बैंको के एकीकरण से कम से कम 1000 शाखाओं का एकीकरण होगा; बचेंगे 10 अरब रूपये

सार्वजनिक क्षेत्र के तीन बैंकों – बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक के प्रस्तावित विलय से बैंक शाखाओं की संख्या कम होने से सालाना करीब 10 अरब रुपये की बचत होने की उम्मीद है. सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा और देना बैंक की शाखाएं आसपास के इलाकों में ही हैं और इससे कम से कम 1,000 जगहों पर शाखाओं का एकीकरण हो सकता है, जिससे 10 से 12 अरब रुपये की बचत होगी.

सरकार के अधिकारी और देना बैंक के अधिकारियों ने कहा कि शाखाओं की संख्या कम होने के साथ ही कर्मचारियों की संख्या भी घटेगी. लेकिन विलय के कारण किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी. कुछ कर्मचारियों का अन्य शाखाओं में तबादला किया जा सकता है या नए इलाके में शाखाएं खोलकर उन्हें काम पर लगाया जा सकता है.

सरकार ने सोमवार को तीन सरकारी बैंकों के विलय की घोषणा की, जो पूरी तरह शेयर सौदा होगा. बैंक के बोर्ड की बैठक अगले 10 दिन में होगी जिसमें इस प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है. सौदा लगभग निश्चित है क्योंकि इनमें सरकार की बहुलांश हिस्सेदारी है.

 

विलय की घोषणा का बैंकों के शेयरों पर भी असर पड़ा. बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर 17.03 फीसदी गिरकर 113.45 रुपये पर बंद हुआ. विजया बैंक का शेयर 5.69 फीसदी गिरकर 56.40 रुपये पर बंद हुआ. हालांकि देना बैंक का शेयर 19.75 फीसदी चढ़कर 19.10 रुपये पर बंद हुआ. बीएसई में शेयर भाव में गिरावट से बैंक ऑफ बड़ौदा का बाजार मूल्यांकन 5,726.62 करोड़ रुपये घटकर 30,013.38 करोड़ रुपये रह गया. विजया बैंक के बाजार मूल्यांकन 442.61 फीसदी घटकर 7,355.39 करोड़ रुपये रह गया.

रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा कि तीन बैंकों के विलय से व्यापकता और प्रशासन में लाभ होगा लेकिन सरकार की ओर से इसे इक्विटी मदद की जरूरत होगी. बैंक ऑफ बड़ौदा और विजया बैंक का बही-खाता देना बैंक की तुलना में बेहतर है.


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