तमाम मौजूदा परेशानियों के बावजूद तेज प्रताप राजद का भविष्य हो सकते हैं, बशर्ते…

राजद सुप्रीमो के परिवार में चीजें सँभलने के बजाय बिगडती जा रही हैं. तेज प्रताप जब लालू से मिलने रांची गए, तो पिता ने पुत्र को समझाने की भरसक कोशिश की: बबुआ मान जा. इलेक्शन के समय बा, बहुत बदनामी होई. जवाब में तेजप्रताप बोले-उसके साथ नहीं रहना है मुझे. लालू प्रसाद लगातार समझाने-मनाने की कोशिश करते रहे लेकिन तेजप्रताप चुपचाप उनकी बातें सुनते रहे. कोई नतीजा नहीं निकलता देख लालू प्रसाद ने भी हथियार डाल दिए. कहा-जा हम आईब त बात होई. तेजप्रताप के करीबी मित्र अभिनंदन बताते हैं कि सुलह की कोशिश हो रही है और उन्हें इस बात का भरोसा है कि जल्द हीं सबकुछ सामान्य हो जाएगा पर तेजप्रताप ने पूरे परिवार पर आरोप लगाया है कि कोई मेरी बात नहीं सुन रहा है. उन्होंने कहा कि पापा ने मेरी बात नहीं सुनी, अब मैं भी उनकी बात नहीं मानूंगा. पापा ने कहा है कि घर आकर इस मामले में बात करेंगे. लेकिन, वो कब आएंगे, उन्हें कब जमानत मिलेगी कोई ठीक नहीं है. इसमें बहुत वक्त लगेगा, मैं कोर्ट में अपनी बात रखूंगा और मैं इस मामले में अब किसी की भी बात नहीं मानूंगा, मेरा फैसला अडिग है.

तेजप्रताप ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मेरी पत्नी एेश्वर्या से मेरी पिछले दो महीने से कोई बातचीत नहीं हुई. वो मेरे साथ नहीं रहती और जब मैंने तलाक की अर्जी दी तो वो अपने माता-पिता के साथ मेरे घर अचानक पहुंच गई लेकिन, मेरे परिवार वालों को अभी मेरा साथ देना चाहिेए तो सब उसका साथ दे रहे हैं. मुझे समझाने की कोशिश में लगे हैं। लेकिन, अब मैं अपनी लड़ाई अकेले ही लड़ूंगा.

परिवार वालों के अलावा तेज प्रताप तीन और लोगों से बेहद नाराज हैं:

परिवारवालों के अलावा तीन और लोग हैं, जिनसे तेज प्रताप यादव बेहद नाराज हैं. एक शख्‍स का नाम है- ओम प्रकाश यादव उर्फ भुट्टू. भुट्टू तेज प्रताप के ममेरे भाई हैं.दूसरे का नाम है- नागमणि. ये भी तेज प्रताप के ममेरे भाई है. तीसरे शख्‍स का नाम है- बिपिन.

ओम प्रकाश यादव उर्फ भुट्टू और नागमणि के बारे में तेज प्रताप कहते हैं, ‘मेरे माता-पिता मुझसे ज्‍यादा ओमप्रकाश और नागमणि की बात मानते थे. इन दोनों ने मेरे माता-पिता के साथ ही भाई तेजस्‍वी को विश्वास में लेने के बाद सारा खेल रखा. मुझे मेरे ही परिवार में किसी के कहने पर मोहरा बनाया गया.’ जुलाई में भी ओम प्रकाश पर लगाए थे तेज प्रताप ने आरोप और कहा था कि ओम प्रकाश उन्‍हें जोरू का गुलाम कहते हैं हालांकि, बाद में तेज प्रताप ने यह पोस्‍ट डिलीट कर दी थी और कह दिया था कि अकाउंट हैक हो गया था.

