पिछले चार वर्षों में चीन से भारत में FDI निवेश लगातार गिरता हुआ

नयी दिल्ली: सरकार की ओर से लगातार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment) के बेहतर होने का दावा किए जाने के बीच भारत के पड़ोसी देश चीन से पूंजी की आवक में पिछले 4 साल से कमी हो रही है.

वाणिज्य विभाग की ओर से हाल में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 2014-15 में चीन से 49.4 करोड़ डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया था, उसी वर्ष केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार ने कार्यभार संभाला था. उससे अगले वर्ष ही चीन से प्राप्त एफडीआई का आंकड़ा फिसलकर 46.1 करोड़ डॉलर रह गया. उसके बाद से यह गिरावट जारी है और 2016-17 में यह 27.7 करोड़ डॉलर और 2017-18 के अप्रैल-दिसंबर में यह और अधिक घटकर 14.1 करोड़ डॉलर पर आ गया.

जहां रिपोर्ट में इस सिकुड़ते आंकड़े के पीछे की वजह चीन की ओर से लगाए गए सख्त शर्तों को बताया गया है, वहीं चीन से बाहर जाने वाला एफडीआई 2016-17 में 101 अरब डॉलर के उल्लेखनीय उच्च स्तर पर रहा. वहीं भारत भी इस बीच निवेश का आकर्षक गंतव्य बना हुआ है. भारत ने 2016-17 में अन्य ठिकानों से 43 अरब डॉलर का एफडीआई हासिल किया जो कि पिछले वर्ष से अधिक है.

औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि अब चीन से आने वाली एफडीआई में इजाफा होगा क्योंकि चीनी निवेशक देश भर की कुछ परियोजनाओं में भारी पूंजी निवेश को लेकर नजर बनाए हुए हैं. ज्यादातर राशि डिजिटल क्षेत्र में निवेश की जाएगी.’

समेकित डीआईपीपी आंकड़ों के मुताबिक कुल मिलाकर चीन से संचयी प्रत्यक्ष निवेश जून 2018 तक महज 2.05 अरब डॉलर रहा. इस राशि के साथ चीन भारत में 18वां सबसे बड़ा प्रत्यक्ष निवेश पोर्टफोलियो वाला देश रहा. दिलचस्प है कि यह आंकड़ा करीब 2.7 अरब डॉलर निवेश करने वाले इटली या लग्जमबर्ग जैसे छोटे से देश से भी कम है.

चीनी सरकार ने भारत से चीनी कंपनियों के लिए और अधिक औद्योगिक पार्क आवंटित करने के साथ ही निवेश समझौते पर तेजी से बातचीत करने के लिए कहा है. कई औद्योगिक पार्कों को विकसित करने को लेकर चीन की होल्डिंग कंपनियों की गुजरात, महाराष्ट्र और हरियाणा के साथ समझौते होने के बावजूद इस मामले में जमीन पर मामूली प्रगति हुई है और केवल दो पार्क ही खोले गए हैं. 

 


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