9 सार्वजनिक कंपनियों के विनिवेश के जरिये सरकार 80000 करोड़ जुटाएगी.

वित्त वर्ष 2018-19 में विनिवेश के जरिये 80000 करोड़  रुपये जुटाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार नौ सार्वजनिक कंपनियों की संपत्तियों को बेचने की योजना बना रही है. इनमें एयर इंडिया के अलावा पवन हंस, हिंदुस्तान फ्लोरोकार्बन्स, हिंदुस्तान न्यूजप्रिंट, भारत पंप्स ऐंड कंप्रेशर्स, स्कूटर्स इंडिया, ब्रिज ऐंड रूफ कंपनी, हिंदुस्तान प्रीफैब और प्रोजेक्ट ऐंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड शामिल हैं. बिक्री के लिए इन कंपनियों की परिसंपत्तियों की पहचान कर ली गई है. इनमें मुंबई, नवी मुंबई और दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रमुख स्थानों पर स्थित इन कंपनियों के ऑफिस परिसर और अपार्टमेंट से लेकर रोहिणी हेलीपोर्ट, दूसरे हवाई अड्डों में हैंगर और कारखाने शामिल हैं.
परिसंपत्तियों की बिक्री  के लिए कई तरीकों पर विचार हो रहा है: 
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘इन परिसंपत्तियों की बिक्री के लिए हम कई तरीकों पर विचार कर रहे हैं. इनमें पहला तरीका बोली के जरिये है और दूसरा एनबीसीसी मॉडल के माध्यम से. दूसरे तरीके में हम परिसंपत्तियों को एनबीसीसी को सौपेंगे जो इन परिसंपत्तियों का विकास करने के बाद इनकी बिक्री करेगी या फिर पट्टे पर देगी. तीसरा तरीका अचल परिसंपत्तियों के लिए एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) का है.’ अधिकारी ने कहा कि ईटीएफ के तहत इन संपत्तियों को एक परिसंपत्ति प्रबंधक के हवाले किया जाएगा जो फिर ईटीएफ की इकाइयों को निवेशकों को बेचेगा. यह प्रस्ताव अभी शुरुआत दौर में है और इसे आगे बढ़ाने से पहले सावधानीपूर्वक इसका अध्ययन किया जाएगा.
उल्लेखनीय है कि जिन सार्वजनिक कंपनियों की परिसंपत्तियों की बिक्री के लिए पहचान की गई है, वे सभी सरकार की निजीकरण सूची में शामिल हैं. उनकी रणनीतिक बिक्री योजना के मुताबिक जारी रहेगी और उनकी परिसंपत्तियों की बिक्री की प्रक्रिया भी अलग से साथ-साथ चलेगी. उदाहरण के लिए अगर कोई सरकारी हेलीकॉप्टर सेवा पवन हंस को खरीदता है तो वह दो साल तक रोहिणी हेलीपोर्ट और उत्तर-पश्चिम दिल्ली में कंपनी की सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकता है. सरकार इस हेलीपोर्ट को एक अलग कंपनी में मिलाने और पवन हंस के खरीदार के समझौते में बदलाव किए बिना इसे बेचने पर विचार करेगी.
एयर इंडिया के बारे में निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) को विश्वास है कि उसकी ग्राउंड हैंडलिंग, मरम्मत, खानपान और सहयोगी कंपनियों की बिक्री का कुछ हिस्सा इस साल पूरा हो जाएगा. इसके साथ-साथ दिल्ली में एयरलाइंस हाउस, मुंबई में एयर इंडिया कॉम्प्लेक्स, मुंबई और दिल्ली हवाई अड्डों पर हैंगर और इमारतें, कुछ अन्य परिसंपत्तियां तथा कलाकृतियों की भी बिक्री की जाएगी.

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