आयुष्मान भारत योजना के तहत फर्जी लाभार्थियों को पकड़ने के लिए होगा मेडिकल ऑडिट

नयी दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना आयुष्मान भारत में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सरकार ने कैच प्लान तैयार किया है. इसके लिए  केंद्र सरकार प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत लाभार्थियों का मेडिकल ऑडिट भी कराएगी. हालांकि ये ऑडिट अभी कुछ माह बाद शुरू होगा, लेकिन कहा जा रहा है कि ऑडिट के जरिए इस योजना का फर्जी तरीके से इस्तेमाल करने वाले लाभार्थी और अस्पताल पकड़ में आ सकेंगे. ऑडिट के जरिए बीमारी से लेकर अस्पताल तक की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी. इस ऑडिट में लाभार्थी से लेकर अस्पताल तक सभी शामिल होंगे.

23 सिंतबर को रांची से पूरे देश में लागू हुई इस योजना से एक माह के भीतर एक लाख मरीजों को अस्पतालों में उपचार मिला है. स्टेंट से लेकर बायपास सर्जरी, प्रसूति से लेकर न्यूरो और बाल रोग तक का उपचार मरीजों को मिला है.

सरकारी अस्पताल में हर डॉक्टर तक पहुंचेगा पैकेज
एम्स, सफदरजंग और आरएमएल जैसे अस्पतालों में सभी विभागों के डॉक्टरों को आयुष्मान भारत के पैकेज की जानकारी दी जाएगी ताकि मरीज के पहुंचने पर डॉक्टर को किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो. कुछ शिकायतें ऐसे देखने को मिल रही हैं जब एक मरीज को एक से ज्यादा पैकेज के तहत उपचार किया जाना है. ऐसे में डॉक्टर के आगे भी मुश्किल है.

अस्पताल में ही मिलेगी दवा, मरीज को नहीं जाना होगा बाहर
अक्सर अस्पतालों में दवाएं या जांच सुविधा उपलब्ध न होने के चलते मरीज को बाहरी दुकान या केंद्र पर भेजे जाने के मामले देखने को मिलते हैं. इसे लेकर आयुष्मान भारत में प्रावधान किया गया  है कि अगर कोई मरीज अस्पताल में इलाज के लिए जाता है वहां दवा या अन्य जरूरी जांच नहीं है तो इसका खर्च अस्पताल को ही देना होगा. बाद में क्लेम के साथ उसे वह राशि मिल जाएगी.


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