वो काली रात जब भीड़ ने ग्राहम स्टेंस को बच्चों के साथ मनोहरपुर के जंगलों में जिन्दा जला दिया था

बालेन्दुशेखर मंगलमूर्ति.

22 जनवरी 1999 की रात इस देश के सुदूर पूर्व क्योंझर जिले के मनोहरपुर गाँव में एक ऐसी लोमहर्षक घटना हुई, जिसे भारतीय आज भी नहीं भूल पाए हैं.

ऑस्ट्रलियाई पादरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो नाबालिग बेटों को उडीसा में क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में 22 जनवरी 1999 की रात उनके वाहन के अंदर जिंदा जला दिया गया था.

22 जनवरी 1999 की वो दिल दहला देने वाली रात: 

 

22 जनवरी 1999 को उड़ीसा के क्योंझर जिले का मनोहरपुर गांव में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी और पादरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेंस अपने दो बेटों के साथ अपनी जीप में ही आराम कर रहे थे. वे  ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से 165 किलोमीटर दूर मनोहरपुर में सालाना जंगल शिविर में भाग लेने के लिए गए हुए थे लेकिन उन्हें नहीं मालूम था कि आदिवासियों के भलाई के लिए उनके काम से नाखुश भीड़ मौत की शक्ल में उनकी तरफ बढ़ी चली आ रही थी. उस रात जब तीनो अपनी जीप में सो रहे थे, तो लगभग डेढ़  सौ लोगों की भीड़ ने उनकी जीप को घेर लिया. भीड़ का इरादा एकदम साफ़ था. वे ग्रैहम स्टेंस और उनके दोनों बच्चों की ह्त्या के इरादे से ही आये थे. भीड़ का नेतृत्व कर रहा था बजरंग दल का स्थानीय नेता था रविंदर पाल सिंह उर्फ़  दारा सिंह. उसने भीड़ के साथ मिलकर पहले तो ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटों को बुरी तरह पीटा और इसके बाद उनकी जीप जला दी. ग्राहम स्टेंस ने अपने दोनों बच्चों को बगल में समेट कर जलती जीप से दूर जाने का भरसक प्रयत्न किया, पर भीड़ ने उन्हें न केवल ऐसा करने से रोका, बल्कि उसने बड़ी ही बेरहमी से तीनों को जिंदा जलती कार में झोंक दिया था.

 

22 जनवरी 1999 की इस अमानवीय घटना से पूरा देश दहल उठा. स्टेन्स उड़ीसा के जनजातीय इलाक़ों में कुष्टरोगियों के कल्याण के कार्यों में सक्रिय रहे थे. इस घटना पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी. जहाँ हिंदुत्व वादी ताकतें आरोप लगा रही थीं कि कुष्ठ रोगियों के कल्याण की आड़ में ग्रैहम स्टेंस जबरन धर्म परिवर्तन के काम में लगे हुए थे. उनकी पत्नी ग्लैडिस स्टेन्स भी कुष्ठ रोगियों की सेवा में पिछले बीस सालों से अपने पति के साथ लगी हुई थीं.

केस की छानबीन सीबीआई ने की:

इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने की. इस मामले में निचली अदालत ने दारा सिंह और उसके साथी महेंद्र को दोषी बताते हुए मौत की सजा सुनाई थी लेकिन उड़ीसा हाई कोर्ट ने 19 मई 2005 को उसे उम्र कैद में बदल दिया था. इस फैसले के खिलाफ दारा सिंह और सीबीआई दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

दारा सिंह ने अपनी अपील में कहा कि उसके घटना स्थल पर मौजूद होने के संदेह के आधार पर उसकी सज़ा बहाल रखी गई है. दारा का कहना है कि हत्या कांड स्थल पर जमा भीड़ के उसका नाम लेकर नारे लगाने के कारण उसकी वहाँ उपस्थिति का संदेह बना. मामले में उच्च न्यायालय ने दारा के अलावा एक अन्य अभियुक्त महेंद्र हेम्ब्रम की उम्र क़ैद की सज़ा बहाल रखी, जबकि 11 अन्य को बरी कर दिया.

