कभी नमो का गुणगान, कभी नीतीश पर हमला; गिरिराज सिंह को चर्चा में रहने की कला आती है

माथे पर बड़ा सा टीका, और सिर के पीछे लम्बी सी छोटी और बोली में आग. अगर कोई गिरिराज सिंह को न एक नज़र में न पहचाने, तो उन्हें गलती से साधू समझ लेगा. गिरिराज सिंह का दुसरा नाम विवाद सिंह कह लीजिये. वे बतौर सांसद या केन्द्रीय मंत्री कम ही बातें करते हैं, उनकी पहचान उनके विवादस्पद बयानों से ज्यादा है.

8 सितम्बर 1952 को बिहार के लखीसराय जिले के बरहिया में जन्मे गिरिराज सिंह फिलहाल केंद्र सरकार में सूक्ष्म लघु और माध्यम उद्योग विभाग में राज्य मंत्री हैं. 66 साल के हो चुके हैं. राजनीति में लम्बी पारी खेल चुके हैं. उनकी  पत्नीं का नाम उमा सिन्हा है, उनका एक बेटा है जिसका नाम जयराज सिंह है. उनकी पढ़ाई मगध विश्विद्यालय से हुई है.

केंद्र सरकार के वेबसाइट में उनके बारे में कुछ विशेष जानकारी है, जो विवादों से बढ़कर है. मसलन उनकी विशेष रूचि कुछ क्षेत्रों में है, जैसे

  • कृषि, मत्स्य एवं पशु संसाधन आधारित ग्रामीण विकास
  • सोलर चरखा – ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि संवाहक
  • जैव खाद और अमीनो एसिड – रासायनिक उर्वरक का विकल्प
  • सौर उर्जा

इतना ही नहीं, उन्होंने एक शोध पत्र भी लिखा है. हालांकि उनकी राजनीतिक शैली को देखते हुए इस पर यकीन करना थोडा मुश्किल लग रहा है कि उन्होंने खुद ये शोध पत्र लिखा होगा. ‘मॉरिंगा बायोमास’आधारित पशु चारा – आईसीएआर,मथुरा के वैज्ञानिकों की मदद से अनुसंधान कार्य. शोध पत्र प्रकाशन और पेटेंट आवेदन प्रक्रिया में है.

50 साल की उम्र में पहली बार एमएलसी बने:

50 साल की उम्र में पहली बार गिरिराज सिंह बिहार विधान परिषद् के सदस्य बने. फिर उस समय से वे लगातार 12 साल यानि 2014 तक एमएलसी बने रहे. इस दौरान उन्होंने मंत्रालय की जिम्मेवारी भी संभाली. 2008 से 2010 तक वे बिहार सरकार में सहकारी विभाग के मंत्री रहे. फिर उनका विभाग बदला और 2010 से 2013 तक वे पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री रहे. 2013 में भाजपा और जदयू का गठबंधन टूटने के चलते उन्हें मंत्रालय से हाथ धोना पड़ा. इस दौरान भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में नरेंद्र मोदी आगे बढ़ रहे थे. नीतीश कुमार के साथ तल्खियाँ बढ़ चुकी थीं. लोकसभा चुनाव तक गिरिराज सिंह नीतीश कुमार पर बरसते रहे और नरेन्द्र मोदी की तारीफ के पुल बांधते रहे. इस लॉयल्टी का इनाम उन्होंने मिला. 2014 में नवादा लोक सभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार घोषित किये गये, हालांकि उनकी इच्छा बेगुसराई से चुनाव लड़ने की थी. पर मोदी लहर में उन्हें जीत हासिल हुई और उन्होंने राजद के उम्मीदवार राज्बल्लभ यादव को पराजित किया.

इस बीच उनकी नमो आराधना जारी रही. जब बात आई कि मंत्रिमंडल में बिहार के कुछ नेताओं को प्रतिनिधित्व देना चाहिए, तो गिरिराज सिंह का नाम शीर्ष में था. भूमिहार जाति के वोट पर मज़बूत पकड़ बनाने की इच्छा और सवर्णों को सकारात्मक सन्देश देने की मंशा में गिरिराज सिंह की लाटरी निकली. वे केंद्र सरकार में सूक्ष्‍म,लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री बन गये.

