डीजल और पेट्रोल पर करों की उच्च दर जारी रहेगी

पेट्रोल और डीजल के दाम अब तक के सर्वोच्च स्तर पर हैं लेकिन वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने राजनीतिक नेतृत्व को साफ कर दिया है कि अगर उत्पाद शुल्क में कटौती की जाती है तो यह गलत होगा. अधिकारियों ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और कुछ गैर कर राजस्व से कर वसूली में कमी को लेकर चिंता जताई है. वहीं सरकार का मानना है कि राजकोषीय घाटे का लक्ष्य अहम है और वह ईंधन के बढ़े दाम को लेकर राजनीतिक हमलों का सामना करने को तैयार है.  वरिष्ठ सरकारी अधिकारियोंं ने  बताया कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस मसले पर अधिकारियों की राय ली है. एक अधिकारी ने कहा, ‘मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि अगर प्रति लीटर एक रुपये की कटौती होती है तो केंद्र को 14,000 करोड़ रुपये राजस्व गंवाना होगा.’ अधिकारी ने कहा, ‘जीएसटी में हमने कम से कम 1 लाख करोड़ रुपये प्रति महीने राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा था, जबकि 93,000 से 95,000 करोड़ रुपये ही आ रहे हैं. राज्यों को मुआवजा भी देना है.’
एक और अधिकारी ने कहा कि अगर कीमतों में कोई कटौती की जाती है तो केंद्र से ज्यादा राज्योंं पर बोझ बढ़ेगा. अधिकारी ने कहा, ‘अगर केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क में कुछ रुपये की कटौती करती है तो कीमतों में कोई भी गिरावट अस्थायी होगी, अगर कच्चे तेल के दाम नहीं कम होते और रुपये के दाम एक संतोषजनक स्तर पर स्थिर नहीं होते..’  सरकार में उच्च स्तर पर सोच पहले ही जैसी है कि चुनावी साल में कोई अनावश्यक लोक लुभावन कदम नहीं उठाने हैं और राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद के 3.3 प्रतिशत पर बनाए रखना है. इसके साथ ही राजनीतिक रणनीति तैयार की जानी है.
दूसरे अधिकारी ने कहा, ‘सरकार ने मध्य व वेतनभोगी वर्ग को तमाम वस्तुओं पर जीएसटी दरें घटाकर राहत दी है. अगर उत्पाद शुल्क में कटौती कर कोई और छूट देने पर विचार नहीं किया जा सकता है.’  उपरोक्त उल्लिखित पहले अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार की कंपनियों व बैंकों के लाभांश व विनिवेश को लेकर भी चिंता है. इस साल के लिए सकल घरेलू उत्पाद के  3.3 प्रतिशत राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पहले से ही चुनौतीपू्रर्ण लग रहा है और अगर ऐसे में उत्पाद शुल्क में एक रुपये लीटर भी कटौती की जाती है तो राजकोषीय दबाव बढ़ेगा.
चालू वित्त वर्ष में जीएसटी संग्रह भी कम हुआ है क्योंकि जुलाई में 100 से ज्यादा वस्तुओं पर कर घटा दिया गया है. पिछले सप्ताह जारी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में राजस्व 939.6 अरब रुपये रहा, जो इसके पहले महीने के 964.8 अरब रुपये कर संग्रह की तुलना में भी कम रहा. सितंबर में कर संग्रह और घटने की संभावना है, जब दरों में कटौती का पूरा असर दिखेगा. केंद्र सरकार को उम्मीद थी कि सरकारी कंपनियों व बैंकों से 1.07 लाख करोड़ रुपये लाभांश मिलेगा. रिजर्व बैंक ने जुलाई 2017 से जून 2018 वित्त वर्ष में 500 अरब रुपये लाभांश भुगतान किया है. इतना ही बैंकों से मिलने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि डूबे धन के दबाव के कारण बैंकों का मुनाफा गिर गया है.

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