इस केस में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया. सीबीआई ने इस केस को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस की श्रेणी में रखते हुए दारा सिंह के लिए सजा-ए-मौत की मांग की. सीबीआई के वकील और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विवेक तंखा ने कहा कि दारा सिंह मौत की सजा का हकदार है क्योंकि उसने पैशाचिक और कायरतापूर्ण कार्रवाई में तीन मासूमों की जान ले ली. लेकिन अदालत उनकी दलील से संतुष्ट नहीं हुई. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील खारिज कर दी.

सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की आजीवन कारावास की सजा बहाल रखते हुए दो टिप्पणियाँ की थीं, जिसे बाद में वापस ले लिया:

सर्वोच्च न्यायालय ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बच्चों की हत्या करने के लिए दोषी ठहराए गए दारा सिंह की उड़ीसा हाई कोर्ट की आजीवन कारावास की सज़ा बरकरार करते हुए अपने 76 पन्नों के आदेश में जस्टिस पी सदालसिवन और बीएस चौहान की खंडपीठ ने अपने दो वक्तव्यों को वापस ले लिया.

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी, “हम उम्मीद करते हैं कि महात्मा गांधी का जो स्वप्न था कि धर्म राष्ट्र के विकास में एक सकारात्मक भूमिका निभाएगा वो पूरा होगा. किसी की आस्था को ज़बरदस्ती बदलना या फिर ये दलील देना कि एक धर्म दूसरे से बेहतर है उचित नहीं है.”

इसके बदले अदालत ने कहा, “इस बात में कोई विवाद नहीं कि किसी और की धार्मिक आस्था को किसी तरह से भी प्रभावित करना न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता. ” सर्वोच्च न्यायालय ने दारा सिंह और उनके साथी महेंद्र हेंब्रम को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाते हुए एक तरह से उनके काम को ऐसा कह कर न्यायोचित ठहराने की कोशिश की थी कि चूंकि उस इलाके में धर्म परिवर्तन चल रहा था, उसी परिप्रेक्ष्य में ग्राहम स्टेन्स की हत्या हुई थी.

सुप्रीम कोर्ट की इस टिपण्णी को दारा सिंह और उसके वकील ने भुनाने की कोशिश की. सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद दारा सिंह के वकील शिवशंकर मिश्रा न पत्रकारों को बताया था कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस बात के पक्के सबूत मिले हैं कि स्टेंस जबरन धर्म परिवर्तन कर रहे थे. और अदालत ने कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन समाज के लिए अच्छा नहीं है.

ग्राहम स्टेंस की पत्नी ने अपराधियों को माफ़ कर दिया:

Gladys Staines

ग्राहम स्टेंस की विधवा ग्लैडिस स्टेन्स ने अपने पति और बेटों की हत्या में शामिल लोगों को व्यक्तिगत तौर पर पहले ही माफ़ करने की घोषणा कर दी थी. वे ऑस्ट्रेलिया चली गयीं.  वे पिछले 20 बरसों से उड़ीसा में कुष्ठ रोगियों की सेवा कर रही थीं. ग्लैडीस स्टेंस के क़रीबी लोगों का कहना था  कि वे अपनी 18 साल की बेटी एस्थर के साथ ऑस्ट्रेलिया जा रही हैं. एस्थर वहाँ मेडिकल की पढ़ाई करना चाहती थी.

उस अवसर पर भारत के साथ अपने लगाव के बारे में मीडिया से बात करते हुए ग्लैडिस स्टेन्स ने कहा था कि भारत उनका घर है. पर आप कभी कभी घर से बाहर जाना चाहते हैं, नहीं?

1999 की उस लोमहर्षक घटना से देश ने कोई सबक नहीं लिया. उग्र हिंदुत्व के उभर का दौर था. केंद्र में भाजपा की सरकार थी. तीन साल बाद गुजरात में कारसेवकों से भरी एक ट्रेन गोधरा स्टेशन पर आग के हवाले कर दी गयी, फिर पूरा गुजरात साम्प्रदायिकता की हिंसक आग में जल उठा.


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