बिपिन तेज प्रताप के ससुर चंद्रिका राय के पर्सनल असिस्टेंट और उनके रिश्तेदार हैं. तेज प्रताप और ऐश्वर्या की शादी में बिपिन ने बड़ी भूमिका निभाई थी. बिपिन से भी तेज प्रताप खासे नाराज हैं.

पर तमाम दिक्कतों के बावजूद तेज प्रताप का राजनीतिक भविष्य है:

पर तमाम व्यक्तिगत दिक्कतों के बावजूद तेज प्रताप की स्थिति उतनी विकट नहीं लगती. बशर्ते वे अपने दिल के बजाय दिमाग से काम लें. उन्हें फिलहाल सारे उपलब्ध विकल्पों पर ठन्डे दिमाग से सोचना होगा. राजद सुप्रीमो चुनाव से बाहर हैं और ऐसा लग रहा है कि पहली बार राजद को लालू यादव के बगैर चुनाव में उतरना होगा. दूसरी तरफ, मीसा भारती और तेजस्वी यादव पर बेनामी संपत्ति के केस चल रहे हैं.  एक हजार करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति मामले में आयकर विभाग ने लालू यादव के परिवार की करीब 175 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है. इसमें दिल्ली के बिजवास क्षेत्र में स्थिति फार्म हाउस और डिफेंस कॉलोनी स्थित एक कोठी भी शामिल है. कुर्क संपत्ति का बाजार मूल्य 175 करोड़ रुपये बताया गया है जबकि बुक वैल्यू 9.32 करोड़ रुपये है. एन्फोर्समेंट डिपार्टमेंट ने लालू परिवार से जुड़े एक हजार करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति के मामले में 22 ठिकानों पर राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रो में छापेमारी और सर्वे किया  है और जो सपंत्ति कुर्क की गई है उन पर भी छापेमारी हुई है. ऐसे में परिवार पर दबाब बहुत ज्यादा है.

IRCTC घोटाले में तेजस्वी नामज़द:

ईडी का आरोप है कि पुरी और रांची स्थित रेलवे के दो होटलों के अधिकारों के सब-लीज कोचर के स्वामित्व वाली मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड को दिए जाने में प्रसाद और आईआरसीटीसी के अधिकारियों ने अपने पदों का दुरूपयोग किया. होटल के सब-लीज के बदले पटना के एक प्रमुख स्थान की 358 डेसिमल जमीन फरवरी 2005 में मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (राजद सांसद पी.सी.गुप्ता के परिवार के स्वामित्व वाली कंपनी) को दे दी गई थी.  उस वक्त के सर्किल दरों से काफी कम दर पर यह जमीन कंपनी को दी गई थी.  ईडी ने आरोप-पत्र में कहा है, ‘काफी महंगी जमीन से लैस वह कंपनी धीरे-धीरे राबड़ी देवी और तेजस्वी को ट्रांसफर कर दी गई.  बहुत ही मामूली कीमत पर शेयर खरीद कर ऐसा किया गया. ’

एजेंसी ने कहा, ‘जमीन हासिल करने के लिए इस्तेमाल में लाई गई धनराशि संदिग्ध स्रोत से आई थी और मेसर्स अभिषेक फाइनांस कंपनी लिमिटेड नाम की एक एनबीएफसी का इस्तेमाल करके पी.सी. गुप्ता से जुड़ी कंपनियों के जरिए उसका धनशोधन किया गया था. ’ इसके बाद राबड़ी देवी और तेजस्वी ने उचित बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर मेसर्स डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के शेयर खरीदे थे.  आरोप-पत्र के मुताबिक, ‘यह गौर करने लायक है कि राबड़ी देवी की ओर से शेयरों की खरीद के लिए इस्तेमाल किए गए धन सवालों के घेरे में हैं और तेजस्वी ने जिनसे शेयर खरीदे, उन्होंने वह शेयर अपने पास होने से इनकार किया है. ’ ईडी ने कहा कि उसने इस मामले में अब तक 44 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति कुर्क की है.  सीबीआई ने भी कुछ समय पहले इस मामले में एक आरोप-पत्र दायर किया था.

