राजद की बैठक में तेज प्रताप ने हिस्सा नहीं लिया, घर पर थे, पर बैठक से दूरी बनाए

शिवानन्द तिवारी कहते हैं कि परिवार में कोई मतभेद नहीं है, लेकिन एक बात सही है कि तेजस्वी यादव को लालू प्रसाद के समर्थकों ने अपना नेता मान लिया है.

पटनाः क्या आने वाले दिनों में राजद में सत्ता संघर्ष देखने को मिलेगा? क्या तेजस्वी का नेतृत्व तेज प्रताप सहज स्वीकार करेंगे? क्या बीमार लालू इसे रोकने में समर्थ होंगे? और क्या मिसा भारती अपने पति के साथ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को केंद्र की राजनीति तक सीमित रखेंगी? क्या तेजस्वी की अन्य बहनें और उनके पति आने वाले दिनों में खुद के लिए बड़े राजनीतिक रोल तलाश रहे हैं? लालू यादव और राबड़ी देवी की राजनीतिक विरासत की लड़ाई निकट भविष्य में तेज होगी? क्या इसमें तेजप्रताप की पत्नी ऐश्वर्या के घर वाले बड़ी भूमिका निभायेंगे, खासकर ये जानते हुए कि उन्होंने बिहार को एक मुख्यमंत्री दिया है?

ये तमाम प्रश्न हैं, जिनसे राजद इन दिनों दो चार हो रहा है. इसके संकेत मिलने शुरू हो गए हैं. कल यानि 11 सितम्बर को पूर्व सीएम राबड़ी आवास पर हुई बैठक के दौरान राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप ने बैठक से दूरी बनाए रखी. आरजेडी सूत्रों का कहना है कि जब बैठक चल रही थी, तो तेज प्रताप घर पर ही मौजूद थे, लेकिन बैठक में नहीं आये. चर्चाएं तेज हुईं, तो आरजेडी नेताओं ने सफाई देनी शुरू की, लेकिन सत्तापक्ष इस पर सवाल खड़े कर रहा है और कह रहा है कि ये तो होना ही था.

ऐसा पहले नहीं हुआ था, जब आरजेडी की कोई बड़ी बैठक हुई हो तो उसमें तेज प्रताप मौजूद नहीं रहे हों, लेकिन इस बार हुआ. पार्टी पदाधिकारियों की विस्तारित बैठक हो रही थी, जिसमें विधायक, सांसद, जिलाध्यक्ष सब शामिल थे, लेकिन तेज प्रताप नहीं. हालांकि तेज प्रताप की ओर से बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर कोई सफाई नहीं आयी है, लेकिन राजनीतिक हल्कों में चर्चा तेज है, क्योंकि तेज प्रताप चुप हैं. अमूमन तेज प्रताप की ओर से हर मुद्दे पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी जाती है, लेकिन बंद को लेकर किसी तरह का बयान तेज प्रताप की ओर से नहीं और न ही उन्होंने पार्टी की बैठक को लेकर कोई ट्वीट किया है. हां, मोदी सरकार को बढ़ती मंहगाई को लेकर सवालों के घेरे में जरूर खड़ा किया है.

आरजेडी की बैठक में भाग लेने और एससी/एसटी के मुद्दे पर अपनी राय रखनेवाले आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी कहते हैं कि तेज और तेजस्वी यादव के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है. दोनों भाई एक हैं. वो लालू प्रसाद के परिवार से अपने सालों पुराने संबंध की दुहाई देते हैं. कहते हैं कि परिवार में कोई मतभेद नहीं है, लेकिन एक बात सही है कि तेजस्वी यादव को लालू प्रसाद के समर्थकों ने अपना नेता मान लिया है. उनको पता है कि आनेवाले दिनों में तेजस्वी यादव ही पार्टी का नेतृत्व करेंगे. तेज प्रताप ने खुद तेजस्वी को अर्जुन करार दिया था. वहीं,आरजेडी विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन का कहना है कि दोनों भाइयों की जोड़ी राम-लक्ष्मण जैसी है. किसी तरह की दरार पड़नेवाली नहीं है. उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव पार्टी की बैठक में थे, तो तेज प्रताप आरजेडी के छात्र नेताओं को पैदल मार्च के लिए सिताबदियारा को रवाना कर रहे थे.


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.