छात्र राजनीति की नर्सरी से निकलकर देश की राजनीति को प्रभावित करने वाले राजनेता

छात्र राजनीति को राजनीति की नर्सरी कहा जाता है क्योंकि इसी दौर में छात्र राजनेता राजनीति का ककहरा सीखते हैं. वोट के लिए कैसे छात्रों से सम्पर्क किया जाए, चुनाव अभियान कैसे चलाया जाए, राजनेताओं से कैसे बात की जाए, छात्रों की किन समस्यायों को उठाया जाए और विश्विद्यालय प्रशासन से कैसे बात की जाए, तमाम पहलुओं की जानकारी उन्हें इसी दौर में मिलती हैं. इस दौर में मिली सीख उन्हें जीवन भर मार्गदर्शन देती है. भारत की छात्र राजनीति ने कई ऐसे राजनेताओं को जन्म दिया है, जिन्होंने आगे चलकर देश की राजनीति को प्रभावित किया है. उनमे से कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

लालू यादव:

बिहार के सफलतम छात्र नेताओं में एक. पटना विश्विद्यालय में लॉ की पढाई करते हुए पटना विश्विद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष बने. 1973 में फिर छात्र संघ का चुनाव लड़ा और सफल रहे. जेपी आन्दोलन के चर्चित चेहरों में एक. छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष भी रहे. 1990-97 के बिहार के मुख्यमंत्री रहे. और यूपीए सरकार में 2004-2009 तक रेल मंत्रालय संभाल चुके हैं. वर्तमान में राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

नीतीश कुमार:

जेपी आन्दोलन और छात्र संघर्ष समिति के सक्रिय कार्यकर्ता और छात्र राजनीति में उभरने वाले चर्चित चेहरों में से एक हैं. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए छात्र नेता के रूप में उभरे और बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र संघ के अध्यक्ष बने. 1975-77 तक आपातकाल के चलते जेल जाना पड़ा. 1985में लोक दल से विधायक चुने गए और 1989 से  छह बार लोक सभा चुनाव जीत चुके हैं. भूतपूर्व प्रधानमंत्री वाजपयी की सरकार में रेल और कृषिं मंत्री रह चुके हैं. 2005 से लगातार बिहार के मुख्यमंत्री हैं. वर्तमान में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

रविशंकर प्रसाद:

वर्तमान केन्द्र सरकार में कानून मंत्री और देश के जाने माने वकील रवि शंकर प्रसाद बिहार के चर्चित छात्र नेताओं में से एक हैं और उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत इंदिरा गाँधी की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में एक छात्र नेता के रूप में की. जेपी के नेतृत्व में उन्होंने बिहार के छात्र आन्दोलन का नेतृत्व किया और जेल भी गए. वे पटना विश्विद्यालय छात्र संघ के सहायक महासचिव और विश्विद्यालय की सीनेट कमिटी  व वित्त समिति के सदस्य रह चुके हैं. वे कई वर्षों तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़े रहे हैं.

सीताराम युचुरी: 

छात्र संगठन एसएफआई के पहले ऐसे अध्यक्ष जो केरल या पश्चिम बंगाल से नहीं हैं. येचुरी तीन बार JNU छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं. इनका जन्म हैदराबाद में हुआ था और 1974 के एसेफआई से जुड़े थे. 1985 में सीपीएम की सेंट्रल समिति और 1992 ने पोलित ब्यूरो में चुने गये. 2005 से लगातार येचुरी राज्यसभा सांसद हैं. वर्तमान में वे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव हैं, जो निर्विरोध चुने गये थे.

ममता बनर्जी:

तेज तर्रार महिला के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली ममता बनर्जी 1970 में कांग्रेस के छात्र संगठन से जुड़ीं. इंदिरा गाँधी की ह्त्या के बाद 1984 में जादव पुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ीं और दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी को हराया. पूर्व प्रधानमंत्री राजिव गांधी के कार्यकाल में पश्चिम बंगाल यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष और नरसिंह राव की सरकार में मानव संसाधन मंत्री रहीं. 1997 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस नाम की पार्टी बना लीं और2011 से लगातार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं.

अरुण जेटली:

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील रह चुके अरुण जेटली जेपी आन्दोलन के सक्रीय छात्र नेता थे. वे जेपी आन्दोलन में छात्र संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं. आपातकाल के दौरान वह डेढ़ वर्ष तक जेल में रह चुके हैं. एनडीए सरकार में वे कानून मंत्रालय संभाल चुके हैं. पांच वर्ष तक बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव रहने के पश्चात् राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे. 2014 से केंद्र में उन्होंने वित्त मंत्रालय संभाल रखा है.

प्रफुल्ल कुमार महंत:

अखिल असम छात्र संघ से जुड़े और 1979 में उसके अध्यक्ष बनाए गए. गैर असमिया लोगों के खिलाफ आन्दोलन में प्रभावी नेता के तौर पर उभरे और1985 में असम समझौते पर राजीव गांधी के साथ हस्ताक्षर किये. 1985 में ही असम गण परिषद् बना और विधान सभा चुनाव जीतने के बाद असम के मुख्यमंत्री बने. देश के सबसे युवा मुख्यमंत्रियों में एक. वर्तमान में असम विधान सभा के सदस्य हैं.

सुषमा स्वराज: 

1970 के दशक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की हरियाणा इकाई से जुड़कर राजनीतिक करियर की शुरुआत की. 1990 में पहली बार राज्य सभा सांसद बनीं. फिर 1996 में दक्षिण दिल्ली से लोक सभा चुनाव जीतने के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री और केंद्र में सूचना प्रसारण, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री बन चुकी हैं. इसके बाद स्वराज लोकसभा में विपक्ष की नेता और वर्तमान में केंद्र सरकार में विदेश मंत्रालय संभाल रही हैं.

अजय माकन: 

राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले अजय माकन 1985में दिल्ली विश्विद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष बने. वे दिल्ली ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. 1993, 1998 और 2003 में लगातार तीन बार विधायक बने और 2004 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीते. फिर यूपीए सरकार में खेल और गृह राज्य मंत्री भी रह चुके हैं. दिल्ली कांग्रेस के प्रमुख नेता होने के साथ 2015 में दिल्ली चुनाव में कांग्रेस की अध्यक्षता भी की.

 


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