साइबर क्राइम के खतरों को अब नज़रंदाज़ नहीं कर सकते

स्वाति कुमारी. 

साइबर अपराधों की बात करने पर आमतौर पर अकाउंट हैक करने जैसी बड़ी बातें ही याद आती हैं. इसका एक रूप साइबर बुल्लिंग भी हो सकता है, इसपर कम ही लोग सोचते हैं. साइबर बुल्लिंग बच्चों, किशोरों या कहिये कि कम उम्र के लोगों पर ज्यादा असर करता है. गिरोह बनाकर दस लोग आपकी हर बात का विरोध करने आ जाएँ, आपके सोशल नेटवर्क पर आपको नीचा दिखाने लगें, तो किसी को भी परेशानी होगी. छोटे बच्चों या किशोरों की बात छोड़िये, हाल में ही आई.आई.एम.सी. के एक नौजवान को उसकी राजनैतिक-धार्मिक अभिरुचियों के लिए कहीं नौकरी नहीं मिलने देने जैसी धमकियाँ दी जा रही थीं.

किसी ख़ास विचारधारा को समर्थन न देने पर इन्टरनेट पर बहिष्कार, या सोशल मीडिया पर दबाव बनाना साइबर बुल्लिंग की एक किस्म हो सकती है. हाल ही में विवादों के बाद उभरे, जे.एन.यू. के एक छात्र नेता की अश्लील हरकतों की पोल खोलने वाली युवती के चरित्र पर सोशल मीडिया के जरिये लांछन भी लगाए गए थे. उसपर चुप रहने का जैसा दबाव बनाया जा रहा था वो साइबर बुल्लिंग (cyber bullying) ही था. ध्यान रहे कि ये इन्टरनेट (internet) और सोशल मीडिया (social media) के जरिये की जा सकने वाली इकलौती गलत हरकत नहीं है. इसके अलावा भी कई और अपराध हैं जो परिभाषित किये गए हैं.

एक दूसरा अपराध साइबर स्टाकिंग (Cyber Stalking) भी हो सकता है. उर्दू शेरो-शायरी में भले महबूब की गली के सौ-सौ चक्कर लगाने को आशिक के महिमामंडन के तौर पर दिखाया जाए लेकिन बच्चियों के लिए ये आमतौर पर परेशानी और डर की एक बड़ी वजह होता है. भारत में स्टाकिंग के लिए आई.पी.सी. की धारा 354D मौजूद थी. इसी कानून में संशोधन करके उसमें पीड़ित को अवांछित, या डराने वाले सन्देश भेजना, बिना पीड़ित की इच्छा के उसतक पहुँचने की कोशिश करने जैसी हरकतों को भी शामिल कर दिया गया है. बच्चियों के मामले में इसे जब POCSO के S.11(IV) के साथ देखा जाता है, तो इसके लिए सख्त सजाएं दी जा सकती हैं.

सोशल मीडिया पर ही कभी कभी ऐसी लड़कियों की प्रोफाइल नजर आती है, जो दुष्टता के मकसद से ही बनायी गयी होती है. अवांछित प्रयासों से इनकार कर देने वाली, एकतरफा प्रेम प्रसंगों के मामले में ऐसी प्रोफाइल किसी ने बदला लेने की सोचकर बनाई होती है. ये परिभाषा के हिसाब से रिवेंज पोर्न (Revenge Porn) है जो कि भारत में आई.टी. एक्ट के 66B और आई.पी.सी. की 354B सहित और भी कई धाराओं में अपराध है। पीड़ित की उम्र कितनी है, उसके आधार पर यहाँ भी POCSO लागू हो सकता है। यहाँ साइबर बुल्लिंग के अलावा सिर्फ दो और ऐसी हरकतें गिनाई हैं, जो साइबर अपराध हैं.

इन्टरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले करीब-करीब सभी लोग ऐसे अपराधों से वाकिफ़ होंगे। अब सवाल है कि क्या आपने बच्चों को ऐसे अपराधों के बारे में बताया है? घर की मोटरसाइकिल-स्कूटी तक लेकर बाहर जाते समय आप बच्चों को ये तो याद दिलाते हैं न कि बिना हेलमेट के दोपहिया चालन पर जुर्माना हो सकता है? आपने उन्हें कभी न कभी ये समझाने की कोशिश तो की होगी कि “लहरिया कट” मारकर बाइक नहीं चलानी चाहिए? चलिए ये सब नहीं सिखाया तो बचपन में दूसरों की पेंसिलें, कॉपी-किताब लेना, चोरी करना बुरी बात है, ये तो सिखाया ही होगा?

ऐसी कई चीज़ें हैं जिसे सिखाने की प्राथमिक जिम्मेदारी माता-पिता पर ही आती है. साइबर स्टाकिंग या रिवेंज पोर्न से शुरू हुई हरकत थोड़ा आगे बढ़ते ही एक मनोविकार बन जायेगी. अक्सर एक तरफ़ा प्रेम प्रसंगों में तेजाब फेंकने की हरकत (acid attack) की शुरुआत यहीं से हुई होती है. आपके बच्चे ऐसे अपराधों के शिकार न बनें, इसलिए इन चीज़ों के बारे में बताना आपका काम है. एक दूसरी जिम्मेदारी ये भी है कि आप अपने बच्चे को अपराधी बनते तो नहीं देखना चाहते न? इसलिए क्या गलत है, ये क्यों नहीं करना चाहिए, ये भी आपको ही बताना होगा. कोई और सिखाने आएगा, इस इन्तजार में अपने बच्चों की जिम्मेदारी तो नहीं छोड़ रहे न?

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