, अधिकतम वार्षिक कोटा पूर्ण होने पर ऐसे आवेदन जो संयुक्त राज्य नागरिकत्व एवं अप्रवासन सेवा के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं, लेकिन उन्हें स्वीकृति नही मिलती; ऐसे आवेदकों के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि वे वैकल्पिक वीजा श्रेणी के लिए आवेदन करें या फिर आगामी वर्ष में एच-1बी वीजा आवेदन करने की प्रतीक्षा करें.

एच-1बी वीजा दरअसल नियोक्ता प्रायोजित वीजा होते है जिसका अर्थ यह है कि संयुक्त राज्य आधारित नियोक्ता को सिद्ध करना होता है कि आवेदक एच-1बी की सभी अनिवार्यताओं को पूर्ण करता है. इन नियोक्ताओं के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि वें सिद्ध करें की उनका नवीन एच-1बी रोजगार अमेरिका के कर्मचारियों के रोजगार को प्रभावित नही करेगा. विशेषकर, नियोक्ता को प्रमाणित करना होता है कि एच-1बी रोजगार अमेरिका के उसी क्षेत्रमें कार्यरत कर्मचारियों के रोजगार को विस्थापितनहीं करेगा.एच-1बी कर्मी को अन्य नियोक्ता के कार्यस्थल पर नियुक्त नहीं किया जाएगाऔर एच-1बी कर्मी को नियुक्त करने के पहले अमेरिका के  कर्मचारी को वरीयता दी जाएगी. यदि कोई एच-1बी कर्मी किसी दूसरी अमेरिकी कंपनी मे स्थानांतरण चाहे तो नये नियोक्ता को नवीन एच-1बी प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है.

हालांकि, एच -1 बी सुवाह्यता कर्मचारी को यह सक्षमता देती है कि वेअपने नए पदों पर कार्य नवीन एच-1बी की प्रस्तुति के तुरंत बाद कर सकते हैं और उन्हेंसंयुक्त राज्य नागरिकत्व एवं अप्रवासन सेवाके पूर्ण निर्णय होने तक प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नही होती.

चूंकि एच-1बी वीजा आवेदन नियोक्ता प्रायोजित होते हैं और और वे कर्मचारियों के लिए नियोक्ता द्वारा ही भरे जाते है, इसलिए इन आवेदनों को प्रायःअप्रवासन वकील की सहायता से भरा जाता है. नियोक्ता अनिवार्य रूप से ईटीए- 9035 प्रपत्र कोएच-1बी आवेदन के हिस्से के रूप में श्रम विभाग के समक्ष प्रस्तुत करता है. इस श्रम शर्त आवेदन के एक हिस्से के रूप में अप्रवासन कार्य को प्रायोजितकर्ता नियोक्ता इस तथ्य को भी प्रमाणित करता है कि वह कर्मचारी को वर्तमान मे दिया जाने वाला न्यनतम वेतन अथवा उससे अधिक वेतन देगा. अर्थातअमेरिकी कर्मचारी को दिये जा रहे वेतन के समकक्ष वेतन देंगे.

उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने पिछले वर्ष एच-1बी वीजा जारी करने की अपनी नीति में परिवर्तन किया था. नए अमेरिकी आव्रजन नियमों के अनुसार ऐसी कंपनियां, जिनके कर्मचारियों की संख्या 50 या अधिक है, इनमें से 30 प्रतिशत से अधिक और 50 प्रतिशत से कम कर्मचारी एल-1 या एच-1बी वीजा के तहत अमेरिका में काम कर रहे हैं और जिन्होंने ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन नहीं कर रखा है, के लिए नियोक्ता कंपनी को प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी के लिए 5 हजार डॉलर का शुल्क चुकाना होगा. यदि किसी कंपनी के पास 50 या उससे अधिक विदेशी कर्मचारी  हैं और इनमें से 50 प्रतिशत से अधिक एच-1बी वीजा या एल-1 वन वीजा धारक हैं तो ऐसे में उस कंपनी को प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी के लिए 10 हजार डॉलर का शुल्क चुकाना होगा.

इन नए आव्रजन नियमों में अमेरिका में काम कर रही विदेशी कंपनियों पर 75 प्रतिशत से अधिक एच-1बी वीजा या एल-1 वीजा धारक कर्मचारियों को रखने पर प्रतिबंध लगाए जाने की भी व्यवस्था है. अमेरिकी नियोक्ताओं को एच-1बी वीजा धारक कर्मचारियों को काम पर रखने के 30 दिन पहले अमेरिका केश्रम विभाग की वेबसाइट पर विज्ञापन देना अनिवार्य कर दिया गया है. जुलाई 2017 में अमेरिकी अधिकारियों ने एक रिपोर्ट जारी की थी. इसमें बताया गया था कि अन्य देशों के मुकाबले एच-1बी वीजा के लिए सबसे ज्यादा भारतीय आवेदन करते हैं. अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के आंकड़ों के अनुसार, 2007 से 2017 तक भारतीयों ने एच-1बी वीजा के लिए 22 लाख आवेदन किए थे. इसके बाद चीन का नंबर आता है। वहां से तीन लाख आवेदन किए गए.


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