विवादों की लम्बी फेहरिश्त: 

गिरिराज सिंह का विवादों से लंबा रिश्ता रहा है. उन्होंने कई ऐसे बयान दिए हैं, जिनके चलते बिहार की राजनीति में हलचल मची है. राम मंदिर को लेकर सवा सौ करोड़ लोगों में व्याकुलता है. इसलिए इस पर कोर्ट और सरकार को विचार करने की जरूरत है.  राम मंदिर का अध्यादेश राज्य सभा सदस्य राकेश सिंहा प्राइवेट बिल को लेकर आ रहे हैं. इसमें सौ करोड़ हिन्दुओं का सम्मान है. इसलिए राम मंदिर बनाने से कोई नहीं रोक सकता.

उन्होंने कोर्ट को ही निशाने पर लेते हुए कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर फैसला देने के लिए कोर्ट के पास समय नहीं है और आतंकियों तथा अन्य मामलों में न्यायालय रात में भी अपना फैसला सुना देती है.

गिरिराज सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को देश भर में मंदिरों का भ्रमण करने के बजाए अयोध्या में राम मंदिर के समर्थन में खुलकर सामने आने की चुनौती दी है.

“नहीं पता राहुल गांधी हिंदू हैं, अगर वह राम मंदिर पर चुप रहे तो शिव की भक्ति भी स्वीकार्य नहीं.”- गिरिराज सिंह.

गिरिराज सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे पर कहा

‘अब हिंदुओं का सब्र टूट रहा है. मुझे भय है कि हिंदुओं का सब्र टूटा तो क्या होगा?’

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने को सही ठहराया. इसके साथ-साथ उन्होंने इसी तर्ज पर बिहार के कुछ शहरों का भी नाम बदले जाने की मांग सोमवार को उठाई. उन्होंने कहा,

‘मैं आपसे पूछता हूं कि आपके घर पर कोई कब्जा कर ले और जब आप सामर्थ्यवान होंगे तो क्या अपने घर का नाम उसी का रहने देंगे?’

जदयू नेता संजय सिंह ने कहा कि इस तरह के बेतुके बयान का क्या मतलब है? वो मीडिया में बने रहने के लिए एेसे बयान देते रहते हैं. वो इस तरह कहकर देश और समाज को बांटना चाहते हैं. जहां तक वो बख्तियारपुर जिले का नाम बदलने की मांग कर रहे हैं तो पहले उसका इतिहास जान लें.

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता गिरिराज सिंह के उस बयान को समाज व देश को तोड़ने वाला बताया है जिसमें उन्होंने कहा कि मुसलमानों से हिंदू नाराज हो गए और यह नफरत ज्वाला में बदल गई तो मुसलमान सोचें फिर क्या होगा.

‘भारत के मुसलमान प्रभु राम के वंशज हैं. वे मुगलों के वंशज नहीं हैं. इसलिए वे राम मंदिर का विरोध न करें.’

‘सबका साथ, सबका विकास’ की रट लगाने वाले मंत्री ने कहा कि

‘राम मंदिर जरूर बनना चाहिए. यह मुद्दा कैंसर की दूसरी स्टेज की तरह है. राम मंदिर नहीं बना तो यह लाइलाज हो जाएगा.’

गिरिराज सिंह जनसंख्या समाधान फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित जनसंख्या कानून रैली को संबोधित करने पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि

‘जहां हिंदुओं की आबादी कम है, वहां उनकी आवाज बंद हो जाती है.’

गिरिराज सिंह ने  ट्वीट कर कहा:

”1947 में धर्म के आधार पर देश का विभाजन हुआ, पुनः 2047 तक वैसी परिस्थिति होगी.”

उन्होंने आगे कहा है ”देश विरोधियों के समर्थन से जेएनयू- एएमयू जैसे लोग विभाजन की बात करेंगे. 72 साल में जनसंख्या 33 करोड़ से 136 करोड़ हो गई. विभाजनकारी ताक़तों का जनसंख्या विस्फोट भयावह है. देश बचाने को गाँव-गाँव नगर-नगर से आंदोलन होना चाहिए.”

कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने  जब फोटो शेयर किया तो गिरिराज सिंह ने सवाल उठाए. उन्होंने राहुल गांधी की एक फोटो ट्वीट कर कहा है कि

‘ये तो फोटोशॉप है छड़ी की परछाई गायब है.’

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह नवादा जेल में दंगा के आरोपियों से भी मिल आये हैं और उनकी बदहाली पर आंसू भी बहा आये हैं. मुलाकात के बाद गिरिराज सिंह ने सभी को निर्दोष बताया और कहा कि सरकार को लगता है कि हिंदू को दबाकर ही ‘सांप्रदायिक सौहार्द’ आयेगा.  नीतीश कुमार ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की सार्वजनिक तौर पर आलोचना की थी और कहा कि वह सौहार्द को बिगाड़ना चाहते हैं.

