कच्चे तेल के वैश्विक दामों में तेजी उपभोक्ताओं के जेब पर भारी पड़ने लगी है

कच्चे तेल के वैश्विक दाम में तेजी की वजह से घरेलू बाजार में डीजल व पेट्रोल के दाम बढऩे के बाद परिवहन, खाद्य, मेडिकल उपकरण और आयातित सामान अब जेब पर भारी पडऩे वाले हैं. केयर रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है, ‘पेट्रोल और डीजल के दाम थोक मूल्य सूचकांक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर क्रमश: 5 प्रतिशत और 3 प्रतिशत असर डालते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘उत्पादों और सेवाओं की कीमतों पर अप्रत्यक्ष असर मोटे तौर पर प्रत्यक्ष असर का 50 प्रतिशत होता है. इसमें ट्रांसपोर्ट सेवाएं और वस्तुएं जैसे पेट्रोकेमिकल्स, पेंट्स, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक उत्पाद शामिल हैं.’

पिछले एक साल में ब्रेंट क्रूड के दाम में 41 प्रतिशत तेजी आई है और यह पिछले शुक्रवार को 76.7 डॉलर प्रति बैरल रहा. भारत में डीजल और पेट्रोल के दाम में कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी के मुताबिक ही तेजी आई है. डीजल के दाम में एक साल पहले की तुलना में करीब 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है, वहीं पेट्रोल का भाव 15 प्रतिशत बढ़कर 80 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गया है. तेल विपणन कंपनियां बढ़े हुए दाम का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं और सरकार शुल्क में छूट नहीं दे रही है, जिसकी वजह के कीमतें ज्यादा बनी हुई है.
परिवहन क्षेत्र में ईंधन मुख्य इनपुट लागत है, जिसकी वजह से परिचालन लागत बढ़ी है. इस क्षेत्र में अभी अनिश्चितता है कि बढ़ी लागत के बोझ की भरपाई किराया बढ़ाकर होगी या ढुलाई बढऩे से. आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने कहा, ‘डीजल के दाम में लगातार हो रही बढ़ोतरी कमर तोड़ देने वाली है.’ यह ट्रक वालों की प्रमुख यूनियन है. इंडियन फाउंडेशन आफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग के समन्वयक एसपी सिंह ने कहा कि ईंधन के बढ़े दाम की भरपाई के लिए किराया बढ़ सकता है. उन्होंने कहा, ‘अगस्त में डीजल के दाम में 2.2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई लेकिन ट्रक रूट पर किराया भी 4 से 5 प्रतिशत बढ़ गया. ट्रक वालों को फलों, सब्जियों और खाद्य वस्तुओं की ढुलाई में 15-20 प्रतिशत बढ़ोतरी से भी मदद मिली है.’
केयर के सबनविस ने कहा कि अगर ट्रक के किराये में बढ़ोतरी जारी रहती है तो खाद्य वस्तुओं के दाम पर भी इसका असर पड़ सकता है.  कुछ जानकारों का मानना है कि डीजल के दाम में तेजी का तत्काल फलों व सब्जियों के दाम पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इससे किसानों का मुनाफा खत्म होगा. दिल्ली और आसपास के  इलाके इसका उदाहरण हो सकते हैं.  उत्तरी दिल्ली में स्थित आजादपुर मंडी के पूर्व चेयरमैन राजेंद्र शर्मा ने कहा, ‘हमारे लिए यहां मंडी में (थोक बाजार) कीमतें मांग और आपूर्ति के हिसाब से तय होती हैं. अगर आपूॢत कम होती है तो कीमतें चढ़ेंगी और उस समय जितनी भी आपूर्ति होती है हम उसे खरीद लेते हैं.’ उन्होंने कहा कि किसान के लिए प्रति ट्रक प्याज लाने की लागत 10,000 रुपये थी, जो अब बढ़कर 12,000 से 15,000 रुपये हो गई है. शर्मा ने कहा, ‘नुकसान किसानोंं को हो रहा है और उनकी आमदनी घट रही है. डीजल के दाम में बढ़ोतरी की वजह से पंप सेट चलाने का खर्च भी बढ़ गया है.’  आजादपुर के प्रमुख फल कारोबारी राजकुमार भाटिया ने कहा कि ज्यादातर मंडियों में यही देखने को मिल रहा है कि किसानों पर बोझ बढ़ रहा है क्योंकि दाम बढऩे पर उसकी बिक्री नहीं होती और ऐसे में उन्हें नुकसान उठाकर बेचना पड़ रहा है.

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