वार्ड पार्षद से राज्य सभा सांसद तक का लम्बा सफ़र तय करने वाली जदयू नेत्री कहकशां परवीन

कहकशां परवीन ने बेहद कम समय में बेहद तेज गति से जितना राजनीतिक सफ़र तय किया है, वो आश्चर्यचकित करके रख देने वाला है. कहते हैं राजनीति में तरक्की सिर्फ काबिलियत से नहीं मिलती, बल्कि बिहार जैसे प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बहुत मायने रखते हैं. कहकशां परवीन का राजनीतिक सफ़र और नीतीश कुमार की राजनीतिक विश्लेषण दोनों मिल गये जिसका नतीजा हुआ कि एक वार्ड पार्षद बेहद कम समय में नगरपालिका की महापौर, फिर राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष और फिर सीधे राज्य सभा की सदस्य. ये सफ़र महज 12 साल के अन्दर तय हुआ.

कहकशां परवीन का जन्म रांची में हुआ. वहीँ उनकी शिक्षा दीक्षा हुई. शादी के बाद वे पहुंची भागलपुर के इशाक चक मोहल्ले में. उनके पति मुहम्मद नसीमुद्दीन मछली के कारोबारी थे. शादी के दो साल बाद जब वार्ड लेवल के चुनाव हुए, तो उस समय उनका वार्ड महिला सीट घोषित हुआ. पति के हौसला अफजाई के बाद वे चुनावी मैदान में उतरीं और फिर भागलपुर जिले में सबसे ज्यादा वोट से वार्ड पार्षद चुनी गयीं. यहाँ से उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई. इस चुनाव के बाद उन्हें भागलपुर नगर निगम का मेयर बनाया गया. सूत्र बताते हैं कि पांच सालों में उन्होंने काफी मेहनत से काम किया.

अगले चुनाव में वे फिर वार्ड पार्षद चुनी गयीं पर इस बार वे मेयर नहीं बन पायीं. पर 2006 में उन्होंने जदयू ज्वाइन कर लिया. और नीतीश कुमार ने उन्हें भागलपुर जिले में 20 सूत्रीय कार्यक्रम का उपाध्यक्ष बना दिया.

नीतीश कुमार के लिए भागलपुर एक महत्वपूर्ण सीट था. जदयू कभी इस सीट से नहीं जीता था. भागलपुर दंगे ने जहाँ एक तरफ कांग्रेस का इस क्षेत्र से सफाया कर दिया था, वहीँ राजद ने भागलपुर दंगे में मुख्य अभियुक्त के खिलाफ राजद ने कार्यवाही नहीं की थी. ऐसे में इस स्थिति का लाभ लेने के लिए  और  राजद के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए नीतीश कुमार दलित में महादलितों को आगे करने ( राम विलास पासवान का वोट बैंक धराशायी करने के लिए, जिसमे वे काफी हद तक सफल भी हुए), वे पिछड़े मुस्लिमों को आगे कर रहे थे ( अली अनवर इस नीति से फायदा उठाते हुए राज्य सभा पहुंचे; हालाँकि अब वे नीतीश कुमार से दूर चले गए हैं). ऐसे में कहकशां परवीन के रूप में उन्हें एक मुस्लिम चेहरा दिखा और उसपर से महिला. वे नीतीश के महिला सशक्तिकरण अभियान का भी चेहरा बनने की कूबत रखती थीं. ऐसे में कहकशां परवीन के लिए राजनीतिक सफ़र आसान हुआ.

2010 में वे बिहार राज्य महिला आयोग की चेयरमैन नियुक्त हुईं. 2010 में ही उन्हें विधान सभा चुनाव के लिए टिकट दिया गया. वे कहलगांव सीट से कांग्रेस के ताकतवर नेता सदानंद सिंह के खिलाफ खड़ी हुईं पर उन्हें लगभग 5200 वोट से मात खानी पड़ी.

पर हार ने भी उनके रास्ते बंद नहीं किये. वे नीतीश कुमार के लिए जरुरत बनी रहीं. ऐसे  में उन्हें फिर से बिहार राज्य महिला आयोग का चेयरमैन बनाया गया. उनके कार्यकाल में महिला उत्पीड़न से संबंधित कई मामलों में त्वरित कार्रवाई हुई है. कुछ समय तक काम करने के बाद उनके राजनीतिक जीवन में एक और सुनहरा अध्याय जुड़ा जब जदयू ने उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया. बिहार से जदयू के राज्यसभा सदस्य शिवानंद तिवारी, एनके सिंह एवं साबिर अली का कार्यकाल आगामी नौ अप्रैल को खत्म हो रहा था. इनकी जगह तीन नए चेहरों समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर, प्रभात खबर के संपादक कार हरिवंश के साथ  कहकशां परवीन को नए उम्मीदवार के तौर पर जदयू ने नामित किया था. वे प्रभात खबर के संपादक हरिवंश, धन्ना सेठ किंग महेंद्र के साथ 2014 में राज्य सभा भेजी गयीं.

राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कहकशां परवीन को उपसभापति पैनल में शामिल किया. यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई, जब अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सदन के कई सदस्यों ने एक महिला सदस्य को पैनल में शामिल करने की मांग की थी. राज्यसभा में बिहार से 16 सांसद जाते हैं. कांग्रेस के विप्लव ठाकुर ने कहा था कि उपसभापति पैनल में कोई महिला सदस्य नहीं है. नायडू ने बासवराज पाटिल के स्थान पर कहकशां परवीन को उपसभापति पैनल में शामिल करने का फैसला किया.

 मई 1, 2017 में कहकशां परवीन  के घर पर बम से हमला किया गया. दस लाख रंगदारी मांगने का मामला था.

कहकशां परवीन राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रही हैं. वे पढ़ी लिखी महिला हैं. उर्दू में उन्होंने एमए किया है. फिलहाल उनकी दो बेटियां हैं, दोनों की स्कूली शिक्षा रांची से हो रही है.

उनका रोजाना की दिनचर्या व्यस्तताओं से भरी रहती है. सुबह पांच बजे वे उठ कर नमाज पढ़ती हैं. वे पाँचों वक़्त की नमाज़ी हैं. उसके बाद वे लोगों से मिलती हैं. लोगों से मिलते हुए और उनकी समस्याएं सुनते हुए जब वक़्त मिलता है तो उसी में वो नाश्ता कर लेती हैं. वे घरेलु काम के लिए भी समय निकालती हैं. जब भी वे राज्य सभा के कामों से फ्री होकर भागलपुर आती हैं, तो वे क्षेत्र में घुमना पसंद करती हैं. लोग कहते हैं कि वे आम जनों के लिए सहज उपलब्ध हैं.

फिलहाल अब तक के राजनीतिक जीवन में वे विदेश दौरें पर नहीं जा पायी हैं, पर राजनीतिक जिम्मेवारियों के सिलसिले में वे देश भर में घुमती रहती हैं.

जदयू की राज्यसभा नेत्री कहकशां परवीन की छवि एक साफ़ सुथरे नेता की है. कहकशां परवीन या उनके पति के खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है.


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