पटाखा: दो बहनों की नफरत की कहानी

नवीन शर्मा
विशाल भारद्वाज की पटाखा’ फिल्म राजस्थानी लेखक चरण सिंह पथिक की 2006 में लिखी कहानी ‘दो बहनें’ पर आधारित है. यह ऐसी दो बहनों चंपा उर्फ बड़की (राधिका मदान) और गेंदा उर्फ छुटकी (सान्या मल्होत्रा) की कहानी है, जो एक दूसरे से बेहद ईर्ष्या करती हैं. इनकी ये जलन आए दिन मारपीट में तब्दील होती रहती है. उनकी दुश्मनी बड़ी होने के साथ बढ़ती जाती है. वहीं गांव में ही रहने वाला डिपर (सुनील ग्रोवर) दोनों बहनों के बीच खूब लड़ाई कराता है और उनकी लड़ाई को देख खूब मजे भी लेता है.


पिता(विजय राज) लीज पर पत्थर की खदान चलाते हैं. लीज के रिन्यूवल के लिए उससे इतनी अधिक घूस मांगी जाती है कि वो उतने पैसे का इंतजाम नहीं कर पाता. मजबूर होकर पैसे लेकर बड़की की शादी अधेड़ उम्र के लंपट व्यक्ति गांव के पटेल से कराने को राजी होता है, लेकिन बड़की शादी से पहले ही अपने प्रेमी के साथ भाग जाती है. इसके बाद पटेल उनके पिता को छुटकी की शादी कराने के लिए विवश करता है. लेकिन वो भी अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ भाग जाती है.


कहानी में टिविस्ट तब आता है जब ससुराल जाकर दोनों जानी दुश्मन बहनों को पता चलता है कि दोनों के पति सगे भाई हैं. यहां आकर उनकी दुश्मनी नया रूप ले लेती है. दोनों बहनों के एक दूसरे से नफरत और जलन का का पैमाना इतना अधिक हो जाता है कि दोनों बहनें एक दूसरे की सफलता और खूशी बर्दाश्त नहीं कर पातीं. अपनी नफरत की आग से जलकर एक बहन अंधी हो जाती है तो दूसरी गूंगी हो जाती है. फिर जब ये अपनी दुश्मनी को छोड़ एक दूसरे से प्रेम करतीं हैं तब जाकर वे फिर से देखने और बोलने लगती हैं.


फिल्‍म में बहनों की भूमिका में राधिका मदान और सान्या मल्होत्रा ने बेहतरीन अभिनय किया है. इन दोनों की लड़ाई वास्तविक लगती है. इन्होंने गांव की लड़की की भूमिका को निभाने के लिए अच्छी तैयारी की थी. विजय राज तो मंजे हुए अभिनेता हैं ही. डिपर की भूमिका में सुनील ग्रोवर कमाल करते हैं.


फिल्म के गाने अच्छे हैं. ‘बलमा’, ‘नैना’ और ‘कुल्हड़ फोड़े गली-गली’ जैसे गाने तुरंत ज़ुबान पर चढ़ जाते हैं. गुलज़ार साहब अलग तरह के बोल वाले गीतों से हर बार चौंका देते हैं.


फिल्‍म के संवाद दमदार हैं और स्थानीय बोली की वजह से वास्तविक लगते हैं.  गांव की लोकेशन भी अच्छी चुनी गई है.
फिल्‍म का मैसेज है जिस तरह से दोनों बहनें अपनी जानी दुश्मनी की वजह से अपनी देखने व सुनने की ताकत खो बैठतीं हैं और जब प्रेम की राह पकड़ ही फिर सामान्य हो पातीं हैं. इसी तरह भारत-पाकिस्तान, दोनों कोरिया और रूस अमेरिका भी अपनी दुश्मनी भूला कर ही तरक्की कर सकते हैं.


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