डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट बनी हुई है

इस साल रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 11 फीसदी गिर चुका है और सभी एशियाई मुद्राओं में इसका प्रदर्शन सबसे खराब रहा है. आरबीआई के पास 425 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था जो अब घटकर 400 अरब डॉलर रह गया है.

डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट बनी हुई है और बुधवार को रुपया 72 के निचले स्तर के करीब पहुंच गया. शेयर बाजार में लगातार छह दिन से आ रही गिरावट से भी रुपये में नरमी को बल मिला. रुपया मंगलवार के 71.60 के स्तर से 0.27 फीसद नीचे 71.78 पर बंद हुआ. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने थोड़ा हस्तक्षेप जरूर किया लेकिन रुपये को बहुत सहारा नहीं मिला.

इस साल रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 11 फीसदी गिर चुका है और सभी एशियाई मुद्राओं में इसका प्रदर्शन सबसे खराब रहा है. चालू खाते का घाटा बढऩे और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भी रुपये में नरमी बनी हुई है. आरबीआई ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि चालू खाते के घाटे की भरपाई विदेशी निवेश से होगा. हालांकि शेयर बाजार में गिरावट को देखते लग रहा है कि विदेशी निवेशक बिकवाली के मूड में हैं.  विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 3.8 अरब रुपये की बिकवाली की, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1.77 अरब रुपये मूल्य के शेयर खरीदे.  अप्रैल-जून तिमाही में करीब 3 अरब डॉलर की बिकवाली के बाद अगस्त में विदेशी निवेश में थोड़ा सुधार हुआ था. लेकिन एक बार फिर बिकवाली कर रहे हैं.

सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट के मुख्य निवेश अधिकारी सुनील शर्मा ने कहा, ‘कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये में नरमी पर नजर रखने की जरूरत है. इसके साथ ही उभरते बाजारों में बिकवाली और दरों में वृद्घि की चिंता बनी हुई है.’ बिकवाली के दौरान रुपये में सुधार तब तक नहीं हो सकता जब तक कि केंद्रीय बैंक डॉलर की आपूर्ति नहीं बढ़ाता है.

आरबीआई अभी विनिमय बाजार में ज्यादा हस्तक्षेप करने को इच्छुक नहीं दिख रहा है. अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं में भी गिरावट का रुख बना हुआ है.

इलारा सिक्योरिटीज के संस्थागत इक्विटी रिसर्च प्रमुख रवि मुत्तुकृष्णन ने कहा, ‘अमेरिका के संरक्षणवादी रुख, कच्चे तेल में तेजी, आर्थिक वृद्घि के परिदृश्य में नरमी और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव से वैश्विक वृहद हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं.’ आरबीआई ने रुपये की गिरावट थामने के लिए मई में 11.5 अरब डॉलर की बिकवाली की थी लेकिन जून में उसे घटाकर 7 अरब डॉलर कर दिया.

जुलाई और अगस्त के आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं. आरबीआई के पास 425 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था जो अब घटकर 400 अरब डॉलर रह गया है. हालांकि आरबीआई अभी करीब 20 से 30 अरब डॉलर और सहजता से बेच सकता है. मुद्रा डीलरों का कहना है कि रुपये के 72 से 72.50 तक पहुंचने से पहले ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि आयातकों ने इस स्तर के आसपास हेजिंग किया है.

लेकिन इससे ज्यादा गिरावट होने पर बाजार में घबराहट बढ़ सकती है. सेंसेक्स में पिछले छह दिन में 878 अंक की गिरावट आई है. इस दौरान रुपये में 2.3 फीसदी की नरमी आई है जबकि 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल 13 आधार अंक चढ़ा है.


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