चीन भारत से खली के आयात पर जल्द ही रोक हटा सकता है। चीन ने यह प्रतिबंध छह साल पहले लगाया था। दरअसल अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध चल रहा है। इससे चीन में अमेरिका से खली की आपूर्ति घट गई है।  उद्योग के सूत्रों ने कहा कि चीन की कंपनियां भारत से सरसों की खली का आयात करने की इच्छुक हैं। वे यह आयात अदाणी विल्मर और अंबुजा एक्सपोट्र्स समेत करीब आधा दर्जन मान्यता प्राप्त भारतीय निर्यातकों के जरिये करेंगी। उद्योग के सूत्रों ने कहा कि चीन का गुणवत्ता निगरानी एवं निरीक्षण प्रशासन का अंतर मंत्रालय विभाग इस संबंध में पहले ही अंतिम फैसला ले चुका है। हालांकि आधिकारिक अधिसूचना अभी प्रकाशित नहीं हुई है।
चीन के बाजार का खुलना भारतीय खली निर्यातकों के लिए एक बड़ा मौका होगा। भारत के खली निर्यातक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण भारी दबाव से गुजर रहे हैं। खली का इस्तेमाल पक्षी एवं पशुओं के खाद्य के रूप में होता है, इसलिए खली की मांग आयातक देशों की आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर करती है। चीन खली के आयात के लिए अमेरिका के अलावा अन्य कोई वैकल्पिक बाजार तलाश रहा है।  सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने कहा, ‘अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध से काफी अनिश्चितता पैदा हुई है। इससे चीन सोयाबीन और खली की अपनी जरूरत पूरी करने के लिए अन्य बाजार तलाशने को बाध्य हुआ है। इससे चीन भारत से सोयाखली के आयात पर रोक हटाने के बारे में विचार को मजबूर हो गया है। यह रोक उसने 2012 से लगाई हुई है। हमें वाणिज्य मंत्रालय और भारत की निर्यात निरीक्षण परिषद से सूचना मिली है कि चीन भारत से सरसों खली के आयात पर बहुत जल्द रोक हटाएगा।’
भारत की जो निर्यातक इकाइयां पहले ही चीन के गुणवत्ता निगरानी एवं निरीक्षण प्रशासन से मान्यता प्राप्त हैं, वे चीनी सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद सरसों खली का निर्यात शुरू कर पाएंगी। भारत से चीन को सोयाखली का निर्यात शुरू होने में कुछ लग सकता है क्योंकि चीन की निरीक्षण प्रशासन टीम निरीक्षण या मंजूरी के लिए भारतीय संयंत्रों का दौरा करेगी। वर्ष 2012 में प्रतिबंध से पहले चीन भारत से करीब 5 लाख टन खली का आयात करता था। इस खली में सरसों की खली का हिस्सा 3.5 से 4 लाख टन और सोयाबीन का 1 लाख टन था।
मेहता ने कहा, ‘इससे भारत के सोयाखली निर्यात में बढ़ोतरी होने की संभावना है।’ चीन भारत से सोयाबीन का आयात करने का भी इच्छुक है क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वहां से खली का आयात करना महंगा हो गया है। अमेरिका और चीन के बीच चल रहे वर्तमान व्यापार युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी अनिश्चितता पैदा हो गई है। ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों, पश्चिम एशिया में राजनीति उठापटक और यूरोप में धीमी वृद्धि से दुनियाभर में खली की मांग कम हुई है। इसके नतीजतन भारत का खली निर्यात सितंबर, 2018 में 73 फीसदी घटकर महज 81,511 टन रहा, जो पिछले साल के इसी महीने में 2,98,182 टन था।
रोचक बात यह है कि भारत का खली निर्यात इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच 9 फीसदी बढ़कर 14 लाख टन रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि में 12.8 लाख टन रहा था। हालांकि इन पहले छह महीनों के दौरान सरसों खली का निर्यात तेजी से बढ़कर 6,01,105 टन रहा है, जो पिछले साल की इसी अवधि के निर्यात करीब 3,00,627 टन से करीब दोगुना है। इसका निर्यात मुख्य रूप से दक्षिण कोरिया, वियतनाम और थाईलैंड को हुआ।

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