जीतन राम मांझी ने बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की

पटना: पूर्व मुख्यमंत्री और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (एचएएम) के प्रमुख जीतनराम मांझी ने शुक्रवार को राज्य में कानून एवं व्यवस्था की खराब स्थिति और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून के “खुलेआम उल्लंघन” को लेकर बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की. राज्यपाल लालजी टंडन के साथ मुलाकात करने के एक दिन बाद यहां मीडिया से बातचीत में मांझी ने यह बात कही.

बिहार में अजा/ अजजा कानून के खुलेआम उल्लंघन और अपराध का ग्राफ बढ़ने का दावा करते हुए उन्होंने राज्यपाल से राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश करने की अपील की थी. उन्होंने कहा, “मैं कल राज्यपाल लालजी टंडन से मिला था और उन्हें बिहार की बिगड़ती कानून-व्यवस्था से अवगत कराया जो एक खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है जहां अजा/ अजजा कानून समेत सभी कानूनों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है. मैंने उनसे (राज्यपाल से) राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करने की अपील की.” एक समय में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी रहे मांझी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से बाहर होने के बाद महागठबंधन में राजद की तरफ जाते दिख रहे हैं.

कुमार के हालिया बयान को लेकर मांझी ने उनपर निशाना साधा जिसमें उन्होंने कहा था कि विश्व की कोई भी शक्ति अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण के प्रावधान को खत्म या बदल नहीं सकती. मांझी ने लोगों से कहा कि वे जदयू के दलित-महादलित सम्मेलन से प्रभावित न हों ‘जिसके माध्यम से वह फर्जी आंकड़ों की मदद से झूठ फैला रहे हैं.”


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