बढ़ती मांग और कम आपूर्ति के चलते आने वाले महीनों में तेल के दामों पर और दबाब बढ़ेगा

तेल की वैश्विक खपत अगले तीन महीने में 10 करोड़ बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) के स्तर पर पहुंच जाएगी जिससे तेल के दामों पर और अधिक दबाव बनेगा. हालांकि उभरते बाजार संकट और व्यापार विवाद से इस मांग में कमी आएगी. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने गुरुवार को यह जानकारी दी. पेरिस  स्थित इस एजेंसी ने तेल की वैश्विक मांग में इस साल मजबूत इजाफे के अपने पूर्वानुमान को बरकरार रखा है. एजेंसी ने इस साल 14 लाख बैरल प्रतिदिन और 2019 में और 15 लाख बैरल प्रतिदिन इजाफे के अपने पूर्वानुमान में कोई बदलाव नहीं किया है.

ऊर्जा संबंधी नीतियों पर पश्चिमी सरकारों को सुझाव देने वाली इस एजेंसी ने अपनी मासिक रिपोर्ट में कहा कि चीजें सख्त हो रही हैं. अप्रैल के बाद से ब्रेंट के 70-80 डॉलर प्रति बैरल के मूल्य दायरे को परखा जा सकता है. आईईए ने कहा कि नवंबर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों ने पहले ही आपूर्ति को कम करके वापिस दो सालों के निम्र स्तर पर पहुंचा दिया है जबकि वेनेजुएला के उत्पादन में गिरावट और अन्य स्थानों पर अनियोजित कटौती से भी मांग और आपूर्ति केबीच के संतुलन पर दबाव बनेगा. साथ ही एजेंसी ने यह भी कहा कि बढ़ती मांग को रोका जा सकता है.
एजेंसी ने कहा कि जैसे ही हम 2019 में प्रवेश करते हैं तो कुछ प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के संबंध में हमारा पूर्वानुमान गलत साबित होने का खतरा पैदा हो जाता है. यह आंशिक तौर पर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करेंसी के मूल्यह्रास की वजह से है. इससे आयातित ऊर्जा की लागत बढ़ जाती है.  अमेरिका और चीन ने मई के बाद से ही एक-दूसरे की वस्तुओं पर कई शुल्क लगाए हुए हैं जिन्होंने शेयर बाजार को भी हतोत्साहित किया है जबकि मजबूत होते डॉलर ने उभरते हुए मुद्रा बाजार पर दबाव बना दिया है. इससे विश्व के सबसे बड़े तेल आयातकों में से कुछ का ऊर्जा बिल बढ़ गया है.
आईईए ने कहा कि चीन और भारत के नेतृत्व में ओईसीडी समूह में शामिल न होने वाले औद्योगिक देशों की मांग इस साल 11 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़कर 5.16 करोड़ बैरल प्रतिदिन होने की संभावना है जो अगले साल 12 लाख बैरल प्रतिदिन तक बढ़कर 5.28 करोड़ बैरल प्रतिदिन हो जाएगी. एजेंसी ने कहा कि अगले साल की पहली तिमाही में वैश्विक मांग 9.93 करोड़ बैरल प्रतिदिन के स्तर पर जाने से पहले इस साल की अंतिम तिमाही में 10.03 करोड़ बैरल प्रतिदिन के शीर्ष स्तर पर पहुंच जाएगी.  आईईए ने कहा कि 2019 में पेट्रोलियम निर्यात करने वाले देशों के संगठन की कच्चे तेल की मांग घटकर 3.19 करोड़ बैरल प्रतिदिन हो जाएगी जो अनुमानित रूप से 3.23 करोड़ बैरल प्रतिदिन थी.

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