#2019लोकसभा चुनाव: जदयू का महादलितों के बीच चुनावी अभियान चलाने का एलान

आगामी लोक सभा चुनाव के मद्देनज़र दलित और महादलित वोटरों पर अपनी पकड़ सुदृढ़ करने के लिए जदयू ने दलित महादलित सम्मलेन का आयोजन करने का एलान किया है. पहली अक्टूबर से जदयू हर जिला में दलित-महादलित सम्मेलन का आयोजन करेगा. मंगलवार को कार्यक्रम का कैलेंडर जारी करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह ने बताया कि सम्मेलन के लिए छह टीम गठित की गई है.

सितम्बर से ही सम्मेलन की तैयारी के लिए पार्टी के जिला प्रभारियों का दौरा आरंभ हो जाएगा. एक टीम का वह खुद नेतृत्व करेंगे.

आरसीपी सिंह ने बताया कि हर टीम में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ताओं को भी शामिल किया गया है. सिंह ने बताया कि दशहरा बाद 25 अक्टूबर से प्रमंडल स्तर पर दलित-महादलित सम्मेलन आयोजित होगा जो 3 नवंबर को संपन्न होगा.

उनके मुताबिक, 25 अक्टूबर को सारण, 26 अक्टूबर को तिरहुत, 27 अक्टूबर को दरभंगा, 28 अक्टूबर को सहरसा, 29 अक्टूबर को पूर्णिया, 30 अक्टूबर को भागलपुर, 31 अक्टूबर को मुंगेर, पहली नंवबर को मगध एवं 3 नवंबर को पटना प्रमंडल में यह सम्मेलन आयोजित होगा.

छह टीमें गठित:

1. आरसीपी सिंह, विद्यानंद विकल, मनीष कुमार, रवि कुमार ज्योति, ललन भुईयां, पवन रजक, मनोज तांती, डा. नवीन आर्या, डा. सुहेली मेहता एवं प्रगति मेहता

2. श्याम रजक, अरुण मांझी, अजय पासवान, डा. हुलेश मांझी, राजेंद्र नट, रूबेल रविदास, रवींद्र तांती, सुरेंद्र रजवार, चंदन कुमार सिंह, राजीव रंजन प्रसाद, डा. अजय आलोक एवं डा. उपेंद्र प्रसाद

3. संतोष निराला, शिवाधार पासवान, सविता नटराज, चंद्रशेखर पासवान, सुनील रजक, गजेंद्र मांझी, कुशेश्वर दास तांती, अरुण कुमार सिंह, अंजुम आरा एवं श्वेता विश्वास

4. रमेश ऋषिदेव, रामलषण राम रमन, वीणा भारती, अचमित ऋषिदेव, मुन्ना चौधरी, हरेंद्र तांती, रामगुलाम राम, कामाख्या नारायण सिंह, निखिल मंडल एवं भारती मेहता

5. महेश्वर हजारी, रत्नेश सदा, मंजू देवी, रामेश्वर रजक, कमल करोड़ी, वर्मा कुमार, राजेश्वर चौपाल, परमहंस कुमार एवं अरविंद निषाद

6. अशोक चौधरी, रवींद्र प्रसाद सिंह, शशिभूषण हजारी, रामचंद्र सदा, हिमराज राम, तूफानी राम, गरीब दास तांती एवं नीरज कुमार

हाल के वर्षों में जदयू ने जहाँ महादलितों के लिए उल्लेखनीय कार्य किये हैं, वही दलितों का बड़ा तबका अभी रामविलास पासवान, मांझी, राजद और भाजपा के बीच बंटा हुआ है. जदयू के साथ ये तबका कम संख्या में खड़ा है. जदयू का पारंपरिक वोट बैंक अति पिछड़ी जातियां और महादलित रहे हैं. टीम के सामने चुनौती ये है कि महादलितों को एक तरह संगठित रखा जाए, वही साथ में दलितों के सामने भी उम्मीद की एक मशाल जलाई जाए. आने वाला वक़्त बताएगा कि पार्टी इस चुनौती पर कितनी खरी उतरती है.

टीम के गठन को देखने से पता चलता है कि महादलितों के बीच पहुँचने के लिए भी पर्याप्त लोग नहीं हैं. कई गैर महादलित वर्ग के लोग टीम में हैं. ऐसे में महादलितों के प्रति उनकी कितनी सहानुभूति है, वे SC/ST एक्ट पर, आरक्षण जैसे जटिल मुद्दों पर क्या राय रखते हैं, ये बहुत मायने रखता है, अन्यथा वे महादलितों के बीच पूरी इमानदारी के साथ सन्देश पहुंचाने में उतने सफल नहीं हो पायें.

हालाँकि पार्टी की हालिया बैठक में जिस तरह से विजेंदर यादव और आर सी पी सिंह ने नरेन्द्र सिंह के गरीब सवर्णों के लिए आरक्षण की मांग पर अपना विरोध दर्ज किया, वह महादलितों के लिए अच्छा संकेत माना जा सकता है.

 


[jetpack_subscription_form title="Subscribe to Marginalised.in" subscribe_text=" Enter your email address to subscribe and receive notifications of Latest news updates by email."]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.