# राफेल डील: तीन गुने दाम देकर प्लेन खरीदना कैसी देशभक्ति? अब सुप्रीम कोर्ट जायेगी कांग्रेस

आरोप- यूपीए सरकार 560 करोड़ में खरीद रही थी एक राफेल विमान, केंद्र सरकार अब उसेे 1600 करोड़ में खरीदने को तैयार

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने राफेल डील और नोटबंदी को लेकर रविवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा. सिब्बल ने कहा, “कांग्रेस को कुछ जरूरी दस्तावेज मिलने का इंतजार है, जिसके बाद पार्टी राफेल डील को लेकर सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी.” सिब्बल ने नोटबंदी को हिंदुस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बताया.

सिब्बल ने इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताना चाहिए कि औपचारिकता के बगैर और मनमाने तरीके से की गई राफेल डील के पीछे किसकी सोच है? और किसे फायदा पहुंचाने के लिए यह सब किया गया? तीन गुना अधिक दामों में राफेल विमान खरीदकर मोदी किस तरह का देशहित का काम कर रहें हैं?”

 

मोदी के मंत्रियों को कुछ भी मालूम नहीं :  सिब्बल ने कहा, “कांग्रेस सरकार ने फ्रांस से मिराज और रूस से सुखोई खरीदने पर जनता को इनकी कीमतें बताईं थीं. देश राफेल विमान के दाम जानना चाहता है, लेकिन न तो प्रधानमंत्री कुछ बताते हैं और न किसी को बताने देते हैं. सरकार के मंत्रियों को भी इस बारे में कुछ मालूम नहीं. मोदी का न खाऊंगा, न खाने दूंगा के बदले नया नारा है- न बताऊंगा, न बताने दूंगा. केंद्र की इतनी नाकामियों से जनता जान गई है कि भाषण और शासन में बहुत अंतर होता है. सरकार झूठ बोल रही है कि उसने हथियारों से लैस विमान खरीदने के लिए अलग से भुगतान किया. लेकिन सौदे के अनुबंध में यह बात साफ है कि विमान में अन्य फीचर 2007 की डील के मुताबिक ही होंगे.”

41 हजार करोड़ रुपए ज्यादा में हुई डील : उन्होंने बताया, “2012 में कांग्रेस सरकार ने फ्रांस से जो डील की थी उसमें तय हुआ कि 126 राफेल खरीदेंगे. उनमें से 108 राफेल हिंदुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड ( एचएएल) बनाएगा. 18 विमान सीधे खरीदे जाएंगे. इसमें एक की कीमत 560 करोड़ रुपए तय की गई थी. लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी ने 36 राफेल सीधे तौर पर खरीदने का फैसला किया. ऐसे में 560 करोड़ के हिसाब से 36 राफेल के दाम लगभग 18 हजार करोड़ रुपए होते हैं. लेकिन, नई डील 60 हजार करोड़ रुपए की है. पहले और अब की डील में 41 हजार करोड़ का अंतर है.

रक्षा मंत्रालय को विश्वास में क्यों नहीं लिया : सिब्बल ने कहा, “25 मार्च 2015 को फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट ने वीडियो रिलीज कर राफेल सौदे के बारे में बताया. 27 मार्च 2015 को डसॉल्ट के सीईओ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आएंगे तो राफेल डील हो जाएगी. 8 अप्रैल 2015 को विदेश सचिव जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री की जो डील होगी, उसमें राफेल की बात नहीं होगी. 10 अप्रैल 2015 को मोदी फ्रांस जाकर बोलते हैं कि 36 राफेल ऑफ द सेल खरीदेंगे. इन सबसे स्पष्ट होता है कि किसी को भी इस डील के बारे में पता नहीं था.”


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