दाती महाराज दुष्कर्म काण्ड: कैटरर मदन बन गया दाती महाराज; अब सीबीआई जांच करेगी

अपनी ही शिष्या से दुष्कर्म के आरोप में फंसे दाती महाराज को आज सुप्रीम कोर्ट ने भी तगड़ा झटका दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने दाती महाराज की एक याचिका को खारिज करते हुए उन्हें किसी भी तरह की राहत देने से साफ इनकार कर दिया है. इसके बाद से उनकी गिरफ्तारी की संभावनाएं एक बार फिर मजबूत हो गई हैं.

मामले में ठीक से कार्रवाई न होने पर पीड़िता ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की अपील की थी. इस मामले में हाईकोर्ट ने आदेश दे दिया था कि सीबीआई की जांच कराई जाए. इसके बाद दाती महाराज ने उच्च न्यायालय के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी.

दाती महाराज की उसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया. यानी अब दाती महाराज रेप केस की जांच सीबीआई करेगी और यही वजह है कि माना जा रहा है कि दाती महाराज गिरफ्तार भी हो सकते हैं.

जब कैटरर मदन बन गया दाती महाराज

राजस्थान के पाली जिले के अलावास गांव में मेघवाल परिवार में जुलाई 1950 को दाती का जन्म हुआ. पिता का नाम देवाराम था. जन्म के कुछ महीने के बाद ही मां का देहांत हो गया. मेघवाल समुदाय ढोलक बजाकर अपना परिवार पालता था. देवाराम भी यही करते थे. मदन जब सात साल का हुआ, देवाराम की भी मौत हो गई.

गांव के ही एक शख्स के साथ मदन दिल्ली में आ गया. जानकार पहले उसने चाय की दुकानों में छोटे-मोटे काम किए फिर केटरिंग का काम सीख लिया. इसके बाद मदन जन्मदिन और छोटी-मोटी पार्टियों के लिए केटरिंग करने लगा. मदन की मुलाकात 1996 में राजस्थान के एक ज्योतिषी से हुई. मदन ने केटरिंग का काम करने के साथ ही जन्मपत्री देखना सीख लिया. इसके बाद केटरिंग का कारोबार बंद कर कैलाश कॉलोनी में ज्योतिष केंद्र खोल दिया. नाम बदलकर दाती महाराज रख लिया.

मदन हर किसी की जन्मपत्री देखकर शनि की चाल का खौफ दिखाने लगा. 1998 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव होने थे. मदन ने एक नेता की कुंडली देखकर कह दिया कि यह शख्स चुनाव जीत जाएगा. आखिरकार वह चुनाव जीत भी गया. इस खुशी में उसने फतेहपुर बेरी में अपने पुश्तैनी मंदिर का काम दाती महाराज को सौंप दिया. सटीक भविष्यवाणी की लोगों में चर्चा होने लगी. इस बीच मंदिर के आसपास की जगहों पर भी कब्जा जमा लिया.

2010 में हरिद्वार में महाकुंभ श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े ने दाती महराज को महामंडलेश्वर की उपाधि दी. उन्होंने मंदिर को श्री सिद्ध शक्तिपीठ शनिधाम पीठाधीश्वर का नाम दिया और अपना नाम श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर परमहंस दाती जी महाराज नाम रख लिया. टीवी चैनलों पर ‘शनि शत्रु नहीं मित्र है’ के नाम से प्रोग्राम प्रसारित होने लगे. खुद का यू-ट्यूब चैनल भी शुरू कर दिया. 2003 में शनि देव की एक प्रतिमा स्थापित कर दी. आश्रम में अस्पताल, गोशाला और अनाथालय भी है.

इसके बाद दाती महाराज ने पाली में भी अपना एक आश्रम बनाया. कुछ साल पहले आश्रम में ही रहने वाली 25 साल की लड़की ने आरोप लगाया  कि दाती महाराज ने उसके साथ मंदिर के अंदर रेप किया. लड़की ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि आश्रम में लगातार उसका यौन शोषण हुआ और उसे धमकी दी गई कि वो पुलिस में न जाए. इस दौरान उसे मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया गया. मामले में फतेहपुर बेरी थाने में केस दर्ज कर लिया गया.

दाती महाराज की पीड़िता की आपबीती: ‘मैं तुम्हारा प्रभु हूं, इधर-उधर क्यों भटकना…’

पीड़िता ने उस रात का जिक्र करते हुए बताया कि उसे सफेद कपड़े पहनाए गए. कहा गया कि चरण सेवा के लिए सफेद कपड़े वालों को ही भेजा जाता है. जिस अंधेरी गुफा नुमा कमरे में भेजा गया वहां एसी के एलईडी लाइट पर भी टेप लगाया हुआ था. दाती महाराज  ने कहा, ‘मैं तुम्हारा प्रभु हूं. क्यों इधर- उधर भटकना. मैं सब वासना खत्म कर दूंगा.’ पीड़िता ने कहा कि उन्होंने खुद को कैद में पाया. उस रात रोने के अलावा कुछ नहीं था. वहां से बाहर निकलने के बाद जिसने भेजा था उसने कहा, जो कुछ भी हुआ है सभी करते हैं.

