सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर पटाखों को चलाने की अनुमति दी; ये शर्तें माननी होंगी

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने “ग्रीन” पटाखों के उत्पादन एवं बिक्री की मंगलवार को अनुमति दी जिनसे देश भर में पर्यावरण को कम होगा. न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी की पीठ ने दीपावली और अन्य त्योहारों पर आतिशबाजी के लिए रात आठ बजे से रात 10 बजे तक का समय निर्धारित किया. उच्चतम न्यायालय ने फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइटों के, अनुमेय सीमा पार करने वाले पटाखे बेचने पर रोक भी लगा दी. शीर्ष न्यायालय का आदेश वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए देशभर में पटाखों के उत्पादन एवं बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली एक याचिका पर आया है.

शर्ते:

१. ऑनलाइन पटाखे नहीं ख़रीदे जायेंगे

२. कम एमिशन वाले पटाखे ही बेचे जा सकेंगे.

३. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश अन्य त्योहा

४. आदेश के पालन की जिम्मेवारी हर इलाके के SHO पर होगी. रों और शादी विवाह के अवसरों पर भी लागू होंगे.

५. रात को दो घंटे आठ बजे से दस बजे तक ही पटाखे छोड़े जायेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए हैं जिसमें कम एमिशन वाले पटाखों को ही इजाजत मिली है और सिर्फ लाइसेंसधारी वाले ही पटाखे बेचे जा सकेंगे. इसके साथ ही ऑनलाइन पटाखों की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है. कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन बेचने पर अवमानना माना जाएगा.  इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पटाखों की बिक्री से जुड़े ये निर्देश सभी त्योहारों तथा शादियों पर भी लागू होंगे. दीवाली के अवसर पर पटाखे रात को 8 बजे से 10 बजे के बीच ही चलाए जा सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, यह समयसीमा पूरे देश पर लागू होगी. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, इस आदेश पर अमल करने के लिए हर इलाके का SHO जवाबदेह होगा, और अगर आदेश का पालन नहीं हुआ, तो SHO को निजी तौर पर कोर्ट की अवमानना का दोषी माना जाएगा.

28 अगस्त को जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण ने दलील पूरी होने के बाद फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.  इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने देशभर में पटाखों की बिक्री पर बैन का विरोध किया. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा-पटाखों के उत्पादन को लेकर नियम बनाना बेहतर कदम है. एल्युमिनियम और बेरियम जैसी सामग्री का इस्तेमाल रोकना सही होगा. तमिलनाडु सरकार, पटाखा उत्पादकों और विक्रेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- बिना किसी ठोस वैज्ञानिक रिसर्च के कोर्ट ने पिछले  साल दिल्ली में पटाखों की बिक्री रोक दी थी. इससे लाखों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ. प्रदूषण के लिए पटाखों से ज्यादा कई अन्य चीजें जिम्मेदार हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर भी गौर किया कि वायु प्रदूषण शिशुओं के लिए बेहद खतरनाक है और जहरीले पटाखे जलाए जाने से हवा की विषाक्तता बढ़ जाती है.

 


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