बंगलोर के एक छोटे से फ्लैट से शुरू होकर फ्लिप्कार्ट भारतीय बाज़ार का सबसे बड़ा ऑनलाइन रिटेलर बना

पिछले दिनों फ्लिप्कार्ट काफी चर्चा में रहा, हालाँकि कारण सही नहीं थे.  वालमार्ट को फ्लिप्कार्ट के बेचे गये हिस्से का हिसाब देने के लिए बिनी बंसल को आयकर विभाग ने नोटिस जारी किया था. पर इससे भी बड़ा समाचार था कि भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर कंपनी फ्लिपकार्ट के सीईओ और सह-संस्थापक बिन्नी बंसल ने ‘व्यक्तिगत दुर्व्यवहार’ के आरोपों के चलते इस्तीफा दे दिया था. फ्लिपकार्ट को पिछले साल वॉलमार्ट ने खरीद लिया था. कंपनी के सह संस्थापक सचिन बंसल अपनी हिस्सेदारी बेचकर पहले ही इस्तीफा दे चुके थे  लेकिन 37 वर्षीय बिन्नी पद पर बने हुए थे.

कंपनी का कहना है कि बिन्नी के खिलाफ शिकायत की अंदरूनी जांच में आरोपों के पक्ष में सबूत तो नहीं मिले हैं लेकिन इस मामले पर बिन्नी बंसल ने पारदर्शिता नहीं दिखाई है. हालांकि, बिन्नी बंसल ने कंपनी के कर्मचारियों को लिखे एक मेल में इन आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने लिखा, ”इन आरोपों से मैं हैरान हूं और दृढ़ता से इन्हें खारिज करता हूं.”

अमेज़न से काम की बारीकियों को सीखा:

भारतीय स्टार्टअप की दुनिया में जय-वीरू कहलाने वाले बिन्नी बंसल और सचिन बंसल कुछ ही सालों में कॉलेजमेट से सहकर्मी और फिर बिजनेस पार्टनर बन गए. बिन्नी बंसल चंडीगढ़ के रहने वाले हैं. उनके पिता एक बैंक के चीफ मैनेजर रहे हैं और मां भी सरकारी नौकरी में हैं. उन्होंने आईआईटी, दिल्ली से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की है.

कॉलेज से निकलने के बाद उन्होंने गूगल में नौकरी की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुए. गूगल से उन्हें दो बार खाली हाथ लौटना पड़ा.

अंत में ऑनलाइन रिटेलर कंपनी अमेजन में उन्हें नौकरी मिल गई. अमेजन में ही वह अपने पुराने दोस्त सचिन बंसल से मिले. सचिन बंसल भी आईआईटी, दिल्ली में कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट रहे  थे और बिन्नी से एक साल सीनियर थे. अमेजन में साथ काम करते हुए दोनों को खुद के स्टार्टअप का खयाल आया. दोनों में से किसी को कारोबार का अनुभव नहीं था लेकिन उनके पास एक आइडिया जरूर था. दोनों ने कुछ हिम्मत दिखाई और नौकरी छोड़ दी. बिन्नी ने सिर्फ नौ महीने ही अमेजन में नौकरी की. दोनों को ऑनलाइन रिटेल का अनुभव था लेकिन उस समय भारत में ऑनलाइन रिटेलिंग अपने शुरुआती दौर में थी.

सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने 2007 में फ्लिप्कार्ट की शुरुआत की: 

बिन्नी और सचिन बंसल ने साल 2007 में फ्लिपकार्ट की शुरुआत की और पहले सिर्फ किताबें बेचने का फैसला किया. दोनों ने 4 लाख रुपये पूंजी के साथ कंपनी शुरू की. शुरुआती काम था किताबों की होम डिलिवरी. जैसा कि हर स्टार्ट अप के साथ होता है, इस कंपनी के मालिक और स्टाफ दोनों वही थे.

बिन्नी और सचिन बंसल खुद किताबें खरीदते और वेबसाइट पर आए ऑडर्स पर अपने स्कूटर से डिलीवरी करते. कंपनी के पास प्रचार के भी खास साधन नहीं थे इसलिए दोनों बुक स्टोर्स के पास जाकर अपनी कंपनी के पर्चे भी दिया करते थे.   फिर दोनों ने 2008 में बैंगलुरू में एक फ्लैट और दो कंप्यूटर सिस्टम के साथ अपना ऑफिस खोला. अब  तक उन्हें हर दिन करीब 100 ऑर्डर मिलने लगे थे.

