अब अदृश्य इलेक्ट्रॉनिक दीवार से होगी सीमा सुरक्षा. जानिए कैसे ये दीवार काम करेगी?

जम्मू: बॉर्डर की निगरानी के लिए दो ‘स्मार्ट फेंसिंग’ पायलट प्रॉजेक्ट्स का केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को उद्घाटन किया. इन प्रॉजेक्ट्स को कम्प्रेहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (सीआईबीएमएस) कार्यक्रम के तहत शुरू किया गया है. स्मार्ट फेंसिंग को जम्मू में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 5.5 किलोमीटर क्षेत्र में लगाया गया है.

जम्मू में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर ‘स्मार्ट फेंसिंग’ प्रॉजेक्ट्स का उद्घाटन करने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, ‘मैं समझता हूं कि कम्प्रेहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम शुरू करने के बाद हमारी सीमाएं और अधिक सुरक्षित होंगी. हम जल्द ही इस तकनीक को 2026 किलोमीटर की सीमा पर लागू करेंगे जिसे असुरक्षित माना जाता है. इससे फिजिकल पेट्रोलिंग पर हमारी निर्भरता भी घटेगी.

क्या है स्मार्ट फेंसिंग?

जम्मू में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 5.5 किलोमीटर क्षेत्र में लगाया गया यह फेंसिंग अपनी तरह की पहला हाईटेक निगरानी प्रणाली है, जो जमीन, पानी, हवा और भूमिगत स्तर पर एक अदृश्य इलेक्ट्रॉनिक दीवार का काम करेगी. इस प्रणाली से सीमा सुरक्षाबल (बीएसएफ) के जवानों को मुश्किल क्षेत्रों में घुसपैठ रोकने में मदद मिलेगी. सीआईबीएमएस के तहत अत्याधुनिक सर्विलांस टेक्नॉलजी, थर्मल इमेजर्स, इन्फ्रारेड और लेजर आधारित घुसैपठ अलार्म हैं, जो एक अदृश्य जमीनी चारदीवारी का निर्माण करेंगे.

इस प्रणाली में हवाई निगरानी के लिए एयरोस्टेट, सुरंगों के जरिए घुसपैठ का पता लगाने में मदद के लिए ग्राउंड सेंसर, पानी के रास्ते के लिए सेंसर युक्त सोनार सिस्टम, जमीन पर ऑप्टिकल फाइबर सेंसर है. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि यह कार्यक्रम सीमा प्रबंधन प्रणाली को और ज्यादा मजबूत बनाएगा, जो मानव संसाधन के साथ आधुनिक टेक्नॉलजी को जोड़ता है. अधिकारी ने कहा, ‘इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम पर आधारित यह आभासी बाड़ भारत में अपनी तरह की पहली परियोजना होगी.’

सीमा सुरक्षा बल ने स्मार्ट फेंसिंग का स्वागत किया:

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने कहा कि व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (सीआईबीएमएस) से जम्मू कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर खुले दर्रो को पाटने में मदद मिलेगी जिससे सीमापार से आतंकियों की घुसपैठ रुक सकेगी. बीएसएफ के अतिरिक्त महानिदेशक ए के शर्मा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि नयी तकनीक में किसी भी तरह की गतिविधि को भांपने की क्षमता है, चाहे वो जमीन पर हो, पानी पर हो या जमीन के नीचे. इससे सीमा सुरक्षा के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी.


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