#Disaster: क्या हम 28 सितम्बर को इंडोनेशिया में आये सुनामी जैसे खतरे के लिए तैयार हैं?

नकुल तरुण- डिजास्टर मैनेजमेंट एक्सपर्ट.

शुक्रवार 28 सितम्बर को रिक्टर स्केल पर 7.5 इंटेंसिटी का भूकंप इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर आया. इस भूकंप ने तट पर सुनामी को ट्रिगर किया. दोहरी मार पड़ी. पुरे  द्वीप पर एक भगदड़ मच गयी. लोग जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे. पर शहरों के लोग बहुत दूर नहीं भाग सके. ऊँची ऊँची बिल्डिंग ने उन्हें अपनी जद  में ले लिया. तट पर भी भारी नुक्सान हुआ. देश की डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी ने कहा कि मरने वालों की संख्या दो दिनों में 1347 तक पहुँच गयी. अभी भी घरों के मलवे में कई लोग दबे हो सकते हैं, जिन्हें तुरंत निकालने की जरुरत है. अपनी रिपोर्ट में गवर्नमेंट एजेंसी और मीडिया दोनों ने इंफ्रास्ट्रक्चर और सम्पत्ति  को भीषण नुकसान पहुँचने की आशंका जताई है.  आने वाले दो चार दिनों में शायद हताहतों की संख्या में और इजाफा हो. इंडोनेशिया का पेलू शहर जहाँ 350,000 लोग रहते हैं में भयंकर तबाही का मंजर है, 650 से अधिक लोगों का स्थानीय अस्पतालों में इलाज चल रहा है और सैकड़ों लापता बताये जा रहे हैं. चूँकि 100 घंटे से ऊपर हो चुके हैं, ऐसे में आशंका है कि लापता लोग शायद अगली सुबह न देख सकें.

बहुत दुखद दृश्य होता है जब प्राकृतिक आपदा का शिकार मासूम बच्चे बनते हैं

12 सितम्बर को रिक्टर स्केल पर 5.5 तीव्रता के मध्यम इंटेंसिटी के भूकंप ने असम को सुबह सुबह कम्पा कर रख दिया. इस भूकंप के झटके  पश्चिम में सिलिगुरी और सुदूर पटना तक महसूस किये गये थे. भूकंप 15 से 20 सेकंड तक रहा. 2018 की शुरुआत से भारत में कम और मध्यम तीव्रता के भूकंप के लगभग 125 झटके इंडियन मेतेरोलोजिकल डिपार्टमेंट ने रिकॉर्ड किये हैं.

बाढ़ आने की स्थिति में क्या करें और क्या न करें?

भारतीय उपमहाद्वीप और दुनिया के अन्य हिस्सों में भूकंप के लगातार रिकॉर्ड किये जा रहे भूकंप के झटके इशारा कर रहे हैं कि शायद निकट भविष्य में भूकंप विनाशी रूप में इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करे. इस बात की बहुत अधिक संभावना है; हालाँकि हमने साइंस और टेक्नोलॉजी के मामले में अभी भी इतनी तरक्की नहीं की है, कि इस सम्बन्ध में कोई स्पष्ट भविष्यवाणी कर सकें.

सवाल बेसिक लेकिन बहुत महत्व का है: क्या हम तैयार हैं? 

ऐसे में सवाल है कि क्या देश और खास कर शहरी भारत एक बड़े भूकंप के लिए तैयार है? क्या दिल्ली, मुंबई या भारत का कोई अन्य मेट्रोपोलिटन शहर 2015  में काठमांडू की तरह के शक्तिशाली भूकंप को झेलने के लिए पूरी तरह से तैयार है?

नीदरलैंड ने बाढ़ से निपटने के लिए पानी को रोका नहीं उसे रास्ता दिया

या फिर क्या हम शुक्रवार को आये  इण्डोनेशियाई भूकंप के लिए तैयार हैं? भूकंप की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, ऐसे में भूकंप ( सुनामी भी) सबसे खतरनाक प्राकृतिक आपदा के रूप आधुनिक मानव के सामने एक बड़ी चुनौती  हैं. आंकडें अपनी गवाही खुद दे रहे हैं. 1994  से 2013 यानि पिछले 20 वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं में होने वाली मौतों में 55 फीसदी मौतें भूकंप और सुनामी के चलते हुई हैं. मौतों की संख्या करीब 750,000 है. केवल पिछले दशक में दुनिया ने बहुत बड़े बड़े भूकंप देखे हैं, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, हैती, न्यूजीलैंड, जापान, ईरान, नेपाल, इटली महज कुछ देश हैं इस लम्बी लिस्ट में. जहाँ जान माल की अभूतपूर्व क्षति हुई है.

नीदरलैंड की तरह बिहार में बाढ़ पर लगाम क्यों नहीं लगा सकते?

हमें सवाल का जवाब ढूँढना होगा, अगर हमें प्राकृतिक आपदाओं में होने वाले जान माल के नुक्सान को यथासंभव कम करना है तो.

डिजास्टर को मैनेज करने की जरूरत है !!

क्या है प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदा?


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