तीन साल के विवाद के बाद गोवा में पादरी की लाश को दफनाया गया

पंजिम: पादरी से सामाजिक कार्यकर्ता बने एफआर बिसमारक्यू डायस को उनकी मौत के तीन साल बाद आखिरकार रविवार को उनके पुरखों के कब्रिस्तान में दफना दिया गया. डायस का शव 2015 में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था. रविवार को आखिरकार उनके परिजन शव को दफनाने पर सहमत हो गए और इसके बाद डायस को सेंट एस्तेवम गांव के कब्रिस्तान में दफना दिया गया. 52 साल के डायस का शव उत्तरी गोवा में पणजी से करीब 20 किलोमीटर दूर 5 नवंबर, 2015 की रात को मांडोवी नदी में मिला था.

उनके परिजनों ने हत्या की आशंक जताई थी, लेकिन क्राइम ब्रांच ने डूबने के कारण मौत होने की बात कही थी. क्राइम ब्रांच की बात का विरोध किया जा रहा था, क्योंकि डायस बेहद अच्छे तैराक थे.  उनकी हत्या की आशंका इसलिए भी जताई गई थी, क्योंकि उन्होंने उत्तरी गोवा के तेरेखोल गांव में एक सेवन स्टार होटल के गोल्फ कोर्स प्रोजेक्ट का विरोध किया था और उसके खिलाफ आंदोलन चला रहे थे.

परिजनों ने उनकी मौत की सही जांच करने की मांग करते हुए शव लेने से इनकार कर दिया था. पादरी का शव गोवा मेडिकल कॉलेज के शवगृह में संरक्षित किया गया था. मंगलवार को डायस के पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि परिजनों ने आखिरकार उन्हें दफनाने पर सहमति जता दी और इसके बाद 4 नवंबर को 100 से ज्यादा लोगों की मौजूदगी में शव दफनाने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई.


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