जन वितरण प्रणाली से भ्रष्टाचार दूर करने के लिए बिहार सरकार करेगी हाईटेक मॉनीटरिंग

पटना : राशन दुकानों के जरिये खाद्यान्न वितरण की प्रक्रिया को हाईटेक करने की तैयारी चल रही है. मकसद है कि इसकी कालाबाजारी पर लगाम लगे. हाल के दिनों में जिलों में राशन दुकानों के निरीक्षण के दौरान उपभोक्ताओं ने अनाज कम मिलने, कीमत अधिक लिये जाने, समय पर अनाज नहीं मिलने आदि की शिकायतें की थीं. इन शिकायतों को लेकर गया व मधुबनी में 30 दुकानदारों पर कार्रवाई की गयी. इसी को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है.
इसके जरिये जिला आपूर्ति शृंखला प्रबंधन केंद्र में एफसीआई व एसएफसी गोदाम से खाद्यान्न के उठाव से लेकर राशन दुकानों तक पहुंचने व फिर उपभोक्ताओं के वितरण तक पूरा लेखा-जोखा रहेगा. इससे राशन दुकानदार उपभोक्ताओं को यह कह कर नहीं टाल सकेंगे कि अभी खाद्यान्न का उठाव नहीं हुआ है. किस दुकान को कितना राशन मिला और कितने उपभोक्ताओं के बीच खाद्यान्न वितरण हुआ इसका हिसाब एक क्लिक में मिल जायेगा.
 व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए बनाये गये हैं आपूर्ति शृंखला प्रबंधन केंद्र
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सभी जिलों में आपूर्ति शृंखला प्रबंधन केंद्र बनाये गये हैं. इसका लिंक एफसीआई, एसएफसी व राशन दुकानों से जुड़ा रहेगा. जिससे उठाव से लेकर वितरण तक की पूरी जानकारी मिल सकेगी. खाद्यान्न का उठाव व वितरण के लिए जिला स्तर पर वरीय पदाधिकारियों के निरंतर समन्वय स्थापित करने में प्रबंधन केंद्र कारगर होगा.
उपभोक्ताओं ने की थी शिकायत
गया, मधुबनी, सीतामढ़ी, मोतिहारी, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, बक्सर, आरा, रोहतास, कैमूर, नवादा, समस्तीपुर में निरीक्षण के दौरान उपभोक्ताओं ने राशन दुकानों से राशन मिलने में देरी, अच्छे राशन नहीं मिलने, अनाज कम मिलने सहित कई शिकायतें की थीं. ऐसे राशन दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गयी है. गया व मधुबनी में लगभग 30 दुकानदारों से स्पष्टीकरण मांगा गया है.
 
प्रबंधन केंद्र के लिए बनेंगे भवन
मॉनीटरिंग के लिए प्रबंधन केंद्र पूरी तरह से हाइटेक होगा. इसके लिए सभी जिले में अपना भवन बनेगा. भवन बनाने के लिए 43़ 72 करोड़ खर्च होंगे. एक जिले में लगभग एक करोड़ 15 लाख रुपये खर्च किये जायेंगे. शेखपुरा में भवन बनाने के लिए हसनगंज मौजा में दस डिसमिल भूमि चिह्नित  की गयी है.
प्रबंधन केंद्र से की जायेगी निगरानी
खाद्य व उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी ने कहा कि खाद्यान्न के उठाव से लेकर वितरण तक की मॉनीटरिंग प्रबंधन केंद्र से होगी. इससे खाद्यान्न के उठाव व वितरण को लेकर पारदर्शिता रहेगी. प्रबंधन केंद्र के लिए सभी जिले में नये भवन बनेंगे. इस पर 43.72 करोड़ खर्च होंगे.
 
 

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