इसरो का काम प्राइवेट सेक्टर को देने से वैज्ञानिकों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई

इसरो ने कुछ अर्सा पहले ही निजी क्षेत्र की कंपनियों को 27 सैटलाइट्स बनाने का काम सौंपा है. अब वह स्पेस कार्यक्रमों की रीढ़ रहे पोलर सैटलाइट लॉन्च वीइकल (पीएसएलवी) और स्मॉल सैटलाइट लॉन्च वीइकल (एसएसएलवी ) का निर्माण भी प्राइवेट सेक्टर से कराना चाहता है. इससे इसरो के साइंटिस्ट्स की नाराजगी और बढ़ गई है. उनका मानना है कि सरकार संस्था के कामकाज में दखलंदाजी कर रही है.
सुरक्षा भी खतरे में 
उनका कहना है कि निजी क्षेत्र अभी स्पेस टेक्नॉलजी के मामले में परिपक्व नहीं है. उसे सैटलाइट्स और पीएसएलवी बनाने की जिम्मेदारी दी गई, तो इसरो की वर्षों से बनी साख पर बट्टा लग जाएगा. इसके साथ ही गोपनीय स्पेस कार्यक्रमों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ेगी. कैग ने भी अभी हाल में इसरो के कामकाज में आ रही ढिलाई और लापरवाही पर इसकी खिंचाई की है.

नाराजगी जताने पर छिना पद 

बताते हैं कि प्राइवेट सेक्टर को 27 सैटलाइट्स बनाने का काम सौंपने पर इसरो की सैटलाइट बनाने वाली अहमदाबाद स्थित इकाई, स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के डायरेक्टर डॉ. तपन मिश्रा नाराज थे. वह जीसैट-11 के लॉन्च में देरी से भी नाखुश बताए जाते थे. उन्होंने अपनी नाराजगी का इजहार किया, तो उनको पद से हटाकर इसरो का सलाहकार बना दिया गया. इसरो के मौजूदा डायरेक्टर के. सिवन के बाद उनके चेयरमैन बनने की संभावना थी.तपन को पद से हटाए जाने पर देश के कई शीर्ष वैज्ञानिकों ने सख्त ऐतराज जताया था. इसरो के साथ देश के कई शीर्ष संस्थानों के वैज्ञानिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर इस मामले में दखल देने की अपील की थी. यह विवाद थमा भी नहीं था कि इसरो चेयरमैन ने हाल में ही पीएसएलवी और एसएसएलवी बनाने का काम भी निजी क्षेत्र से कराने का इरादा जताया है.

इसरो का तर्क है कि संस्था हर साल 12 से 20 सैटलाइट लॉन्च करना चाहती है. इसके लिए उसके पास जरूरी संसाधन नहीं हैं. इस वजह से इसरो निजी क्षेत्र को जिम्मेदारी देना चाहता है। वैज्ञानिकों की चिंता भी स्पष्ट है कि इसरो ने हाल में ही निजी क्षेत्र से एक सैटलाइट बनवाया था, जो लॉन्च के तुरंत बाद खराब हो गया. निजी क्षेत्र अभी स्पेस टेक्नॉलजी के मामले में परिपक्व नहीं है.


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