गिरिराज सिंह एक बार फिर सुर्ख़ियों में आये जब नवादा के रहने वाले बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री बीके प्रसाद ने गिरिराज सिंह को विदेशी सांसद बताते हुए भगाने वाले पोस्टर लगवाए. इससे पहले भी नवादा के लोगों ने गिरीराज सिंह को गायब होने पर ढूंढ के लाने वाले को ईनाम देने का बैनर लगा था.  वैसे वे खुद नमो विरोधियो को पाकिस्तान भेजने की बात कर चुके हैं.

सांसद के घर से करोडो की चोरी:

2014 में पटना में बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह के घर सोमवार को चोरी हुई थी. इस घटना के तुरंत बाद प्रशासन तुरंत हरकत में आया, और पुलिस ने चोरों को पकड़ने के साथ ही चोरी किए गए 1.14 करोड रुपये नकद और आभूषण को बरामद कर लिया. जब पैसे के श्रोत के बारे में पूछताछ शुरू हुई तो गिरिराज सिंह साफ़ मुक़र गये.

जमीन पर अबैध कब्जे का आरोप:

गिरिराज सिंह के कारनामों की लिस्ट लम्बी है. उनके ऊपर दानापुर में जमीन फर्जीवाड़ को लेकर FIR दर्ज है.   गिरिराज सिंह के ऊपर आरोप है कि उन्होंने करीब दो एकड़ जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया है. शिकायत पत्र में ये भी कहा गया है कि वो इस जमीन की अवैध तरीके से खरीद ब्रिकी भी कर रहे हैं. इस एफआईआर के बाद विपक्ष ने भी मोदी सरकार और नीतीश सरकार पर हमला बोल दिया है.

गिरिराज पर एफआईआर के बाद तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर हमला बोला दिया. उन्होंने कहा कि अब नीतीश कुमार की नैतिकता कहां चली गई है और वो गिरिराज सिंह के मुद्दे पर जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं?

‘देश के सबसे बड़े अफवाह मियां और खुलासा मास्टर के मुंह में दही जम गया है?’

तेजस्वी ने कहा कि नीतीश जी, आपकी नाक के नीचे आपके दुलारे सहयोगी दल के वरिष्ठ नेता और आपके प्यारे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने लगभग 3 एकड़ गरीबो की जमीन पर जबरन कब्ज़ा कर लिया है.

नवादा लोक सभा क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले गिरिराज सिंह:

वर्ष 2004 के चुनाव बिहार में लालू प्रसाद की लहर पर केंद्रित था. अब तक के सबसे ज्यादा वोट पाने वाले विजेता सांसद बने थे वीरचंद पासवान. वर्ष 2009 में भाजपा व जदयू ने संयुक्त रूप से चुनाव लड़ा. इस दौर में नीतीश लहर से इनकार नहीं किया जा सकता है. पर, वोट की प्रतिशतता कम रही. जीते सांसद डॉ भोला सिंह को सिर्फ 1,30,608 वोट ही मिले और वे 34,917 वोटों के अंतर से चुनाव जीत गये. वर्ष 2014 में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में पूरी तरह नरेंद्र मोदी का लहर दिखा. बावजूद गिरिराज सिंह 3,90,248 वोट ही ला सके.

नवादा लोक सभा से अभी तक सिर्फ एक सांसद दुबारा चुना गया है:

नवादा संसदीय क्षेत्र से किसी को ज्यादा मौके मिलने का इतिहास नहीं रहा है. लोकसभा के अबतक कुल 16 चुनावों में यहां से सिर्फ कुंवर राम को ही दोबारा मौका मिल पाया है. 1980 एवं 1984 में कांग्रेस के टिकट पर कुंवर दो बार लगातार चुने गए थे. बाकी सांसदों को नवादा के मतदाताओं ने आया राम गया राम टाइप से निपटाया है. इसे महज संयोग कह सकते हैं. किंतु भाजपा के फायर ब्रांड नेता, सांसद एवं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने शायद इसे गंभीरता से लिया है. यही वजह है कि उन्होंने क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा दी है हालांकि उनकी नजर बेगूसराय पर भी है, जिसके लिए वह पिछली बार भी बेताब थे. नवादा के सामान्य सीट होने के बाद के दो चुनाव नतीजों की समीक्षा के बाद तेजस्वी को अहसास हो गया है कि भूमिहार बहुल इस क्षेत्र में सिर्फ माय (मुस्लिम-यादव) समीकरण के सहारे भाजपा से मुकाबला नहीं किया जा सकता है इसलिए वह दूसरे समीकरण पर भी काम कर रहे हैं.

