कौन हैं तृप्ति देसाई जो सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर संघर्ष कर रही हैं

महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई शुक्रवार को 800 साल पुराने सबरीमला मंदिर के दर्शन करने के लिए पहुँची थीं. लेकिन अपने समर्थकों के साथ वो घंटों तक कोच्चि हवाई अड्डे पर ही फंसी रहीं और आख़िर में उन्हें पुणे वापस लौटने का फ़ैसला करना पड़ा. श्रद्धालुओं ने हवाई अड्डे से बाहर निकलने के रास्ते को बंद कर दिये थे ताकि तृप्ति और दूसरी महिलाएं सबरीमला के लिए न निकल सकें.

तृप्ति को सबरीमला मंदिर में प्रवेश करने से रोक रहे श्रद्धालुओं का विशवास है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं इसलिए उनके मंदिर में मासिक धर्म के उम्र वाली कोई महिला प्रवेश न करे. सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाज़त दे दी थी.  पर सुप्रीम कोर्ट अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार के लिए तैयार हो गया है.

कौन हैं तृप्ति देसाई:

कर्नाटक के बेल्जियम जिले के निपानी तलुका में जन्मीं तृप्ति की स्कूलिंग पुणे के विद्या विकास विद्यालय से हुई. आठ साल की उम्र में परिवार के साथ कोल्हापुर से पुणे शिफ्ट हुई. उन्होंने मुंबई की SNDT महिला यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन में दाखिला लिया. लेकिन ग्रेजुएशन के पहले ही साल में कुछ पारिवारिक कारणों से कॉलेज छोड़ना पड़ा. इसके बाद में संस्था ‘क्रांतीवीर झोपड़ी विकास संघ’ की प्रेज़ीडेंट बनीं. इस दौरान वे स्लम इलाकों पर काम करती थीं.

वे पहली बार 2007 में लाइम लाइट में तब आईं, जब उन्होंने ‘अजीत को-ओपरेटिव बैंक’ के चेयरमैन अजीत पवार पर 50 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप लगाया. इसके बाद वे 2012 के सिविक इलेक्शन में बालाजी नगर वार्ड से बतौर कांग्रेस कैंडिडेट खड़ी हुई.

2010 में उन्होंने भूमाता ब्रिगेड की स्थापना की. उसके बाद से वे धार्मिक जगहों पर महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटवाने के लिए जानी जाने लगीं. उनकी संस्था की शाखाएं अहमदनगर, नासिक और शोलापुर में भी हैं. इस संस्था से 5000 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं.  सहारा समय की पत्रकार प्रतिभा चंद्रन के मुताबिक ये संस्था किसानों की पत्नियों की मदद के उद्देश्य से बनाई गई थी. शुरुआत में इस संस्था का मंदिर प्रवेश आंदोलन से कोई संबंध नहीं था.

पुणे के पत्रकार अश्विनी सातव बताती हैं कि तृप्ति अन्ना हज़ारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से भी जुड़ी रही हैं. बाद में वो बुधाजीराव मुड़िक की भूमाता ब्रिगेड नाम की संस्था से जुड़ गईं.

तृप्ति बाद में मुड़िक की संस्था से अलग हो गईं और 2010 में अपनी भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड शुरू कर दी.  तृप्ति उस संस्था से तो अलग हो गईं लेकिन उसका नाम अपने साथ जोड़ लिया. इस नई संस्था के ज़रिए ही वो मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश के लिए लड़ती हैं. तृप्ति के भूमाता ब्रिगेड संस्था का मुख्यालय मुंबई में है. भूमाता ब्रिगेड की शाखाएं अहमदनगर, नासिक और शोलापुर में भी हैं. इस संस्था से 5000 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं.

तृप्ति देसाई राष्ट्रीय मीडिया में पहली बार तब आईं जब उन्होंने साल 2016 में महाराष्ट्र के चर्चित शनि शिंगणापुर मंदिर के मुख्यस्थान तक महिलाओं के प्रवेश पर रोक के मुद्दे पर प्रदर्शन किए. शनि शिंगणापुर मंदिर में प्रवेश की मांग को लेकर महिला अधिकार कार्यकर्ता विद्या बाल और अधिवक्ता नीलिमा वर्तक ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसी पर फ़ैसला करते हुए हाई कोर्ट ने महिलाओं को मंदिर के मुख्य स्थान पर जाने की अनुमति दी थी.

तृप्ति देसाई के काम पर नज़र रखने वालों का कहना है कि उनमें राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी है. तृप्ति देसाई ने कई राजनीतिक पार्टियों में अपनी जगह बनाने की कोशिश भी की लेकिन क़ामयाब नहीं हो सकीं.  2012 में उन्होंने पुणे के निकाय चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था मगर हार गई थीं.

तृप्ति देसाई पर आरोप लगते रहें हैं कि वो वास्तविक बदलाव के बजाए अपने आप को चर्चित करने के लिए आंदोलन में शामिल होती हैं. सबरीमला के मुद्दे पर सनातन संस्था ने भी उन पर निशाना साधा है.

शनि शिंगणापुर के बाद उन्होंने हाजी अली दरगाह, कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश, नासिक के त्र्यंबकेश्वर और कपालेश्वर मंदिरों के गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश की मांग करते हुए प्रदर्शन किए थे. हाजी अली दरगाह में प्रवेश के लिए प्रदर्शन के समय इस आंदोलन में शामिल मुस्लिम संगठनों के साथ उनका मतभेद हो गया था.

नासिक के मंदिर में प्रवेश के मुद्दे पर प्रदर्शन के दौरान उन पर सोडा बोतल से हमला भी किया गया था. 2016 में अदालत के फ़ैसले के बाद उन्होंने त्र्यंबकेश्वर के गर्भगृह में प्रवेश तो किया लेकिन उन्हें बहुत बड़े विरोध का सामना करना पड़ा. कपालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश की कोशिश के दौरान उन्हें रोक दिया गया था. जब उनकी गाड़ी शहर से गुज़र रही थी तब उस पर सोडा बोतलें फेंकी गईं थीं. इसके बाद वो कभी नासिक नहीं गईं.

तृप्ति पर रह रहकर आरोप लगते रहे हैं:
महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में प्रवेश के लिए तृप्ति के आंदोलन ने जब देश की सुर्खियों में जगह पाई तो उनसे सवाल किए गए कि मंदिर तक महिलाओं को बसों में ले जाने से लेकर तमाम खर्च के लिए पैसा कहां से आता है. इस पर उन्होंने कहा था, कोल्हापुर के छत्रपति ग्रुप की तरह कई संस्थाएं हैं जो उनकी मदद करती हैं.

सितंबर 2016 में तृप्ति को जाने-माने रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था. इसपर उन्होंने बताया था, ”मैं बिग बॉस के घर में रहने के लिए तैयार हूं. अगर वे ‘बिग बॉस’ के तौर पर किसी महिला की आवाज को लेते हैं तो ही मैं उनका प्रस्ताव स्वीकार करूंगी.” बता दें कि यह शो जब से शुरू हुआ है तब से इसमें बिग बॉस को पुरूष आवाज ही मिली है. तृप्ति एक बेटे की मां भी हैं, जिसका नाम योगीराज देसाई है.


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