एनडीए में सीट शेयरिंग का दावा हवा हवाई है: लोजपा

पटना: लोक सभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, पर ऐसा लग रहा है कि बिहार एनडीए में सीटों को लेकर समझौता अपने अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंचा है. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के दिल्ली में भेंट के बाद प्रेस कांफ्रेंस में इस बात की घोषणा की गयी थी कि जदयू और भाजपा दोनों 17 -17 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, और बाकी सीटों पर लोजपा और रालोसपा. पर पिछली बार छह  लोक सभा सीट जीतने वाली लोजपा और तीन लोक सभा सीट जीतने वाली पार्टी रालोसपा इस नए अरेंजमेंट को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रही है. दोनों दलों का दावा है कि पिछले चुनाव के समय से उनका जनाधार बढ़ा है. उन्हें इस बात से भी दिक्कत है कि पिछले चुनाव में महज़ दो सीट जीतने वाली पार्टी जदयू को क्यों 17 सीट दिए जा रहे हैं. ऐसे में दोनों दलों के नेता अपनी आवाज पूरी ताकत के साथ उठा रहे हैं. फिलहाल पूरा बिहार छठ के त्यौहार में व्यस्त है, पर ये स्पष्ट है कि छठ के बाद बिहार में राजनीतिक सरगर्मी तेजी से बढ़ेगी. अभी एनडीए में सीट शेयरिंग पर काफी चर्चा होनी बाकी है. महागठबंधन की पार्टियां भी इस डेवलपमेंट पर अपनी नज़र लगाए हुए हैं. पर उनकी भी अपनी दिक्कत है. कांग्रेस ने भी महागठबंधन में रालोसपा को ज्यादा सीटें देने के प्रस्ताव का विरोध किया है.

पिछले लोक सभा चुनाव में बिहार एनडीए में भाजपा के अलावा रालोसपा और लोजपा थी. इस बार जदयू के एनडीए के हिस्सा बन जाने से चार दल हो गए हैं, और सीट शेयरिंग का संकट सुलझ नहीं रहा.

लोक जनशक्ति पार्टी ने एनडीए में सीट शेयरिंग हो जाने के दावे को हवा-हवाई करार दिया है. गुरुवार को लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पशु व मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस ने कहा कि सीट शेयरिंग को लेकर अभी सिर्फ अटकलें लगाई जा रही हैं. जमीन पर कुछ भी नहीं है. जब तक भाजपा, जदयू, लोजपा और आरएलएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष एक साथ नहीं बैठते हैं तबतक सीटों पर समझौते की बात करना भी बेमानी है.

पशुपति पारस ने कहा कि 2014 के मुकाबले बिहार में लोजपा का जनाधार बढ़ा है. लिहाजा हमारी भागीदारी पिछली बार से ज्यादा होनी चाहिए. हम सिर्फ 7 सीटों पर नहीं मानने वाले हैं. हमें अधिक सीटें मिलनी ही चाहिए. पारस ने कहा कि लोक आस्था के महापर्व छठ के बाद सारे मसले सुलझा लिए जाएंगे.


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