पवन हंस को बेचने का फैसला किया केंद्र सरकार ने; बोली की अंतिम तारीख 19 सितम्बर तक बढ़ी

नयी दिल्ली: सरकार ने हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाता कंपनी पवन हंस में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी की प्रस्तावित बिक्री के लिए शुरुआती बोली सौंपने की समयसीमा 19 सितंबर तक बढ़ा दी है. पुरानी समयसीमा बुधवार को समाप्त हो गयी.

नागर विमानन मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित एक अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘पवनहंस के रणनीतिक विनिवेश के लिए रुचि-पत्र पेश करने की अंतिम तिथि को 19 सितंबर 2018 तक के लिए बढ़ाया जाता है.’’

उसने कहा कि अन्य संबंधित गतिविधियों के लिए समयसीमा भी इसी तरह से बढ़ा दी गयी है.

सरकार ने अगस्त में कहा था कि पवनहंस में उसकी 51 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए बोली लगाने वालों को कंपनी में ओएनजीसी की शेष 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का भी विकल्प होगा.

पवन हंस हैलिकॉप्टर्स लिमिटेड भारत की एक हैलिकॉप्टर सेवा है. ये कंपनी ओएनजीसी को ऑफशोर स्थलों पर सेवाएं देने के अलावा ये कई राज्य सरकारों को, विशेषकर पूर्वोत्तर भारत में सेवाएं प्रदान करता है। इसके अलावा ये सार्वजनिक संस्थान जम्मू एवं काश्मीर राज्य में तीर्थस्थान वैष्णो देवी के लिये कटरा से ऊपर तक की सेवा भी देता है.

 

कंपनी 1985 में अस्तित्व में आई। इस समय इसमें भारत सरकार की 51% तथा तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग की 49% शेयरधारिता है. इसकी स्थापना सागर में तेल की खोज; तटीय तेल क्षेत्र में हेलीकाप्टर सहायता सेवाएं उपलब्ध कराने, पहाड़ी तथा दुर्गम क्षेत्रों में परिचालन कराने तथा यातायात और पर्यटन को बढावा देने हेतु चार्टर उड़ाने उपलब्ध कराने के मूल उद्देश्य से की गई थी.


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