थोडा समय बीतने के बाद  फ्लिपकार्ट ने बेंगलुरू में सोशल बुक डिलीवरी  सर्विस ‘वीरीड’ और ‘लुलु डॉटकॉम’ को खरीद लिया. साल 2011 में फ्लिपकार्ट ने कई और कंपनियां खरीदीं जिनमें बॉलीवुड पोर्टल चकपक की डिजिटल कंटेट लाइब्रेरी भी शामिल थी.

फ्लिप्कार्ट ने ऑनलाइन रिटेलिंग की मुश्किलों को अवसर में बदल डाला:

ऑनलाइन सामान लेते वक्त कई लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं थीं. सामान की गुणवत्ता से लेकर उसकी डिलिवरी की टाइमिंग तक. फ्लिपकार्ट ने इस मुश्किल को मौके में बदल लिया. बिन्नी और सचिन बंसल पहली बार भारत में कैश ऑन डिलिवरी का विकल्प लेकर आए. इससे लोगों को अपना पैसा सुरक्षित महसूस हुआ और कंपनी पर भरोसा बढ़ता गया. साल 2008-09 में फ्लिपकार्ट ने 4 करोड़ रुपये की बिक्री कर दी. इसके बाद निवेशक भी इस कंपनी की ओर आकर्षित हुए.

कंपनी ने कस्टमर सर्विस के साथ साथ सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन पर काम किया. जब कोई किताब खरीदने के लिए उसका नाम किसी सर्च इंजन में डालता तो सबसे ऊपर फ्लिपकार्ट का नाम आता। इस कारण कंपनी को विज्ञापन भी मिलने लगे.

2009 से कंपनी को निवेशक मिलने लगे:

कंपनी में साल 2009 में ऐसेल इंडिया ने 10 लाख डॉलर का निवेश किया जो साल 2010 में एक करोड़ डॉलर पहुंच गया.

इसके बाद 2011 में फ्लिपकार्ट को एक और बड़ा निवेशक टाइगर ग्लोब मिला जिसने दो करोड़ डॉलर का निवेश किया.  वेबसाइट चल निकली तो किताबों के अलावा फर्नीचर, कपड़े, असेसरीज, इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट जैसे सामान भी बेचे जाने लगे. ई-कॉमर्स का बाजार बढ़ने के साथ फ्लिपकार्ट को दूसरी कंपनियों से चुनौती मिलने लगी थी. इस को देखते हुए उन्होंने कुछ ऑनलाइन रिटेल वेबसाइट को खरीदा. फ्लिपकार्ट ने 2014 में मिंत्रा और 2015 में जबॉन्ग को खरीद लिया. कंपनी स्नैपडील को भी खरीदना चाहती थी लेकिन बात नहीं बन पाई. लेकिन, मार्च 2018 में वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट की 77 प्रतिशत हिस्सेदारी 16 अरब डॉलर में खरीद ली.

दरअसल, कंपनी को अमेजन के भारत में आने के साथ ही चुनौती मिलनी शुरू हो गई थी. इस प्रतिस्पर्धा में उन्हें काफी निवेश करना पड़ रहा था हालांकि, वॉलमार्ट के साथ अमेजन भी फ्लिपकार्ट को खरीदने की रेस में शामिल थी लेकिन वॉलमार्ट आगे रही.

दोनों के अलग अलग रोल: 

फ्लिप्कार्ट टीम के दोनों लोगों की अलग अलग भूमिका रही. बिन्नी बंसल को बैक रूम मास्टर माइंड माना जाता है.  अमूमन सचिन बंसल ही मीडिया को डील किया करते थे। बिन्नी कंपनी में पीछे रहकर काम करते रहे और सचिन उसके लीडर के तौर पर सामने रहे. मीडिया में ये भी खबरें थीं कि फ्लिपकार्ट छोड़ने को लेकर सचिन बंसल ज्यादा खुश नहीं थे. इकोनॉमिक्स टाइम्स ने लिखा है कि कंपनी दो सीईओ को नहीं रखना चाहती थी.


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