चीन में धार्मिक अल्पसंख्यकों की दयनीय हालत; ह्युमन राइट्स वाच ने चीन पर प्रतिबन्ध की मांग की

बीजिंग : ह्यूमन राइट्स वॉच ने सोमवार को कहा कि चीन के शिनजियांग क्षेत्र में अल्पसंख्यकों के साथ जिस तरह का सलूक वहां की सरकार कर रही है, उसे देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को देश पर प्रतिबंध लगाना चाहिए. इस क्षेत्र से करीब 10 लाख लोगों को हिरासत में लिया गया है. चीन ने शिनजियांग क्षेत्र में रह रहे मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर आतंकवाद का मुकाबला और अलगाववाद से निपटने के नाम कठोर पाबंदियां लगाई हैं. हाल के सालों में इन्हें और कड़ा किया गया है. नस्ली भेदभाव पर संयुक्त राष्ट्र की एक समिति ने पिछले महीने अनुमान जताया था कि करीब 10 लाख जातीय उइगर और अन्य तुर्किक मुस्लिम अल्पसंख्यकों को कट्टरपंथ रोधी केंद्रों में रखा गया है. क्षेत्र में चीन की दमनकारी कार्रवाई से संबंधित एक रिपोर्ट में ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने कहा कि सरकार की कार्रवाई की प्रतिक्रिया में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शिनजियांग में ‘उत्पीड़न से संबंधित’ चीनी अधिकारियों पर ‘लक्षित पाबंदियां’ लगाने चाहिए. चीनी सरकार ने शिनजियांग में रिपोर्टिंग पर रोक लगा दी है जिससे वहां की स्पष्ट स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है.

चीन में मुस्लिम अल्पसंख्यक: 

शिनचियांग में लगभग एक करोड़ उइगुर लोग रहते हैं जो तुर्क मूल के हैं. सुन्नी इस्लाम को मानने वाले इन लोगों पर पहले भी कई तरह की धार्मिक पाबंदियां लगाए जाने की खबरें आती रही हैं.  एक अजीब पाबन्दी  के अनुसार, विदेशों में रहने वाले उइगुर कार्यकर्ता बताते हैं कि  कुल मिलाकर 29 नाम रखने पर पाबन्दी लगाई गयी है, जिनमें मोहम्मद, जिहाद और इस्लाम जैसे नाम शामिल हैं. जिन नामों को चीनी अधिकारियों ने बैन किया है, उनमें कई पदों और जगहों के नाम हैं तो कई राजनीतिक शख्सियतों के. मसलन इमाम, हज, तुर्कनाज, अहजर और वहाब के साथ साथ इस लिस्ट में सद्दाम, अराफात, मदीना और काइरो जैसे नाम भी शामिल हैं.

उइगर मुख्यत: चीन के शिनजियांग प्रांत में बसे मुस्लिम जातीय अल्पसंख्यक हैं. उनकी आबादी के 45 प्रतिशत लोग वहां रहते हैं. एमनेस्टी और मानवाधिकार वाच समेत मानवधिकार संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र समिति में एक रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें शिविरों में सामूहिक बंदी बनाने का दावा किया गया है, जहां जबरन बंदियों को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वफादारी की कसम दिलवाई जाती है.

विश्व उइगर कांग्रेस ने अपनी रपट में कहा है कि बंदियों को बिना आरोप के बंदी बनाकर रखा जाता है और जबरन कम्युनिस्ट पार्टी के नारे लगाने के लिए कहा जाता है. रिपोर्ट के अनुसार, अधिकतर बंदियों पर अपराध का कोई भी आरोप नहीं है और उन्हें कोई भी कानूनी प्रतिनिधि मुहैया नहीं कराया जाता.

संयुक्त राष्ट्र की एक मानवाधिकार समिति ने कहा है कि कई विश्वसनीय रिपोर्टों से पता चला है किचीन ने ‘चरमपंथी-रोधी केंद्रों’ में उइगर समुदाय के 10 लाख लोगों को बंदी बना कर रखा है. बीजिंग ने ‘उइगर स्वायत क्षेत्र को कुछ इस तरह बदल दिया है कि यह एक विशाल नजरबंदी शिविर में तब्दील हो गया है. चीन ने अभी तक इन रिपोर्टों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. बीजिंग इससे पहले इस तरह के शिविरों से इनकार करता रहा है.


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