 2014 के लोक सभा चुनाव में वोटिंग:

गिरिराज सिंह : भाजपा : 390248

राज बल्लभ यादव : राजद : 250091

कौशल यादव : जदयू : 168217

क्या गिरिराज को निकट भविष्य में बिहार में बड़ा रोल मिलने की उम्मीद है?

नीतीश कुमार से उनकी अदावत जगजाहिर है. रह रह कर वे नीतीश पर हमला बोलते रहते हैं. वे रामनवमी के अवसर पर नीतीश कुमार पर आरोप लगा चुके हैं कि नीतीश मेरी  ह्त्या करवाना चाहते हैं. इस बात पर मंच पर ही दोनों में बहस हो गयी.

सीएम नीतीश के सामने इस वक्त कानून व्यवस्था, करप्शन और सवर्णों की नाराजगी से पार पाना बड़ी चुनौती है. इस चुनौती को ध्यान में रखकर कई बड़ी रणनीति पर विचार हो रहा है. उडती खबर यह भी है कि  नीतीश कुमार अपने पास के बड़े मंत्रालयों का बोझ कम करना चाहते हैं. इसके लिए एक और डिप्टी सीएम की चर्चा है. तलाश ऐसे नेता की है जो कई पैमाने पर फिट हो. मसलन सवर्णों की नाराजगी को मैनेज कर सके. ढंग से मंत्रालय चला सके और साथ ही बिहार में बीजेपी का भविष्य बेहतर कर सके.

मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते चर्चा है कि बीजेपी की तैयारी बिहार में विकास और हिंदुत्व के नाम पर आगे बढ़ने की है. सूत्रों की माने तो लोकसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे का जो फॉर्मूला है उसमें बिहार का मंत्रिमंडल, बिहार विधानसभा की सीटों का बंटवारा भी शामिल है. नीतीश कुमार के रणनीतिकार ललन सिंह मुंगेर से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. इस सीट से सूरजभान की पत्नी वीणा सिंह एलजेपी की सांसद हैं. ललन सिंह के मुंगेर लड़ने की सूरत में सूरजभान को नवादा या बेगूसराय शिफ्ट करने की प्लानिंग है.

बेगूसराय के लिए पूर्व सांसद मोनाजिर हसन को नीतीश जुबान दे चुके हैं. ऐसे में नवादा की सीट बचती है. अब एक प्लानिंग ये हो सकती है कि गिरिराज सिंह को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी देकर नवादा की सीट एलजेपी के खाते में डाल दें.

नीतीश और बीजेपी को इतनी मशक्कत इसलिए करने की जरूरत पड़ रही है क्योंकि कांग्रेस सवर्णों के सहारे बीजेपी के वोट बैंक को कमजोर करने में लगी है. मिथिलांचल में ब्राह्मण चेहरा मदन मोहन झा को अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने मैथिल ब्राह्मण को तोड़ने की कोशिश की है.

भूमिहार इस बात से भी नाराज है कि एससी-एसटी एक्ट को लेकर हुए भारत बंद में उनके समाज के नौजवान और महिलाओं को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया. पटना में प्रदर्शन किया तो पुलिस ने दौड़ा दौड़ा कर पीटा. प्रमोशन में आरक्षण से लेकर कई और ऐसे मामले हैं जिसकी वजह से सवर्ण वोटरों पर एनडीए की पकड़ ढीली हो रही है. इसी ढिलाई को कसने के लिए बीजेपी के रणनीतिकार लगातार फीडबैक ले रहे हैं. कुछ लोगों की टीम सर्वे भी कर रही है कि आधार वोट को कैसे बरकरार रखा जाए.

बिहार में जब 2015 का चुनाव हो रहा था तब  अखबार से लेकर टीवी तक सोशल मीडिया से लेकर चुनाव मैदान तक गिरिराज का ही जलवा दिखता था. लोग ये मानने भी लगे थे कि सरकार बनी तो गिरिराज सीएम होंगे. क्योंकि गिरिराज नरेंद्र मोदी कैंप के हैं.  पर अब जदयू और बीजेपी साथ हैं. नीतीश और गिरिराज में कई मौकों पर तल्खी दिख चुकी है.  ऐसे में सवाल बना हुआ है कि क्या भविष्य में गिरिराज सिंह को बिहार की राजनीति में बड़ा रोल मिल सकता है, खासकर नीतीश के विरोध के सामने?


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