जल्द गूगल एप्प के पैसे मोबाइल कंपनियों से वसूलेगा; ग्राहक पर इसकी गाज गिरेगी

गूगल अब यूरोप में मोबाइल कंपनियों से एंड्रॉयड ऐप्स का इस्तेमाल करने के लिए पैसे वसूलने की तैयारी कर रही है, जिसके लिए गूगल ने अपनी लाइसेंसिंग पॉलिसी में बदलाव किया है. इसके बाद अब वहां मोबाइल कंपनियों को अपने स्मार्टफोन गूगल की तरफ से फ्री मिलने वाली सर्विसेस और ऐप्स का इस्तेमाल करने के लिए पैसे चुकाने होंगे. गूगल ने इस बात की जानकारी एक पोस्ट के जरिए दी है.

गूगल की ये नई पॉलिसी यूरोपियन मार्केट में 29 अक्टूबर 2018 से लागू होगी यानी कि तय तारीख के बाद आने वाले स्मार्टफोन और टैबलेट में गूगल सर्विसेस लेने के लिए कंपनियों को लाइसेंस फीस देनी होगी. हालांकि अभी ये साफ नहीं है कि कंपनियों को गूगल सर्विसेस के लिए कितने पैसे चुकाने होंगे.

गूगल प्ले स्टोर के लिए भी देने होंगे पैसे

  • अभी तक गूगल की तरफ से गूगल की सभी सर्विसेस (ऐप्स) और एंड्रॉयड ओएस स्मार्टफोन कंपनियों के लिए फ्री था, लेकिन यूरोप में अब इसके लिए कंपनियों को लाइसेंस फीस देनी होगी.
  • इसके बाद अगर मोबाइल कंपनियों को अपने फोन में गूगल प्ले स्टोर और गूगल ऐप्स देनी है, तो उन्हें इसके लिए गूगल को पैसे देने की जरूरत होगी.
  • वहीं अगर फोन में गूगल क्रोम ब्राउजर और गूगल सर्च ऐप भी कंपनियों को देनी है, तो उसके लिए भी फीस देनी पड़ेगी.

अब मोबाइल कंपनियों के पास तीन ऑप्शन

  1. ऐसा फोन बनाएं, जिसमें गूगल प्ले स्टोर और गूगल की ऐप्स न हों.
  2. ऐसा फोन बनाएं, जिसमें गूगल प्ले स्टोर और गूगल ऐप्स तो हों लेकिन क्रोम ब्राउजर और गूगल सर्च ऐप न हो.
  3.  ऐसा फोन बनाएं, जिसमें गूगल की सभी सर्विसेस या ऐप्स हों। मतलब जैसे फोन अभी बनाए जाते हैं.

अभी तक क्या था?

  • अभी तक स्मार्टफोन कंपनियों को गूगल अपना एंड्रॉयड फ्री में देती थी और उस पर सर्च रिजल्ट के दौरान दिखाए जाने वाले विज्ञापनों से कमाई करती थी.
  • लेकिन जुलाई में यूरोपियन यूनियन के जुर्माना लगाए जाने के बाद अब गूगल यूरोप में अपनी सर्विसेस देने के लिए पैसे लेगी.

इससे गूगल पर क्या असर होगा?

  • स्टेट्स काउंटर की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2018 तक यूरोप में 73.67% स्मार्टफोन एंड्रॉयड ओएस पर चलते हैं। इस फैसले की वजह से यूरोप में एंड्रॉयड स्मार्टफोन की संख्या कम हो सकती है.
  • इसके अलावा गूगल के इस फैसले से दूसरी कंपनियों को फायदा मिल सकता है। क्योंकि एंड्रॉयड फ्री होने की वजह से ही इतना पॉपुलर है, लेकिन जब गूगल इसके पैसे ले रही है तो दूसरी कंपनियां अपने ऐप देने के लिए आगे आ सकती हैं। इससे गूगल का मार्केट शेयर गिर सकता है.

क्यों लिया गूगल ने ये फैसला?

  • दरअसल, इसी साल जुलाई में यूरोपियन यूनियन ने गूगल पर प्रतिस्पर्धा नियम तोड़ने का दोषी पाते हुए उसपर 34 हजार करोड़ (5 अरब डॉलर) का जुर्माना लगाया था. यूरोपियन यूनियन की तरफ से किसी भी कंपनी पर लगाया गया ये अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना था.
  • गूगल पर आरोप था कि उसने सैमसंग, हुवावे समेत सभी स्मार्टफोन और टैबलेट बनाने वाली कंपनियों को गूगल सर्च इंजन और गूगल क्रोंम ब्राउजर प्री-इंस्टॉल करने के लिए मजबूर किया.

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