रूपये पर दबाब कम करने के लिए तेल कम्पनियां बाज़ार से 1.4 अरब डॉलर जुटाएंगी

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेश से विदेशी मुद्रा में कर्ज लेने को लेकर नियमों में ढील देने के बाद तेल विपणन कंपनियों ने पहले चरण में करीब 1.4 अरब डॉलर जुटाने का फैसला किया है. रिज़र्व बैंक ने रुपये पर दबाव कम करने के लिए नियमों में ढील दी थी.

तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियां भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने नियमों में ढील वाले बाह्य वाणिज्यिक उधारी (External Commerical Borrowings) मानकों के तहत विभिन्न कर्जदाताओं से दरों की सूची मांगी है. यह धन कार्यशील पूंजी की जरूरतें पूरी करने के लिए जुटाया जाएगा, जो खासकर कच्चे तेल की खरीद के लिए है.

एचपीसीएल (HPCL) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम 30 करोड़ डॉलर जुटाने और 20 करोड़ डॉलर ग्रीन शू ऑप्शन के रूप में अतिरिक्त जुटाने पर विचार कर रहे हैं. हमने अभी केवल प्रस्ताव मांगे हैं. प्रक्रिया अगले महीने के पहले 15 दिन में पूरा होने की संभावना है.’ उन्होंने कहा कि आगे और जुटाने की जरूरत है या नहीं, इस पर बाद में फैसला किया जाएगा. 
रिजर्व बैंक ने 3 अक्टूबर को तेल कंपनियों को हेजिंग ( Hedging) की जरूरतों के बगैर विदेशी बाजारों से सीधे डॉलर जुटाने की अनुमति दे दी थी. केंद्रीय बैंक ने अधिसूचना में कहा था कि उधारी की न्यूनतम परिवक्वता अवधि 3 साल से 5 साल होनी चाहिए और इस योजना के तहत कुल सीमा 10 अरब डॉलर होगी.
देश की सबसे बड़ी रिफाइनर आईओसी ईसीबी के माध्यम से पहले चरण में 30 करोड़ डॉलर जुटाने पर विचार कर रही है. एक अधिकारी ने नाम नहीं दिए जाने की शर्त पर कहा, ‘हम 10 अरब डॉलर का करीब आधा जुटाने पर विचार कर रहे हैं, जिसकी अनुमति रिजर्व बैंक ने दी है.’ 
ईसीबी मानकों में ढील देने का फैसला ओएमसी को उधारी के माध्यम से डॉलर जुटाने में मदद करना और उनकी भौतिक मांग में कटौती करना है. बहरहाल पहले चरण के धन जुटाने का बहुत ज्यादा असर पडऩे की संभावना नहीं है. केयर रेटिंग में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘ओएमसी के उधारी लेने से विदेशी मुद्रा की भौतिक मांग नीचे आएगी और रुपये को मदद मिलेगी. पहले चरण में ओएमसी की उधारी सकारात्मक कदम है, लेकिन इसका बहुत ज्यादा असर नहीं होगा.’
उन्होंने कहा, ‘ओएमसी के डॉलर खरीद में कटौती से रुपये की कमजोरी दूर करने में उस समय मदद मिलती, जब मूल कारक प्रभावी होते. बहरहाल मैं इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कारकों को वजह मान रहा हूं और इस तरह से पूंजीगत जरूरतों के लिए ओएमसी की उधारी का सीमित असर रहेगा.’
सरकारी कंपनी बीपीसीएल (BPCL) ने भी ईसीबी के माध्यम से 60 करोड़ डॉलर कार्यशील पूंजी जुटाने की योजना बनाई है. कंपनी के एक उच्च अधिकारी ने कहा कि देख रही है कि किन दरों की पेशकश की जाती है, जिस पर अगला फैसला निर्भर होगा. 
पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर और तेल व गैस उद्योग की गतिविधियों के प्रमुख दीपक माहुरकर ने कहा, ‘तेल कंपनियों को सिर्फ यह फायदा होगा कि अपने बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल के कारण  ईसीबी के माध्यम से बेहतर दरों पर कर्ज जुटाने मेंं सफल हो सकती हैं. रुपये के मजबूत होने पर अगर इन ईसीबी का भुगतान होता है तो ओएमसी को लाभ होगा.’ माहुरकर ने कहा, ‘अगर ब्याज दरें आकर्षक रहती हैं और पुनर्भुगतान के वक्त रुपया मजबूत होता है तो कंपनियों को फायदा होगा.’

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