दानापुर में बन रहा बिहार का सबसे बड़ा मॉल भी तेजस्वी के गले की फांस बन गया है: 

पटना के बेली रोड स्थित लालू परिवार के निर्माणाधीन मॉल को प्रवर्तन निदेशालय ने सील कर दिया। इससे पहले केंद्र सरकार ने लालू यादव परिवार के बन रहे इस चर्चित मॉल के निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी।

 लालू यादव के परिवार के निर्माणाधान मॉल को प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) ने सीज कर दिया. यह मॉल पटना के बेली रोड पर डिलाइट मार्केटिंग कंपनी बनवा रही है. इसकी लागत करीब 750 करोड़ बताई जाती है. साथ ही इसे बिहार का सबसे बड़ा मॉल भी कहा जाता है. पिछले साल उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने इसके निर्माण पर सवाल उठाए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे टेंडर घोटाले के एवज में लालू यादव और उनके परिवार ने 2 एकड़ जमीन हासिल की थी. आज इसी पर मॉल बनाया जा रहा है.

सुशील मोदी के मुताबिक, 2006 में रेल मंत्री रहते हुए लालू ने रांची और पुरी में रेलवे के दो होटल गलत तरीके से कारोबारी हर्ष कोचर को दिए थे. बदले में पटना में 200 करोड़ रुपए कीमत की 2 एकड़ से ज्यादा जमीन बेनामी तरीके से डिलाइट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम कराई. तब कंपनी का मालिकाना हक राजद सांसद प्रेम चंद्र गुप्ता की पत्नी के पास था. इसी जमीन पर पटना में मॉल बनाया जा रहा है. उन्होंने मिट्टी घोटाले का भी  आरोप लगाया. मोदी ने दावा किया कि मॉल बनाने के लिए खोदी गई मिट्टी गलत तरीके से संजय गांधी जैविक उद्यान को 90 लाख में बेची गई. इसके लिए सौंदर्यीकरण की गैरजरूरी योजना तैयार हुई.

सीबीआई ने कहा था कि 2014 में लालू के बेटे तेजप्रताप, तेजस्वी, बेटी चंदा और रागिनी को डिलाइट मार्केटिंग में डायरेक्टर बनाया गया. नवंबर, 2016 को कंपनी का नाम बदलकर लारा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया. ला मतलब लालू, रा यानी राबड़ी. प्रोजेक्ट का नाम बदलते ही जमीन पर लालू के परिवार का मालिकाना हक हो गया. 14 फरवरी, 2017 से राबड़ी देवी, तेज प्रताप और तेजस्वी को इसका डायरेक्टर बनाया गया था. यह जमीन कभी मशहूर होटल व्यवसायी विनय कोचर व विजय कोचर की थी. जिसे कोचर बंधुओं ने राजद के राज्यसभा सदस्य प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता की कंपनी डिलाइट मार्केटिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को मात्र 65 लाख रुपये में दे दी थी. बाद में सरला गुप्ता की कंपनी डिलाइट मार्केटिंग ने इस जमीन को लालू प्रसाद के परिजनों की कंपनी लारा प्रोजेक्ट लिमिटेड के नाम लिख दी.

बन रहा था सूबे का बड़ा मॉल
बेली रोड स्थित यह जमीन पूर्व सीएम राबड़ी देवी, उनके बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव और छोटे पुत्र तेजस्वी यादव के नाम पर है. जमीन पर बिहार का सबसे बड़ा मॉल बन रहा था. इस जमीन का सर्किल रेट 44.7 करोड़ रुपए है लेकिन इसे लालू यादव की कंपनी लारा प्रोजेक्ट ने वर्ष 2005-06 में महज 65 लाख रुपए में खरीदी थी.

अब ऐसे में साफ़ है कि लालू परिवार में तेजस्वी और मीसा के ऊपर बेनामी सम्पत्ति के मामले हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह के मामलों में साफ़ कहा है.

