क्या इस ठण्ड दिल्ली की आबोहवा फिर जहरीली होगी?पंजाब धान की पराली को जलाने पर रोक लगाएगा?

पंजाब में 30 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है. कटाई के बाद दो करोड़ टन धान की पराली खेतों में बच जाती है जिसका अगली रबी की फसल की बुवाई के पहले किसानों को ठिकाने लगाना होता है. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने गत गुरूवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर धान की पराली के प्रबंधन के लिए किसानों को मुआवजा के रूप में प्रति क्विंटल 100 रुपये देने का दोबारा अनुरोध किया है. फिलहाल अपने स्तर पर पंजाब  सरकार ने धान की खेती वाले 8,000 गांवों में पराली जलाने की समस्या पर रोक लगाने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय किया है. पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि कृषि विभाग ने राज्य के ऐसे गांवों की पहचान की है जहां धान की पराली परांपरागत तरीके से जलाई जाती है. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने विभाग को पहले ही निर्देश दिए हैं कि वह पराली जलाने की समस्या पर काबू पाने के लिए अपने तंत्र को सक्रियता के साथ काम पर लगाए.

अतिरिक्त मुख्य सचिव(विकास) विश्वजीत खन्ना ने बताया कि सभी उपायुक्तों को सभी प्रभावित गावों में अधिकारियों को नियुक्त करने के लिए कहा जा चुका है ताकि पराली जलाने से स्वास्थ्य एवं पर्यावरण हो होने वाले नुकसान के बारे में जागरुकता फैलाई जा सके. नोडल अधिकारी को कटाई के बाद की प्रक्रियाओं पर भी गहरी नजर रखने की जिम्मेदारी दी जाएगी. गौरतलब है कि पंजाब में 30 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है. कटाई के बाद दो करोड़ टन धान की पराली खेतों में बच जाती है जिसका अगली रबी की फसल की बुवाई के पहले किसानों को ठिकाने लगाना होता है.

बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने गत गुरूवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर धान की पराली के प्रबंधन के लिए किसानों को मुआवजा के रूप में प्रति क्विंटल 100 रुपये देने का दोबारा अनुरोध किया है. पर अभी इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है. मुख्यमंत्री के अनुसार, कड़े नियंत्रण उपायों के बावजूद हर साल पंजाब में करीब 1.5 करोड़ मीट्रिक टन पराली जलाई जा रही है. हर साल पंजाब के खेतों में इतने बड़े पैमाने पर पराली जलाने से दिल्ली  के  आसमान के ऊपर कार्बन और सल्फर के जहरीले सूट फ़ैल जाते हैं, और दिल्ली की हवा को जहरीली बनाते हैं. अदालतों ने  भी अपने कई फैसलों में इस समस्या पर ध्यान देने की सरकार  को राय दी है.  सरकारों के ठोस कदम का अभी भी इंतेज़ार है.


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