#BirthAnniversary: भारत में परमाणु कार्यक्रम के जनक भाभा जिनकी जान के पीछे CIA पड़ी थी

24 नवंबर 1966 को फ्रांस के माउंट ब्‍लैंक के ऊपर  एक विमान क्रैश हुआ और इसमें मौजूद सभी 117 यात्री मारे गए. मृत यात्रियों की लिस्ट में एक नाम था भारत के एटॉमिक साइंटिस्ट डॉक्‍टर होमी जहांगीर भाभा का. परमाणु ऊर्जा के जनक भाभा की मौत खबर सुनकर पूरा देश सकते में आ गया. ऐसा कहा जाता है कि भाभा की मौत के पीछे अमेरिका की खुफिया एजेंसी का हाथ है.

भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना


भाभा ने ही भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी. उन्होने मुट्ठी भर वैज्ञानिकों की सहायता से मार्च 1944 में न्‍यूक्लियर एनर्जी पर रिसर्च प्रोग्राम शुरू किया था. उन्होंने न्‍यूक्लियर साइंस पर तब काम करना शुरू किया था जब दुनिया को एटॉमिक एनर्जी के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के बारे में कम ही जानकारी थी. भाभा को “Architect of Atomic Energy program in India’ भी कहा जाता है.

30 अक्टूबर 1909 को पारसी परिवार में  जन्मे  भाभा असाधारण रूप से बुद्धिमान थे. वे 1947 में भारत सरकार द्वारा गठित परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रथम अध्यक्ष नियुक्त हुए. 1953 में जेनेवा में अनुष्ठित विश्व परमाणुविक वैज्ञानिकों के महासम्मेलन में उन्होंने सभापतित्व किया. भाभा 1950 से 1966 तक परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष थे, तब वो भारत सरकार के सचिव भी हुआ करते थे. वो कभी भी अपने चपरासी को अपना ब्रीफ़केस उठाने नहीं देते थे.

जब विमान यहां पर 24 जनवरी 1966 को दुर्घटनाग्रस्‍त हुआ था उसमें भारत के महान वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा सवार थे.  वह इस विमान में वियना एक कांफ्रेंस में हिस्‍सा लेने जा रहे थे. इस विमान में उस वक्‍त 117 यात्री सवार थे. भारत को इस विमान दुर्घटना से गहरा धक्‍का लगा था। लेकिन इस विमान हादसे के पीछे दो तरह की बातें कही जा रही हैं.

एक थ्‍योरी के मुताबिक विमान का पायलट उस वक्‍त जिनेवा एयरपोर्ट को अपनी सही पॉजीशन बताने में नाकाम रहा था और विमान दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया था. लेकिन दूसरी थ्‍योरी के मुताबिक यह विमान एक हादसे का नहीं बल्कि एक षड़यंत्र के तहत बम से उड़ाया गया था. इस विमान को दुर्घटनाग्रस्‍त करने के पीछे अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए का हाथ था.  इसकी वजह भारत के परमाणु कार्यक्रम को पटरी से उतारना था.

अक्टूबर 1965 में भाभा ने ऑल इंडिया रेडियो से घोषणा की थी कि अगर उन्हें छूट मिले तो भारत 18 महीनों में परमाणु बम बनाकर दिखा सकता है. वह मानते थे और काफी आश्‍वस्‍त भी थे कि अगर भारत को ताकतवर बनना है तो ऊर्जा, कृषि और मेडिसिन जैसे क्षेत्रों के लिए शांतिपूर्ण नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम शुरू करना होगा. इसके अलावा भाभा यह भी चाहते थे कि देश की सुरक्षा के लिए परमाणु बम भी बने. भाभा के ऐसे दावे जाहिर है कि दुनिया की शीर्ष आणविक ताकत अमेरिका की नींद उड़ाने के लिए काफी थे.

 

सीआईए अधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी 

एक न्यूज़ वेबसाइट की रिपोर्ट में अब होमी जहांगीर भाभा से जुड़ी यह जानकारी सामने आ रही है. इस वेबसाइट ने 11 जुलाई 2008 को पत्रकार ग्रेगरी डगलस और सीआईए के अधिकारी रॉबर्ट टी क्राओली के बीच हुई कथित बातचीत को फिर से पेश किया है. इस बातचीत में सीआईए अधिकारी रॉबर्ट के हवाले से कहा गया है, ‘हमारे सामने समस्या थी. भारत ने 60 के दशक में आगे बढ़ते हुए परमाणु बम पर काम शुरू कर दिया था. उन्‍होंने इस बातचीत में रूस का भी जिक्र किया है जो भारत की मदद कर रहा था. भाभा का उल्लेख करते हुए सीआईए अधिकारी ने कहा, ‘मुझपर भरोसा करो, वह खतरनाक थे। उनके साथ एक दुर्भाग्यपूर्ण ऐक्सिडेंट हुआ. वह परेशानी को और अधिक बढ़ाने के लिए वियना की उड़ान में थे, तभी उनके बोइंग 707 के कार्गो में रखे बम में विस्फोट हो गया.

 


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