सजा याफ्ता नेताओं के चुनाव लड़ने के मामले में क्या है सुप्रीम कोर्ट का निर्णय?

शीर्ष अदालत ने 10 जुलाई को अपने फैसले में कहा था कि आपराधिक मामले में दो साल या इससे अधिक अवधि की सजा पाने वाले सांसद या विधायक तत्काल प्रभाव से सदन की सदस्यता के अयोग्य होंगे और एक व्यक्ति यदि जेल में या पुलिस हिरासत में है तो वह विधायी संस्था का चुनाव नहीं लड़ सकता है.

न्यायालय ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8(4) को असंवैधानिक घोषित कर दिया था. यह धारा कहती है कि सजा पाने वाला निर्वाचित प्रतिनिधि अपने पद पर बना रह सकता है बशर्ते उसने तीन महीने के भीतर उपरी अदालत में इस निर्णय को चुनौती दे दी है.

 मीसा भारती ने दोनों भाईयों के बीच मनमुटाव की बात स्वीकार की है:  

पार्टी की सांसद और लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती ने माना है कि हमारे परिवार में भाई-भाई में मनमुटाव है. मीसा भारती ने पटना के पास मनेर में पार्टी कार्यकर्ताओं को रविवार को सम्बोधित किया. वहां उन्होंने कहा कि उनके भाइयों में मनमुटाव है लेकिन राष्ट्रीय जनता दल बहुत बड़ा परिवार है. थोड़ा बहुत मनमुटाव किसमें नहीं होता, हाथ की पांचों अंगुलियां बराबर नहीं होतीं.

मीसा की अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं. पर फिलहाल तेजस्वी के उदय होने और लालू यादव के वरद हस्त होने के चलते मीसा और उनके पति  शैलेश लोक सभा में अपने लिए संभावनाएं तलाश रहे हैं. पर छपरा सीट को लेकर पेंच फंसा हुआ है. छपरा सीट तेजप्रताप की पत्नी ऐश्वर्या अपने पिता चंद्रिका राय के लिए मांग रही हैं. ऐसे में परिवार में अदावत बढ़ रही है.

ऐसे में तेज प्रताप क्या करें? 

इन परिस्थितियों में, खासकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में तेज प्रताप के बाद विकल्प की कमी नहीं है. उन्हें समझना होगा कि राजनीति खून के सम्बन्ध नहीं समझती और न  यहाँ दिल से फैसले लिए जाते हैं. ऐसे में अगर तेजस्वी और मीसा के खिलाफ केस का फैसला आ गया तो इस बात की भी संभावना है कि दोनों चुनाव के लिए कहीं अनुपयुक्त न ठहरा दिए जाए. पिता पहले से चुनावी मैदान से बाहर हैं. और माँ राबरी देवी की उम्र हो चली है. ऐसी परिस्थितियों में राजद नेतृत्व विहीन हो सकता है.  तेज प्रताप लालू परिवार में एकमात्र व्यक्ति हैं, जिन पर फिलहाल केस नहीं हैं. उनमे अपने पिता की तरह आम जनता से जुड़ने की क्षमता है; वे मीडिया हाउसेस को नचाने की क्षमता रखते हैं. ऐसे में उन्हें अपने व्यक्तिगत संबंधों को पीछे करके अपने समर्थकों का ग्रुप खड़ा करने पर ध्यान देना चाहिए. इस काम में उनके ससुराल वाले काफी मददगार साबित हो सकते हैं. ससुराल के लोगों का लंबा राजनीतिक अनुभव है और फिर पत्नी भी पढ़ी लिखी है. जो उनके राजनीतिक करियर में मददगार साबित हो सकती हैं.

ऐसे में अगर परिस्थितियों ने करवट ली और तेज प्रताप अपने दिल दिमाग पर काबू रख पाए, तो आश्चर्य नहीं होगा अगर वे आने वाले वक़्त में राजद का नेतृत्व करते दिखें.

 


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