केन्द्रीय करों में बिहार की हिस्सेदारी बढ़े, सरकार की मांग; बिहार सरकार लाएगी नयी खरीद नीति

बिहार सरकार ने फिर से केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की है. इसके लिए सरकार वित्त आयोग के सामने अपना पक्ष भी रखेगी. पूर्व राजस्व सचिव एन के सिंह की अध्यक्षता 15वें आयोग की टीम रविवार को बिहार आने वाली है.  इस दौरान आयोग के सदस्य मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और दूसरे मंत्रियों के साथ मुलाकात करेंगे. आयोग के सदस्य सोमवार को स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक करेेंगे. इसके बाद बुधवार को राज्य सरकार की ओर आयोग को मांगों का ज्ञापन दिया जाएगा. इस पर विस्तृत चर्चा होगी. साथ ही, उसी दिन आयोग के सदस्य विभिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ भी मुलाकात करेंगे. इसके बाद गुरुवार को उद्योग व व्यापार संघों के प्रतिनिधियों के साथ भी उनकी बैठक होगी.
राज्य सरकार ने आयोग के सामने केंद्रीय करों में बिहार की हिस्सेदारी को बढ़ाने की मांग को जोरदार तरीके से उठाने का फैसला लिया है. उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बताया कि राज्य की मांग को आयोग के सामने पुरजोर तरीके से रखा जाएगा. उन्होंने कहा, ‘बीते वित्त आयोगों के फैसलों की वजह से करों में राज्य की हिस्सेदारी कम हुई है. देश में 12वें से लेकर 14 वें वित्त आयोग के दौरान केंद्रीय करों में बिहार की हिस्सेदारी में लगातार कमी आई है. 12वें वित्त आयोग में केंद्रीय करों में बिहार की हिस्सेदारी 11.028 प्रतिशत थी, जो 13वें आयोग की सिफारिशों की वजह से घटकर 10.917 हो गई. देश के 14वें वित्त आयोग की सिफारिश की वजह से यह घटकर 9.787 प्रतिशत रह गई.’

 

बिहार सरकार अपनी खरीद नीति में बदलाव लाएगी. संशोधित नीति तैयार हो रही:

बिहार सरकार ने अब अपनी खरीद नीति में बदलाव करने का फैसला लिया है. इसका सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा. वहीं, राज्य सरकार ने उद्यमियों से अपनी एकल खिडक़ी व्यवस्था का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने को कहा है.

कई उद्यमी बिहार सरकार के अलग-अलग विभागों में खरीद नीति को गंभीरता से लागू नहीं होने की शिकायत करते हैं. उनके मुताबिक इस नीति के तहत लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. मगर अब राज्य सरकार ने अपनी खरीद नीति में बदलाव की योजना बनाई है.

उद्योग विभाग के प्रधान सचिव एस. सिद्धार्थ ने 24 सितम्बर को  निवेशकों के एक सम्मेलन में कहा, ‘खरीद नीति को लेकर अक्सर शिकायतें आती हैं, इसलिए अब हमने अपनी नीति में संशोधन का फैसला किया है. अब हम एक संशोधित और समेकित नीति बना रहे हैं. वैसे तो पहले से एमएसएमई के लिए अलग-अलग स्तर पर नीतियां हैं.

भारत सरकार की नीति लागू है और हमारी नीति भी स्वीकृत है. हम वित्त विभाग की नीतियों का पालन करते हुए नई नीति का निर्माण कर रहे हैं. जल्दी ही यह नीति बनकर तैयार हो जाएगी.’ हालांकि, उन्होंने इस नीति के बारे में विस्तार से नहीं बताया. उनके मुताबिक इस बारे में नीति निर्माणाधीन है. उन्होंने कहा, ‘वैसे अभी भारत सरकार की खरीद नीति पूरे देश में लागू है, जिसके तहत एमएसएमई से खरीद को बढ़ावा देना है. हर विभाग में एमएसएमई अधिकारी तैनात हैं, जो छोटे उद्यमियों की मदद के लिए हैं. अगर कोई दिक्कत हुई तो हमारे अधिकारी इस बारे में पता जरूर लगाएंगे.’


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