पीड़िता ने चिट्ठी लिख बताई आपबीती…
‘मुझे नहीं पता शिकायत के बाद मेरा क्या होगा.. शायद आप लोगों के बीच में मैं न रहूं, मगर औरों की जिंदगी बर्बाद न हो’

मैं……………. आज आपसे उस बारे में शिकायत करने जा रही हूं, जिसे डर के कारण, पारिवारिक खातमे के डर से हिम्मत न कर सकी. मगर अब घुट-घुट कर जिया नहीं जाता. भले मेरी जान क्यों न चली जाएं, जिसकी मुझे पूरी आशंका है. फिर भी मरने से पहले यह सच सबके सामने लाना चाहती हूं….

मेरे साथ दाती मदनलाल राजस्थानी ने अपने सहयोगी श्रद्धा उर्फ नीतू, अशोक, अर्जुन, नीमा जोशी के साथ मिलकर 9 जनवरी 2016 को दिल्ली स्थित आश्रम श्री शनि तीर्थ, असोला फतेहपुर बेरी में रेप, कुकर्म किया। यह तब हुआ जब मुझे ‘चरण सेवा’ के लिए श्रद्धा उर्फ नीतू के द्वारा दाती मदनलाल राजस्थानी के पास ले जाया गया। मेरे प्राइवेट पार्ट में …… किया गया। उस रात चीखती-चिल्लाती, दर्द से कराहती रही।

यही चीजें मेरे साथ 26, 27, 28, मार्च 2016 को राजस्थान स्थित गुरुकुल, सोजत शहर, जिला पाली में दाती मदनलाल राजस्थानी ने दोहराईं. अनिल व श्रद्धा ने इस घटना को अंजाम देने के लिए दाती मदनलाल राजस्थानी का भरपूर साथ दिया. अनिल ने भी यही सब किया. इन दोनों घटनाओं में मेरे शरीर के हर हिस्से को जानवरों की तरह नोंचा गया. ये सब मेरे साथ ‘चरण सेवा’ के नाम पर किया गया.

श्रद्धा उर्फ नीतू हमेशा कहती, …‘इससे तुम्हें मोक्ष प्राप्त होगा. यह भी सेवा ही है. तुम बाबा की हो और बाबा तुम्हारे.  तुम कोई नया काम नहीं कर रही हो, सब करते आए हैं. कल हमारी बारी थी, आज तुम्हारी बारी है, कल न जाने किसकी होगी. बाबा समंदर हैं और हम सब उसकी मछलियां हैं.  इसे कर्ज समझ कर चुका लो’…

इन तीन दिनों में अनिल ने भी मेरे साथ जबर्दस्ती रेप, कुकर्म किया. ये तीन रातें मेरी जिंदगी की सबसे भयानक रातें थीं. इस तीन रातों में न जाने मेरे साथ कितनी बार …किया. ये सब करते हुए मदललाल राजस्थानी ने एक बात कही- ‘तुम्हारी सेवा पूरी हुई’…

इस घटना के बाद मेरी सोचने की इच्छाशक्ति मानो जैसे खत्म हो गई थी. घुट-घुट के जीने से अच्छा है एक बार लड़कर मरूं ताकि इस गंदे राक्षस की सच्चाई सबके सामने ला सकूं. ना जाने कितनी ही लड़कियां मेरी तरह बेबस, लाचार हैं.

मुझे नहीं पता इस शिकायत के बाद मेरा क्या होगा. शायद मैं आप लोगों के बीच न रहूं पर मेरी पुकार आप सभी के बीच रहेगी. सिर्फ इसी उम्मीद के सहारे यह पत्र लिख रही हूं. शायद मुझे न्याय मिले व औरों की जिंदगियां बर्बाद होने से बच सकें. मदनलाल राजस्थानी को जीने का अधिकार नहीं हैं.

मेरी एक ही इच्छा है कि इसके कर्मों की सजा फांसी होनी चाहिए. आपसे यह प्रार्थना है कि मेरा नाम, मेरी पहचान, मेरा पता गुप्त रखा जाए. वरना उसके द्वारा दी गईं धमकियां (न तू रहेगी, न तेरा अस्तित्व) सच हो जाएंगी, जिसकी वजह से आज तक चुप रही.

मुझे व मेरे परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए, अगर मुझे सुरक्षा नहीं दी गई तो यह तय है, न मैं रहूंगी, न मेरा परिवार। सब खत्म हो जाएगा. दाती मदनलाल राजस्थानी बहुत खतरनाक है.

अब तक इसलिए चुप रही. मुझे नहीं लगता था कि मेरा कोई साथ देगा. मगर जब बर्दाश्त से बाहर हो गया तो इस बारे में अपनी ममी-पापा को बताया. उन्होंने वचन दिया कि आखिरी सांस तक तुम्हारा साथ देंगे.

न्याय की इच्छा मरने से पहले और मरने के बाद, जो मेरे साथ हुआ और किसी के साथ न हो.

पीड़िता.


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